तकनीकी डेस्क: दुनिया भर में गेमिंग का शौक रखने वाले लोग इस वक्त एक भयंकर बवाल से गुजर रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों से प्लेस्टेशन के सोशल मीडिया हैंडल पर जो हंगामा मचा है, उसे देखकर लग रहा है कि जैसे सोनी ने आग में घी डाल दिया हो। गेमर्स का गुस्सा सांतवे आसमान पर है और हर पोस्ट के कमेंट सेक्शन में सिर्फ बायकॉट और प्लेस्टेशन प्लस सब्सक्रिप्शन कैंसिल करने की धमकियां ही दिख रही हैं। आखिर हुआ क्या है कि सोनी के खिलाफ इतना बड़ा डिजिटल प्रोटेस्ट शुरू हो गया है?
दरअसल, सारा बवाल प्लेस्टेशन के फिजिकल गेम डिस्क (Physical Game Disc) को लेकर है। सोनी ने एक ऐसा ऐलान किया है, जिसने गेमिंग कम्युनिटी में भूचाल ला दिया है।
कंपनी ने संकेत दिए हैं कि वह अब गेम डिस्क का प्रोडक्शन धीरे-धीरे बंद करने की तैयारी में है। इसका सीधा मतलब ये है कि अब गेमर्स को गेम खरीदने के लिए डिस्क नहीं मिलेगी, बल्कि सिर्फ डिजिटल कोड मिलेगा जिसे डाउनलोड करना होगा।
तो क्या अब GTA 6 भी सिर्फ डाउनलोड कोड से मिलेगा?
जी हां, खबरों के मुताबिक, आने वाला बहुप्रतीक्षित गेम GTA 6 भी इसी पॉलिसी का हिस्सा होगा। रिटेल स्टोर में जो कॉपीज मिलेंगी, उनमें फिजिकल डिस्क नहीं होगी, बल्कि एक डाउनलोड कोड ही मिलेगा।
ये बात गेमर्स के गले से नीचे नहीं उतर रही है। कई लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि ये उनके कलेक्शन्स और गेमिंग के अनुभव को खत्म करने जैसा है।
सोचिए, जब आपके पास गेम की एक फिजिकल कॉपी होती है, तो उसे दोस्त से शेयर करना या रीसेल करना कितना आसान होता है। डिजिटल कोड के साथ ये सब खत्म हो जाता है, प्लस आपकी लाइब्रेरी सिर्फ एक कंपनी के कंट्रोल में आ जाती है।
सोनी के लिए ये वाकई एक बड़ा पीआर डिजास्टर (PR Disaster) बन गया है। सोशल मीडिया पर उनकी किसी भी पोस्ट पर गेमर्स अपनी नाराजगी जताने से पीछे नहीं हट रहे हैं।
कंपनी चाहे जिस भी प्रोडक्ट या सर्विस का प्रमोशन कर रही हो, कमेंट्स में सिर्फ फिजिकल डिस्क बंद करने के फैसले पर ही लानत-मलानत हो रही है। कोई प्लेस्टेशन स्टोर से खरीदारी न करने की कसम खा रहा है, तो कोई कह रहा है कि वो अब कभी प्लेस्टेशन प्रोडक्ट नहीं खरीदेगा।
क्या सोनी भी Sonos जैसी गलती कर रहा है?
ये पूरा मामला कुछ हद तक ऑडियो कंपनी Sonos के एक पुराने विवाद की याद दिलाता है। Sonos ने कुछ समय पहले अपना एक नया ऐप लॉन्च किया था, जो बेहद खराब और बग्स (Bugs) से भरा हुआ था।
ग्राहकों को उस ऐप से इतनी दिक्कतें आईं कि कंपनी के खिलाफ सोशल मीडिया पर जोरदार अभियान चला। Sonos को लगभग 18 महीनों तक इस पीआर नाइटमेयर (PR Nightmare) से जूझना पड़ा था।
लेकिन, आखिर में Sonos ने अपनी गलती मानी, माफी मांगी और ऐप को सुधारने के लिए कड़ी मेहनत की। आज Sonos के ग्राहक वापस खुश हैं और कंपनी पर उनका भरोसा फिर से बन गया है।
अब सवाल ये उठता है कि क्या सोनी भी Sonos की इस कहानी से कोई सबक लेगी? क्या वो भी अपनी गलती मानकर गेमर्स का भरोसा फिर से जीतने की कोशिश करेगी? या फिर वो अपने फैसले पर अड़ी रहेगी?
आखिर क्यों सोनी को डिजिटल ही इतना लुभावना लग रहा है?
एनालिस्ट्स का कहना है कि सोनी के लिए डिजिटल बिक्री वाकई बहुत ज्यादा फायदेमंद है। इसमें न तो फिजिकल डिस्क बनाने का खर्च आता है, न पैकेजिंग का और न ही शिपिंग का।
सीधे शब्दों में कहें तो डिजिटल ही कंपनी के लिए ज्यादा "लुक्रेटिव" (Lucrative) है। इंडस्ट्री के जानकारों का तो ये भी मानना है कि सोनी शायद ही अपने इस फैसले को वापस ले, भले ही फैंस प्लेस्टेशन प्लस सब्सक्रिप्शन रद्द करने करने की धमकी क्यों न दे रहे हों।
ये बात और भी चौंकाने वाली है कि इस भयंकर विवाद के बीच प्लेस्टेशन अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर दूसरे प्रोडक्ट्स का विज्ञापन करने में लगा हुआ है। जैसे कि उन्होंने हाल ही में एक नए फाइट स्टिक (Fight Stick) का विज्ञापन पोस्ट किया।
गेमर्स ने इस पर भी जमकर निशाना साधा। उनका कहना है कि 6 दिनों बाद जब प्लेस्टेशन वापस आया, तो उन्हें लगा कि शायद कंपनी फिजिकल डिस्क के मुद्दे पर कोई बयान देगी, लेकिन उन्हें मिला एक फाइट स्टिक का विज्ञापन।
इससे गेमर्स का गुस्सा और बढ़ गया।
तो फिर ग्राहकों का भरोसा कैसे वापस आएगा?
इस साल की शुरुआत में TechRadar से बात करते हुए, Sonos के सीईओ टॉम कॉनरैड (Tom Conrad) ने बताया था कि नाराज ग्राहकों को फिर से खुश कैसे किया जाए। उन्होंने कहा था, "आपको बस थोड़ी विनम्रता के साथ लोगों के जीवन में फिर से आना होगा और महान निष्पादन (Great Execution), महान उत्पाद (Great Product), महान सॉफ्टवेयर (Great Software) और महान अनुभवों (Great Experiences) के माध्यम से उनका विश्वास वापस जीतने का कठिन काम करना होगा।
और कभी मत भूलिए कि आपने लोगों को किन मुश्किलों से गुजारा था।"
कॉनरैड के ये शब्द सोनी के लिए किसी मंत्र से कम नहीं हैं। सोनी को यह समझना होगा कि सिर्फ डिजिटल कमाई के पीछे भागना लंबे समय में ग्राहकों को दूर कर सकता है।
गेमर्स का इमोशनल अटैचमेंट होता है अपनी गेम्स की फिजिकल कॉपीज से। यह सिर्फ एक प्रोडक्ट नहीं, बल्कि एक अनुभव का हिस्सा है।
अब देखना ये होगा कि क्या सोनी अपने ग्राहकों की सुनेगी, या फिर कमाई को प्राथमिकता देकर इस गुस्से को और भड़काएगी। क्या गेमिंग की दुनिया में फिजिकल डिस्क का एक युग वाकई खत्म होने वाला है?




































