सूरत: आज के डिजिटल जमाने में हर कोई अपनी कंपनी चमकाने के लिए लाखों रुपये विज्ञापन और ऑनलाइन मार्केटिंग पर फूंक देता है। छोटी दुकान से लेकर बड़े ब्रांड तक, सब सोशल मीडिया पर शोर मचाते रहते हैं। ऐसे में अगर कोई आपको बताए कि एक बिजनेस ऐसा भी है जो पिछले 20 सालों से बिना किसी विज्ञापन, वेबसाइट या किसी बड़े मार्केटिंग तामझाम के धड़ल्ले से चल रहा है, तो आप यकीन करेंगे क्या?
शायद नहीं, लेकिन गुजरात के सूरत शहर से निकली एक कहानी ने इंटरनेट पर धूम मचा रखी है। ये कहानी है मनहरभाई की, जिनका डिशवॉशिंग लिक्विड का बिजनेस सालों से लोगों के घरों तक पहुंच रहा है, और इसकी सफलता का राज किसी मार्केटिंग गुरु ने नहीं, बल्कि उनके अपने बेटे नीरज शेलड़िया ने खोला है।
नीरज खुद एक मार्केटर हैं, और उन्हें भी अपने पिता के इस 'पुराने स्कूल' के बिजनेस मॉडल पर हैरानी होती है।
उन्होंने जब यह कहानी सोशल मीडिया पर शेयर की, तो देखते ही देखते वायरल हो गई। इस कहानी ने साबित किया कि कई बार ग्राहकों का भरोसा और उनसे सीधा जुड़ाव, किसी भी हाई-टेक मार्केटिंग स्ट्रेटेजी से कहीं ज़्यादा ताकतवर साबित होता है।
तो आखिर क्या है मनहरभाई के इस 'गुमनाम' बिजनेस का करिश्मा?
क्या है मनहरभाई के इस भरोसेमंद बिजनेस की खासियत?
नीरज बताते हैं कि उनके पिता के कारोबार की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) ये है कि ग्राहक उनके डिशवॉशिंग लिक्विड का नाम नहीं जानते और न ही उसकी परवाह करते हैं। जब बोतल खाली होती है, तो वे सीधे मनहरभाई को फोन करते हैं।
उनके लिए मनहरभाई ही ब्रांड हैं, वही प्रोडक्ट हैं और वही सर्विस भी हैं। कुल मिलाकर, ग्राहक प्रोडक्ट नहीं, बल्कि मनहरभाई को खोजते हैं।
एक ग्राहक सिर्फ एक कॉल करता है और कहता है, "मनहरभाई, डिशवॉशिंग लिक्विड चाहिए।" बस इतना भर कहना ही काफी होता है।
इसके बाद ऑर्डर तैयार होता है और उसी दिन ग्राहक के घर तक पहुंच भी जाता है। यह कितनी शानदार और पर्सनल सर्विस है, है ना?
बिना किसी तामझाम के कैसे चल रहा है ये बिजनेस?
सोचिए, आज की तारीख में जहां हर छोटी-बड़ी कंपनी अपनी पहचान बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है, वहीं मनहरभाई का बिजनेस बिना किसी मार्केटिंग कैंपेन, बिना सेल्स टीम और बिना किसी वेबसाइट के चल रहा है। यह पूरा कारोबार ग्राहकों की संतुष्टि और मुंह-ज़ुबानी सिफारिशों (वर्ड-ऑफ-माउथ) पर टिका है।
एक ग्राहक खुश होकर दस और लोगों को बताता है, और बस ऐसे ही कारवां आगे बढ़ता रहता है।
नीरज के मुताबिक, उनके पिता की मार्केटिंग रणनीति बहुत ही सीधी और सरल है: अच्छी क्वालिटी का सामान दो, डिलीवरी समय पर करो और हर ग्राहक की कॉल का जवाब दो। इसमें कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बस ईमानदारी और समर्पण है।
कितने सालों से मिल रहे हैं इतने ऑर्डर?
नीरज ने बताया कि उनके पिता को पिछले दो दशकों से हर दिन करीब 20 ऑर्डर मिलते हैं। यह कोई छोटा-मोटा आंकड़ा नहीं है; लगातार 20 साल तक हर रोज 20 ऑर्डर, बिना किसी विज्ञापन के, सिर्फ भरोसे के दम पर! वाकई में यह किसी अजूबे से कम नहीं है।
डिशवॉशिंग लिक्विड 5 लीटर की बोतल में मिलता है और इसकी कीमत लगभग 220 रुपये है। यानी गुणवत्ता और कीमत दोनों ही ग्राहकों के लिए एकदम सही बैठती हैं।
आजकल लोग सस्ती चीजें तो ढूंढते हैं, लेकिन जब बात भरोसे और सुविधा की आती है, तो मनहरभाई जैसे कारोबारी बाजी मार लेते हैं। यह उनके प्रोडक्ट की क्वालिटी और सर्विस का ही नतीजा है कि ग्राहक सालों साल उनके साथ जुड़े हुए हैं।
सोशल मीडिया पर क्यों हुई इस कहानी की इतनी तारीफ?
जब नीरज की पोस्ट वायरल हुई, तो कई कारोबारियों और मार्केटिंग एक्सपर्ट्स ने इसे ‘असली ब्रांडिंग’ का बेहतरीन उदाहरण बताया। लोगों का कहना था कि एक मजबूत ग्राहक संबंध और उनका अटूट भरोसा, किसी भी हाई-फाई डिजिटल रणनीति से ज्यादा असरदार हो सकता है।
आज जब हर कोई नए ग्राहकों की तलाश में भटक रहा है, मनहरभाई ने अपने मौजूदा ग्राहकों को ही अपनी सबसे बड़ी संपत्ति बना लिया है।
कई यूजर्स ने इस बिजनेस मॉडल को ‘पुराने जमाने की ताकत’ बताया, जहां ग्राहक और दुकानदार के बीच रिश्ता सिर्फ खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं होता, बल्कि एक विश्वास और लगाव का होता है। यह सिर्फ एक लेनदेन नहीं, बल्कि एक रिश्ता है।
ऐसे रिश्ते आजकल कहां देखने को मिलते हैं?
तो क्या छोटे बिजनेस को अब बड़े स्तर पर नहीं ले जाना चाहिए?
इस कहानी को पढ़कर कुछ लोगों ने सवाल भी उठाया कि जब मनहरभाई के पास इतना मजबूत ग्राहक आधार है, तो आखिर इस बिजनेस को बड़े स्तर पर क्यों नहीं ले जाया जा रहा है? क्यों इसे सिर्फ सूरत तक ही सीमित रखा गया है? क्या इसे ऑनलाइन नहीं बेचना चाहिए?
इस पर नीरज ने बताया कि वह धीरे-धीरे इस बारे में सोच रहे हैं। यह एक ऐसा सवाल है जो कई छोटे, सफल कारोबारियों के मन में आता है।
क्या वे अपने आरामदायक, भरोसेमंद बिजनेस मॉडल को छोड़ कर बड़े पैमाने पर जाने का जोखिम उठाएं, जहां उन्हें कंपटीशन और नए चैलेंजेस का सामना करना पड़ सकता है? यह एक बड़ा फैसला होता है।
फिलहाल, मनहरभाई की कहानी हमें यह सिखाती है कि चाहे दुनिया कितनी भी बदल जाए, ग्राहकों का भरोसा, अच्छी क्वालिटी और बेहतर सेवा हमेशा एक सफल बिजनेस की नींव होते हैं। डिजिटल हो या ट्रेडिशनल, कुछ चीजें कभी नहीं बदलतीं और मनहरभाई का यह बिजनेस इसका जीता-जागता सबूत है।




































