Personal Loan Prepayment: पर्सनल लोन समय से पहले चुकाना सही है या नहीं? समझिए कब होगा फायदा
सारांश


वित्तीय डेस्क: पर्सनल लोन! ये नाम सुनकर ही एक तरफ मदद का अहसास होता है, तो दूसरी तरफ EMI की चिंता सताने लगती है। लेकिन क्या हो जब आपके पास अचानक कुछ पैसे आ जाएं? बोनस मिला हो, या फिर कोई पुरानी बचत काम आ जाए? ऐसे में सबसे पहला ख्याल क्या आता है? यही न कि चलो, इस पर्सनल लोन को जल्दी से निपटा दें, सिर से बोझ हल्का हो जाएगा! सुनने में तो ये बड़ा फायदे का सौदा लगता है, लेकिन क्या वाकई ऐसा है?
आप भी सोचते होंगे कि आखिर इसमें क्या सोचना, लोन चुका दो, ब्याज से बच जाओ। लेकिन भैया, बात इतनी सीधी नहीं है।
कई बार वाकई हजारों-लाखों रुपये का फायदा हो जाता है, वहीं कभी-कभी फायदा नाम मात्र का होता है और उलटा नुकसान झेलना पड़ सकता है। तो आज इसी गुत्थी को सुलझाते हैं कि पर्सनल लोन का समय से पहले भुगतान (Prepayment) करना कब समझदारी है और कब जल्दबाजी!
देखिए, पर्सनल लोन की ब्याज दरें आम तौर पर होम लोन या कार लोन से थोड़ी ज्यादा होती हैं। अगर आपका सिबिल स्कोर बहुत अच्छा नहीं है, तो ये दरें 15-20% तक भी जा सकती हैं।
इतनी ज्यादा ब्याज दर पर जब EMI कटती है, तो मन में एक बेचैनी सी रहती है। लोग सोचते हैं कि जितना जल्दी इस कर्ज से मुक्ति मिल जाए, उतना अच्छा।
और जब अचानक कहीं से एक बड़ी रकम हाथ लगती है, तो ये सोच और मजबूत हो जाती है।
अगर आप पर्सनल लोन की EMI की बनावट को समझें, तो आपको पता चलेगा कि शुरुआती महीनों में आप जो किस्त चुकाते हैं, उसमें ब्याज का हिस्सा ज्यादा होता है और मूलधन (Principal Amount) का हिस्सा कम। जैसे-जैसे लोन की अवधि आगे बढ़ती है, ब्याज का हिस्सा कम होता जाता है और मूलधन का हिस्सा बढ़ता जाता है।
इसका सीधा मतलब ये है कि अगर आप लोन की शुरुआत में प्रीपेमेंट करते हैं, तो आप बचे हुए पूरे ब्याज पर बचत करते हैं। वहीं, अगर आप लोन खत्म होने के कुछ महीने पहले प्रीपेमेंट करते हैं, तो बचत बहुत कम होती है, क्योंकि तब तक आप ज़्यादातर ब्याज पहले ही चुका चुके होते हैं।
चलिए, एक उदाहरण से इसे और साफ करते हैं। मान लीजिए आपने ₹5 लाख का पर्सनल लोन 5 साल के लिए 15% सालाना ब्याज पर लिया है।
इस पर आपकी हर महीने की EMI करीब ₹11,895 बनेगी। पूरे 5 साल में आप बैंक को कुल मिलाकर लगभग ₹7.14 लाख चुकाएंगे, जिसमें से ₹2.14 लाख सिर्फ ब्याज होगा।
अब सोचिए, आपने 12 महीने यानी एक साल बाद अचानक ₹2 लाख का प्रीपेमेंट कर दिया। इस ₹2 लाख को चुकाने से आपकी बची हुई ब्याज की रकम में हजारों रुपये की जबरदस्त कमी आ सकती है।
अगर बैंक आपसे प्रीपेमेंट चार्ज कम लेता है या लेता ही नहीं है, तो ये फैसला आपकी जेब को काफी राहत दे सकता है। ये हजारों की बचत आपके लिए किसी बोनस से कम नहीं होगी।
पर्सनल लोन की ब्याज दरें जैसा कि हमने बताया, 10% से लेकर 24% तक हो सकती हैं, जो कि होम लोन के मुकाबले काफी ज्यादा हैं। ऐसे में, अगर आपका लोन 14%, 15% या उससे भी ज्यादा पर चल रहा है, तो बिना ज्यादा सोचे-समझे जल्दी से जल्दी इसे निपटाने की कोशिश करनी चाहिए।
जितनी जल्दी आप इसे चुकाएंगे, उतनी ही ज्यादा ब्याज की बचत होगी। लेकिन हां, अगर आपको किसी खास स्कीम या कंपनी के ऑफर के तहत बहुत कम ब्याज दर पर पर्सनल लोन मिल गया है (जैसे 8-9% पर), तो फिर एक बार कैलकुलेशन जरूर कर लेनी चाहिए।
क्योंकि ऐसी स्थिति में शायद आपको बहुत बड़ा फायदा न मिले।
ये एक ऐसी चीज है जिस पर अक्सर लोग ध्यान नहीं देते। बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) लोन को समय से पहले बंद करने पर एक चार्ज वसूलती हैं, जिसे फोरक्लोजर चार्ज या प्रीपेमेंट चार्ज कहते हैं।
ये चार्ज आमतौर पर बची हुई मूलधन राशि का 2% से 5% तक हो सकता है। कई बैंक तो लोन लेने के शुरुआती 6 या 12 महीने तक प्रीपेमेंट की इजाजत भी नहीं देते।
तो, जब भी आप प्रीपेमेंट का मन बनाएं, सबसे पहले अपने बैंक या NBFC से इन चार्जेस के बारे में पता कर लें। आपको ये देखना होगा कि ब्याज में जितनी बचत होगी, वो इस प्रीपेमेंट चार्ज से ज्यादा है या नहीं।
अगर प्रीपेमेंट चार्ज इतना ज्यादा है कि आपकी बचत नाम मात्र की रह जाती है, तो फिर शायद इंतजार करना ही बेहतर होगा।
मान लीजिए आपके पास ₹3 लाख की बचत है और आपने जोश-जोश में पूरी रकम पर्सनल लोन चुकाने में लगा दी। अब अचानक एक महीने बाद घर में कोई मेडिकल इमरजेंसी आ गई और आपको ₹2 लाख की जरूरत पड़ गई।
ऐसे में क्या करेंगे? फिर से नया लोन लेंगे या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करेंगे? और वो भी ऐसी स्थिति में जब शायद आपकी लोन लेने की क्षमता पहले जैसी न रहे या ब्याज दरें ज्यादा हों। इसलिए, कभी भी अपनी पूरी बचत लोन चुकाने में न लगाएं।
एक इमरजेंसी फंड हमेशा रखें, जिसमें कम से कम 3 से 6 महीने के आपके जरूरी खर्चों जितनी रकम हो। ये आपको किसी भी मुश्किल घड़ी में बचाता है।
अगर आप निकट भविष्य में होम लोन लेने की सोच रहे हैं, तो पर्सनल लोन को पहले खत्म करना आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। बैंक जब आपको होम लोन देते हैं, तो वे आपकी Debt-to-Income (DTI) Ratio देखते हैं।
इसका मतलब है कि आपकी कमाई का कितना हिस्सा EMI चुकाने में जा रहा है। अगर आप पहले से ही पर्सनल लोन की EMI चुका रहे हैं, तो आपकी DTI Ratio ज्यादा होगी, जिससे बैंक को लगेगा कि आपकी कर्ज चुकाने की क्षमता कम है।
पर्सनल लोन खत्म करने से आपकी DTI Ratio बेहतर होती है, जिससे आपको होम लोन मिलने में आसानी होती है और अच्छी ब्याज दर भी मिल सकती है। बैंक आपकी कुल EMI को ध्यान में रखते हैं, इसलिए अगर आपकी कुल EMI कम होगी, तो नए लोन की मंजूरी मिलना आसान हो जाएगा।
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