तेहरान: दुनिया के नक्शे पर एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच की जंग अब उस मोड़ पर पहुंच गई है जहां से वापसी का रास्ता बहुत मुश्किल नजर आ रहा है। सीजफायर खत्म होते ही अमेरिका ने ईरान पर अपने हमलों का तीसरा दौर शुरू कर दिया है। आसमान से बरसते बमों और मिसाइलों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में खलबली मचा दी है। मामला इतना गंभीर है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव अपने चरम पर है और दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि यह टकराव कहां तक जाएगा।
बता दें कि अमेरिकी सेना ने इस बार ईरान के उन ठिकानों को निशाना बनाया है जो उसकी सैन्य ताकत की रीढ़ माने जाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के मिसाइल ठिकानों और एयर डिफेंस सिस्टम पर जबरदस्त एयरस्ट्राइक की है।
इतना ही नहीं, होर्मुज के आसपास गश्त कर रही ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कई बोट्स को भी निशाना बनाया गया है। यह हमला अचानक नहीं हुआ, इससे पहले बुधवार और गुरुवार को भी अमेरिका ने ईरान की धरती पर बम बरसाए थे।
ईरान ने क्यों दी बदला लेने की चेतावनी?
इस पूरे विवाद की एक बड़ी वजह ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई का कड़ा रुख है। अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद उन्होंने पहली बार दुनिया को एक कड़ा संदेश भेजा है।
मुजतबा खामेनेई ने साफ शब्दों में कहा है कि वह अपने पिता के 'बेगुनाह खून' का बदला जरूर लेंगे और यह सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि पूरे देश की इच्छा है। बस इसी बयान के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव और ज्यादा बढ़ गया और हमलों का दौर शुरू हो गया।
रविवार को ईरान ने भी पलटवार किया और दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र में कई नए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान का कहना है कि उसने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
इसके अलावा कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भी हमलों की खबरें आईं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
क्या अमेरिकी डिफेंस सिस्टम रोक पाया हमले?
ईरान की राजधानी तेहरान का दावा है कि उसके विस्फोटक ड्रोनों ने कुवैत में तैनात पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, गोला-बारूद के भंडार और अमेरिकी रडार स्टेशनों को तबाह कर दिया है। वहीं, बहरीन में अमेरिकी संचार और रडार सुविधाओं पर भी हमले का दावा किया गया है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का तो यहाँ तक कहना है कि उन्होंने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।
लेकिन क्या वाकई ये हमले कामयाब रहे? इस पर दावे अलग-अलग हैं। कतर की सेना ने कहा कि उन्होंने अपनी तरफ आने वाली मिसाइल को बीच रास्ते में ही रोक लिया।
बहरीन में एयर रेड सायरन बजने लगे और लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर जाने के लिए कहा गया। UAE ने भी दावा किया कि उनका एयर डिफेंस सिस्टम ईरान की मिसाइलों और ड्रोनों को रोकने में जुटा है, हालांकि कई जगहों पर धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
भारतीय नागरिक पर क्या बीती?
इस युद्ध जैसी स्थिति के बीच भारत के लिए एक बुरी खबर सामने आई है। ओमान तट के पास एक व्यापारी जहाज 'GFS गैलेक्सी' पर हमला हुआ।
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने रविवार को जानकारी दी कि इस जहाज पर 11 भारतीय नागरिक सवार थे। राहत की बात यह है कि 10 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन एक भारतीय नागरिक अब भी लापता है।
भारत सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और लापता नागरिक की तलाश जारी है।
कुल मिलाकर, स्थिति काफी तनावपूर्ण है। एक तरफ अमेरिका अपने हवाई हमलों से ईरान को दबाना चाहता है, तो दूसरी तरफ ईरान मिसाइलों और ड्रोनों से जवाब दे रहा है।
बीच में फंसे व्यापारी जहाज और लापता भारतीय नागरिक ने इस संकट की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।





































