बाजार डेस्क: भैया, आज जब आप अपनी आँखें मलते हुए सोमवार की सुबह उठे होंगे, तो दुनिया के बाजारों में एक बड़ा भूचाल आ चुका था। ग्लोबल मार्केट में चारों तरफ सिर्फ लाल निशान ही लाल निशान दिख रहे थे। शेयर बाजारों का मूड ऐसा बिगड़ा कि पूछिए मत, कई बड़े सूचकांक तो धड़ाम से नीचे गिर गए। इसकी जड़ में है वेस्ट एशिया में लगातार बढ़ती टेंशन, जहां अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इस कदर बढ़ गया है कि बाजारों की हालत पस्त हो गई है।
सोमवार, 13 जुलाई की सुबह से ही एशियाई बाजारों में निवेशकों का सेंटिमेंट बिगड़ चुका था। हर किसी की नज़र मिडिल ईस्ट पर थी, जहां से लगातार बुरी खबरें आ रही थीं।
शुक्रवार की रात से लेकर पूरे वीकेंड में अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर नए मिलिट्री हमले किए, जिससे हालात और ज्यादा बिगड़ गए। ऊपर से तेहरान ने तो 'होरमुज़ स्ट्रेट' को बंद करने का ही अनाउंसमेंट कर दिया है, जो दुनिया के लिए बड़ी चिंता की बात है।
तो आखिर वेस्ट एशिया में ऐसा क्या हुआ कि बाजार सहम गए?
आप सोच रहे होंगे कि रातों-रात ऐसा क्या हो गया, जिससे ग्लोबल मार्केट में इतनी बड़ी हलचल मच गई? दरअसल, कहानी शुरू हुई वीकेंड में। अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव कोई नया नहीं है, लेकिन इस वीकेंड में ये नई ऊंचाइयों पर पहुँच गया।
ईरान की सरकारी मीडिया, खासकर 'एस्कान न्यूज़' के टेलीग्राम चैनल ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान पर हमले तेज कर दिए हैं। उनका तो ये तक कहना है कि इस बार के हमले दक्षिणी और पश्चिमी ईरान में कई जगहों को निशाना बना रहे थे, जो पिछले हमलों से कहीं ज्यादा बड़े थे।
दूसरी तरफ, अमेरिका बार-बार ये कह रहा है कि होरमुज़ स्ट्रेट खुला हुआ है और खुला रहेगा। लेकिन ईरान अपनी बात पर अड़ा है।
ईरान की तरफ से साफ-साफ कहा गया है कि नए हमलों के जवाब में उसने पानी के इस बेहद अहम रास्ते को बंद कर दिया है। और यही वो बात है जिसने ग्लोबल बाजारों में भूचाल ला दिया है।
होरमुज़ स्ट्रेट कितना जरूरी है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि दुनिया के कुल तेल सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अगर ये बंद होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और ग्लोबल इकोनॉमी पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा।
एशियाई बाजारों का क्या हाल है, कहां कितना गिरा?
जब वेस्ट एशिया में इतनी बड़ी टेंशन हो, तो एशियाई बाजारों पर इसका असर पड़ना तय था। जापान का निक्केई इंडेक्स 1.32% नीचे लुढ़क गया, जबकि वहां का ब्रॉडर टॉपिक्स इंडेक्स भी 0.094% की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था।
साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स तो भैया, 5.24% की बड़ी गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था, जिसने निवेशकों की नींद उड़ा दी। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में भी 0.21 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई।
चीन के शंघाई कम्पोजिट इंडेक्स में भी 0.71 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, और वो 3,968.14 के स्तर पर दिख रहा था। हालांकि, कुछ बाजार ऐसे भी थे, जो थोड़ी बहुत राहत दे रहे थे।
ताइवान का बाजार 0.91 फीसदी चढ़कर 45,766.53 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, तो वहीं हॉन्ग कॉन्ग का हैंग सेंग इंडेक्स भी 0.55 फीसदी की बढ़त के साथ 24,309.00 के स्तर पर नजर आया। लेकिन कुल मिलाकर, माहौल निराशाजनक ही था और ज्यादातर बड़े बाजार दबाव में ही दिख रहे थे।
भारतीय बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
अब बात करते हैं अपने भारतीय बाजार की। ग्लोबल टेंशन का असर साफ तौर पर गिफ्ट निफ्टी पर भी दिख रहा है।
सोमवार की सुबह गिफ्ट निफ्टी 24,056 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था। ये निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज से लगभग 186 पॉइंट्स का बड़ा डिस्काउंट था।
इसका सीधा मतलब है कि भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार को एक गैप-डाउन शुरुआत की आशंका थी। यानी, बाजार खुलते ही नीचे जा सकते थे।
निवेशकों के लिए ये एक चिंता का विषय था, क्योंकि विदेशी निवेशक आमतौर पर ऐसे माहौल में अपनी पूंजी निकालने लगते हैं।
अमेरिकी बाजारों में क्या चल रहा है?
अब आप सोचेंगे कि अमेरिका का क्या हाल है? शुक्रवार को यूएस के शेयर बाजार भले ही हल्की बढ़त के साथ बंद हुए थे। तब सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में तेजी देखी गई थी और निवेशक तिमाही कमाई के सीजन पर फोकस कर रहे थे।
डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.29% बढ़कर 52,637.01 पर पहुंचा था, वहीं S&P 500 भी 0.42% बढ़कर 7,575.39 पॉइंट्स पर सेशन खत्म हुआ था। नैस्डैक में भी 0.29% की तेजी आई थी और वो 26,281.61 पर बंद हुआ।
पूरे हफ्ते की बात करें तो, पिछले हफ़्ते S&P 500 में 1.2% की तेज़ी आई थी, नैस्डैक में 1.7% की तेज़ी देखी गई थी, जबकि डॉव में 0.5% की गिरावट आई थी। एनवीडिया, एएमडी और मेटा प्लेटफॉर्म्स जैसे स्टॉक्स में अच्छी खासी तेजी देखने को मिली थी, जबकि माइक्रोन टेक्नोलॉजी और मॉडर्ना जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई थी।
लेकिन अब सोमवार की सुबह की बात अलग है। डाओ फ्यूचर्स भी नीचे कारोबार कर रहा था, जो ग्लोबल टेंशन का साफ संकेत है।
इसके अलावा, जापान में सरकारी बॉन्ड (JGB) की यील्ड में भी गिरावट जारी रही। 10-साल की JGB यील्ड 2.5 bps तक गिरकर 2.735% हो गई, जबकि 20-साल की JGB यील्ड 4 bps गिरकर 3.710% पर आ गई।
ये सब बताता है कि निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ भाग रहे हैं।
कुल मिलाकर, वेस्ट एशिया में जारी ये तनाव ग्लोबल बाजारों के लिए एक बड़ा चैलेंज बन चुका है। कच्चे तेल की कीमतों और इंटरनेशनल ट्रेड पर इसका गहरा असर पड़ सकता है, जिससे दुनिया भर की इकोनॉमी में अनिश्चितता बढ़ गई है।
निवेशकों को आने वाले समय में बहुत सावधानी बरतनी होगी।




































