कमोडिटी डेस्क: क्या आपकी जेब से चांदी का वजन कम हुआ या फिर उसकी चमक थोड़ी फीकी पड़ गई? अगर आप सोच रहे हैं कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं, तो रुकिए! खबर है कि 13 जुलाई 2026, यानी हफ्ते के पहले दिन ही चांदी ने अपने तेवर ढीले कर दिए हैं। मेटल मार्केट में ऐसा भूचाल आया कि चांदी के दाम धड़ाम से नीचे गिर गए।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव शुरुआती कारोबार में ही 1.93 फीसदी तक लुढ़क गया। ये कोई छोटा-मोटा झटका नहीं था, पूरे 4307 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई।
अब आप पूछेंगे कि आखिर ये भाव पहुंचा कहां? तो जनाब, ये 218357 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गिरा। जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यही चांदी 2,22,664 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।
जिसने भी निवेश किया होगा, उसकी तो सांसे अटक गई होंगी!
चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट, क्या कहते हैं आंकड़े?
जानना दिलचस्प होगा कि ये गिरावट सिर्फ MCX तक ही सीमित नहीं रही। बाजार के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर भी चांदी के तेवर बदले-बदले दिखे।
बुलियन्स के मुताबिक चांदी की कीमत 2,18,740 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई। वहीं, इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) ने सोमवार सुबह तक का भाव 220390 रुपये प्रति किलो बताया।
हालांकि, गुडरिटर्न्स के आंकड़ों पर नजर डालें तो खुदरा बाजार में चांदी 2,35,000 रुपये प्रति किलो पर टिकी हुई दिखी, जो कि एक दिलचस्प विरोधाभास है। अक्सर वायदा बाजार और हाजिर बाजार के रेट में थोड़ा फर्क देखने को मिलता है।
अब ये जानना भी जरूरी है कि आखिर चांदी में ये इतनी बड़ी गिरावट आई क्यों? जियोपॉलिटिकल टेंशन, यानी दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव ने एक बार फिर सोने-चांदी की कीमतों पर अपना असर दिखाया है। जब दुनिया में अस्थिरता बढ़ती है, तो निवेशक अक्सर सुरक्षित निवेश की तरफ भागते हैं, लेकिन कभी-कभी कुछ इवेंट्स इसका उल्टा असर भी दिखाते हैं।
गिरावट के पीछे क्या कारण रहे?
बाजार के जानकार बताते हैं कि वायदा बाजार में हुई मुनाफावसूली और कारोबारियों की बिकवाली ने चांदी की कीमतों पर भारी दबाव बनाया। मतलब, जिन लोगों ने पहले सस्ते में चांदी खरीदी थी, उन्होंने दाम बढ़ते ही अपना प्रॉफिट बुक कर लिया।
इसके साथ ही हाजिर बाजार में भी चांदी की डिमांड कमजोर रही, जिसने गिरावट को और हवा दी। कुल मिलाकर, सप्लाई ज्यादा और डिमांड कम होने का खेल यहां भी देखने को मिला।
ये बात तो साफ है कि सोने और चांदी की कीमतें सिर्फ देश के अंदर के फैक्टर से ही प्रभावित नहीं होतीं। डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स भी इनकी चाल तय करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती या कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतें, ब्याज दरें और दुनियाभर की इकोनॉमी की हालत, ये सब मिलकर चांदी की कीमत को ऊपर-नीचे करते रहते हैं।
पिछला कारोबारी दिन कैसा रहा, जब चांदी ने मारी थी छलांग?
दिलचस्प बात ये है कि 13 जुलाई की इस बड़ी गिरावट से ठीक पहले, यानी पिछले कारोबारी दिन (शुक्रवार को) चांदी ने एक जोरदार छलांग लगाई थी। लगातार तीन कारोबारी सत्रों से गिरावट झेलने के बाद शुक्रवार को चांदी ने अपनी चमक वापस पाई थी।
कम कीमतों पर खरीदारी और अमेरिकी डॉलर में कमजोरी के चलते दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में अच्छी खासी तेजी देखने को मिली थी।
शुक्रवार को चांदी पूरे 5,000 रुपये उछलकर 2,37,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स समेत) पर पहुंच गई थी। इससे पहले गुरुवार को चांदी 2,32,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी की कीमत करीब एक फीसदी फिसलकर 59.54 डॉलर प्रति औंस रह गई थी। तो एक दिन ऊपर, दूसरे दिन नीचे, चांदी की चाल भी किसी पहेली से कम नहीं है।
आपके शहर में क्या है चांदी का ताजा भाव?
चलिए, अब बात करते हैं आपके अपने शहर की, जहां आप रोजाना खरीदारी करते हैं। गुडरिटर्न्स के मुताबिक 13 जुलाई को देश के प्रमुख शहरों में चांदी का खुदरा भाव कुछ इस तरह रहा:
- दिल्ली: ₹2,35,000 प्रति किलोग्राम
- मुंबई: ₹2,35,000 प्रति किलोग्राम
- कोलकाता: ₹2,35,000 प्रति किलोग्राम
- चेन्नई: ₹2,40,000 प्रति किलोग्राम
- पटना: ₹2,35,000 प्रति किलोग्राम
- लखनऊ: ₹2,35,000 प्रति किलोग्राम
- मेरठ: ₹2,35,000 प्रति किलोग्राम
आप देख सकते हैं कि चेन्नई में चांदी का भाव बाकी शहरों के मुकाबले थोड़ा ज्यादा है। ऐसा अक्सर होता है क्योंकि हर शहर में लोकल डिमांड, सप्लाई और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट की वजह से कीमतों में थोड़ा-बहुत अंतर आ जाता है।
क्या है चांदी की शुद्धता का पैमाना और कैसे करें असली-नकली की पहचान?
खरीदारी करते वक्त चांदी की शुद्धता का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। बाजार में कई तरह की शुद्धता वाली चांदी मिलती है।
सबसे शुद्ध चांदी 999 फाइन सिल्वर (99.9%) मानी जाती है। इसका मतलब है कि इसमें 99.9% शुद्ध चांदी होती है।
वहीं, 925 स्टर्लिंग सिल्वर (92.5%) का इस्तेमाल सबसे ज्यादा आभूषण और घरेलू सामान बनाने में होता है। इसमें 92.5% शुद्ध चांदी और बाकी 7.5% दूसरे मेटल होते हैं ताकि इसे मजबूती मिल सके।
खरीदारी के समय ग्राहकों को हमेशा BIS हॉलमार्क और शुद्धता का निशान (जैसे 999 या 925) जरूर जांचना चाहिए। इससे आप असली चांदी की पहचान सुनिश्चित कर सकते हैं और धोखे से बच सकते हैं।
कुल मिलाकर, 13 जुलाई 2026 का दिन चांदी के निवेशकों के लिए एक उतार-चढ़ाव भरा दिन रहा, जिसने एक बार फिर बाजार की अनिश्चितता को साबित कर दिया।








































