देशभर: सुबह-सुबह आंख खुलते ही सबसे पहले हम क्या सोचते हैं? शायद चाय की गरमाहट, या फिर ऑफिस पहुँचने की जद्दोजहद। लेकिन एक चीज ऐसी है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर डालती है और जिसकी खबर हर सुबह ठीक 6 बजे हमें मिल जाती है – वो है पेट्रोल और डीजल के दाम। ये सिर्फ नंबर नहीं हैं, ये हैं आपके घर के बजट का हालचाल, आपके ऑफिस आने-जाने का खर्चा और तो और, आपके रसोई तक सब्जी पहुँचाने वाले ट्रक का किराया भी इसी से तय होता है। इसीलिए इन कीमतों को जानना सिर्फ जानकारी नहीं, बल्कि समझदारी भी है।
बता दें, देश की बड़ी-बड़ी तेल कंपनियां हर सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी करती हैं। ये कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल पर टिकी होती हैं।
मतलब, अगर कच्चा तेल महंगा हुआ या रुपया कमजोर पड़ा, तो आपकी गाड़ी में डलने वाला फ्यूल भी महंगा हो सकता है।
आपके शहर में पेट्रोल-डीजल का आज क्या भाव है?
जैसा कि बताया, 13 जुलाई 2026 को भी सुबह-सुबह ये दाम जारी हुए हैं। अच्छी बात ये है कि ज्यादातर शहरों में कीमतें लगभग स्थिर ही दिख रही हैं।
लेकिन कुछ जगहों पर राज्यों के लोकल टैक्स की वजह से हल्का-फुल्का ऊपर-नीचे हुआ है। तो चलिए, फटाफट देख लेते हैं कि देश के बड़े शहरों में आज क्या रेट चल रहा है:
- नई दिल्ली: पेट्रोल 102.12 रुपये | डीजल 95.20 रुपये
- मुंबई: पेट्रोल 111.18 रुपये | डीजल 97.83 रुपये
- कोलकाता: पेट्रोल 113.47 रुपये | डीजल 99.82 रुपये
- चेन्नई: पेट्रोल 107.77 रुपये | डीजल 99.55 रुपये
- गुरुग्राम: पेट्रोल 102.77 रुपये | डीजल 95.44 रुपये
- नोएडा: पेट्रोल 102.12 रुपये | डीजल 95.56 रुपये
- बेंगलुरु: पेट्रोल 110.93 रुपये | डीजल 98.80 रुपये
- भुवनेश्वर: पेट्रोल 109.92 रुपये | डीजल 100.92 रुपये
- चंडीगढ़: पेट्रोल 98.10 रुपये | डीजल 86.09 रुपये
- हैदराबाद: पेट्रोल 115.69 रुपये | डीजल 103.82 रुपये
- जयपुर: पेट्रोल 112.66 रुपये | डीजल 97.78 रुपये
- लखनऊ: पेट्रोल 102.05 रुपये | डीजल 95.55 रुपये
- पटना: पेट्रोल 113.35 रुपये | डीजल 99.36 रुपये
- तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल 115.49 रुपये | डीजल 104.40 रुपये
आखिर पिछले दो साल से कीमतें इतनी स्थिर क्यों हैं?
अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि इंटरनेशनल मार्केट में तो क्रूड ऑयल के दाम ऊपर-नीचे होते रहते हैं, फिर हमारे यहां कीमतें इतनी शांत क्यों हैं? इसकी बड़ी वजह मई 2022 के बाद किए गए कुछ अहम फैसले हैं। तब केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने मिलकर पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले टैक्स में कटौती कर दी थी।
इसी के चलते, जब से ये टैक्स कम हुए हैं, तब से कीमतों में एक तरह की स्थिरता आ गई है। भले ही ग्लोबल मार्केट में कितना ही हंगामा हो, भारतीय उपभोक्ताओं के लिए फ्यूल प्राइस काफी हद तक एक जैसे बने हुए हैं।
ये सरकार की एक ऐसी कोशिश है जिससे आम आदमी की जेब पर ज्यादा बोझ न पड़े।
पेट्रोल और डीजल की कीमत कैसे तय होती है, जानते हैं क्या?
ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब हर कोई जानना चाहता है। दरअसल, पेट्रोल और डीजल का जो दाम आप पेट्रोल पंप पर चुकाते हैं, वो सिर्फ कच्चे तेल का दाम नहीं होता, बल्कि इसमें कई और चीजें भी जुड़ती हैं।
इसे साधारण शब्दों में समझते हैं:
सबसे पहली और सबसे बड़ी बात है कच्चे तेल की कीमतें। पेट्रोल और डीजल सीधे-सीधे कच्चे तेल से ही बनते हैं। तो जाहिर सी बात है, अगर कच्चा तेल महंगा होगा, तो उसे रिफाइन करने के बाद मिलने वाला पेट्रोल-डीजल भी महंगा ही मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई और डिमांड, भू-राजनीतिक हालात और कई दूसरे फैक्टर भी इसकी कीमत पर असर डालते हैं। मान लीजिए, दुनिया के किसी बड़े तेल उत्पादक देश में कोई दिक्कत आ गई, तो झट से क्रूड ऑयल के दाम बढ़ जाते हैं।
दूसरा बड़ा फैक्टर है डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर। अब चूंकि भारत को अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदना पड़ता है, और ये सारा लेनदेन डॉलर में होता है। ऐसे में, अगर हमारा रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ता है, तो हमें वही कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा रुपये चुकाने पड़ते हैं। इसका सीधा मतलब है कि देश में आने वाला कच्चा तेल महंगा हो जाएगा और फिर पेट्रोल-डीजल भी महंगा बिकेगा। इसे ऐसे समझिए कि अगर आपके पास 100 रुपये हैं और डॉलर महंगा हो गया, तो आप पहले से कम डॉलर खरीद पाएंगे, जिससे कम कच्चा तेल खरीद पाएंगे या फिर उतने ही तेल के लिए ज्यादा रुपये देने पड़ेंगे।
तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात है सरकारी टैक्स और शुल्क। कच्चा तेल देश में आने और रिफाइन होने के बाद, केंद्र सरकार और राज्य सरकारें इस पर अलग-अलग तरह के टैक्स लगाती हैं। इसमें सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी (केंद्र सरकार का टैक्स) और वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) जो राज्य सरकारें लगाती हैं, शामिल हैं। इसके अलावा डीलर कमीशन और ट्रांसपोर्टेशन चार्ज भी जुड़ते हैं। ये टैक्स का हिस्सा ही होता है जो पेट्रोल-डीजल की कुल कीमत का एक बड़ा हिस्सा बन जाता है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल-डीजल के दाम थोड़े अलग-अलग दिखते हैं, क्योंकि हर राज्य का वैट अलग होता है।
मतलब कुल मिलाकर, जो कीमत हम चुकाते हैं, वो कच्चे तेल की लागत, डॉलर-रुपये की चाल और फिर केंद्र व राज्य सरकारों के टैक्स का जोड़ होती है। ये सिस्टम पारदर्शिता के साथ काम करता है, ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके और बाजार में कोई गड़बड़ी न हो।
तो अगली बार जब आप अपनी गाड़ी में पेट्रोल डलवाएं, तो याद रखिएगा कि उसके पीछे ये सारे फैक्टर काम कर रहे होते हैं।






































