अंतर्राष्ट्रीय डेस्क: ओमान तट के पास समंदर में इन दिनों खूब हलचल है. कभी भी कुछ भी हो जाने का खतरा मंडरा रहा है. इसी गहमा-गहमी के बीच एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरे इलाके में ही नहीं, बल्कि भारत में भी चिंता बढ़ा दी है. आप सोचिए, समंदर के बीचों-बीच एक कमर्शियल जहाज पर हमला हो जाए और उस पर आपके अपने देश के 11 नागरिक सवार हों, तो कैसा महसूस होगा? ठीक ऐसा ही कुछ हुआ 'GFS गैलेक्सी' नाम के एक कमर्शियल जहाज के साथ, जिस पर अचानक हमला बोल दिया गया. इस हमले ने सबकी सांसे रोक दीं. खुशी की बात ये है कि इनमें से 10 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन एक भारतीय नाविक अभी भी लापता है. यह खबर जितनी राहत देने वाली है, उतनी ही परेशान करने वाली भी.
ये कोई छोटी-मोटी घटना नहीं है, बल्कि एक बड़े इंटरनेशनल विवाद की आग में घी डालने जैसी है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने रविवार, 12 जुलाई को इस हमले की कड़ी निंदा की है.
भारत सरकार ने साफ-साफ कहा है कि इस तरह से आम लोगों के जहाजों और इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना बिल्कुल बंद होना चाहिए. जब इतनी बड़ी घटना सामने आई तो सबका ध्यान सबसे पहले इस पर गया कि जहाज पर आखिर कितने लोग सवार थे और उनकी स्थिति क्या है?
आखिर हुआ क्या था उस दिन?
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में बताया कि 'GFS गैलेक्सी' जहाज पर कुल 11 भारतीय नागरिक सवार थे. हमले के बाद आनन-फानन में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया.
अच्छी खबर ये रही कि 10 भारतीयों को तो बचा लिया गया, लेकिन एक नाविक का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है. भारत के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि अपने किसी नागरिक का लापता होना कभी भी आसान नहीं होता.
हर कोई बस यही दुआ कर रहा है कि वो लापता नाविक भी जल्द से जल्द सुरक्षित मिल जाए.
भारत सरकार इस मामले पर बेहद करीब से नजर रख रही है. ओमान में भारतीय दूतावास लगातार ओमान के अधिकारियों के साथ संपर्क में है और खोज व बचाव अभियान में पूरा सहयोग दे रहा है.
सोचिए, ऐसे मुश्किल वक्त में दूसरे देश का सहयोग कितना मायने रखता है.
भारत की क्या प्रतिक्रिया है और क्या मांग है?
विदेश मंत्रालय ने ओमान के अधिकारियों को उनके सहयोग के लिए दिल से धन्यवाद दिया है. लेकिन, साथ ही मंत्रालय ने अपनी चिंता भी जाहिर की है.
MEA ने साफ कहा कि इस इलाके में कमर्शियल जहाजों पर लगातार हो रहे हमले बेहद चिंताजनक हैं. ये सिर्फ किसी एक देश की चिंता नहीं, बल्कि ग्लोबल ट्रेड और समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ा चैलेंज है.
भारत ने इस मामले में अपनी मांग दोहराई है कि इलाके में तनाव को तुरंत कम किया जाए और कूटनीतिक समाधान के लिए चल रही बातचीत को जल्द से जल्द पूरा किया जाए. इसका मकसद सिर्फ एक है - इलाके में शांति और स्थिरता बहाल हो सके.
आप खुद ही सोचिए, अगर समुद्री रास्ते सुरक्षित नहीं रहेंगे तो व्यापार कैसे होगा और आम लोगों की आवाजाही कैसे होगी?
मंत्रालय ने आगे कहा कि इंटरनेशनल कानून के मुताबिक, इलाके के अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से बिना किसी रुकावट के जहाजों की आवाजाही और व्यापार जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए. यह सिर्फ भारत की मांग नहीं है, बल्कि दुनिया के हर उस देश की मांग है जो समुद्री व्यापार पर निर्भर करता है.
किसी भी देश को यह हक नहीं है कि वह दूसरों के लिए मुश्किलें खड़ी करे.
ईरान और अमेरिका की टेंशन का क्या रोल?
यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है. हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच जुबानी जंग ही नहीं, बल्कि सैन्य गतिविधियां भी बढ़ी हैं.
जब दो बड़े पावर एक-दूसरे के आमने-सामने होते हैं, तो इसका असर अक्सर छोटे देशों और आम लोगों पर पड़ता है. यह हमला भी उसी बड़े भू-राजनीतिक खेल का एक हिस्सा लगता है.
ईरान ने हाल ही में घोषणा की है कि होर्मुज स्ट्रेट को अगली सूचना तक बंद कर दिया गया है. ये कोई मामूली बात नहीं है.
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार होता है. इसे बंद करने का मतलब है कि ग्लोबल इकोनॉमी पर सीधा असर पड़ेगा.
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम?
ईरानी सेना रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने साइप्रस के झंडे वाले एक कंटेनर जहाज पर गोलीबारी की थी. उनका आरोप था कि वह जहाज स्ट्रेटेजिक वाटरवे में अनऑथराइज़्ड रूट से जा रहा था.
गार्ड्स ने बताया कि कई जहाजों ने बार-बार दी गई चेतावनियों और निर्देशों को नजरअंदाज किया था. उन्होंने इस गोलीबारी को एक 'वॉर्निंग शॉट' बताया, जिससे स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा करने से पहले एक जहाज रुक गया.
अब जब यह रास्ता बंद हो गया है, तो जहाजों की आवाजाही पर बड़ा असर पड़ेगा. इससे माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी और तेल की कीमतें भी आसमान छू सकती हैं.
इस पूरे मामले में डिप्लोमेटिक कोशिशें भी जारी हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच ठप पड़ी वार्ता को फिर से शुरू कराने के प्रयास किए हैं.
उन्होंने ईरान और कतर के नेताओं से अलग-अलग बातचीत की है. यह दिखाता है कि इस क्षेत्र में शांति बहाली कितनी जरूरी है और कितने देश इसमें अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं.
हर कोई चाहता है कि इस तनाव को जल्द से जल्द खत्म किया जाए, ताकि आम लोगों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नुकसान न पहुंचे. फिलहाल, लापता भारतीय नाविक की तलाश जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही कोई अच्छी खबर आएगी.





































