मुंबई: आजकल सोना खरीदना है या अभी इंतज़ार करना है, ये सवाल लाखों लोगों के मन में घूम रहा है। सोने की कीमतों ने एक बार फिर ऐसा उछाल मारा है कि सबकी निगाहें इसी पर टिकी हैं। और इसकी बड़ी वजह क्या है? असल में, अमेरिका और ईरान के बीच जो तनाव बढ़ रहा है, उसने पूरी दुनिया में एक तरह की भू-राजनीतिक अनिश्चितता पैदा कर दी है। इसके साथ ही, महंगाई का डर भी सिर उठा रहा है, और ऐसे में लोग सबसे सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की तरफ भाग रहे हैं।
आपको बता दें कि इंटरनेशनल मार्केट में सोना $4,000 प्रति औंस के करीब पहुंच गया है। वहीं, अगर अपने देश की बात करें तो घरेलू बाजार में सोने की कीमतें इस वक्त ₹1.40 लाख से ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम के बीच झूल रही हैं।
अब ऐसे में हर आम खरीदार और बड़ा निवेशक, सब सोच में डूबे हैं कि आखिर क्या करें? क्या अभी सोने में पैसा लगाएं या थोड़ा रुक जाएं? आइए, मार्केट के जानकारों की राय समझते हैं और देखते हैं कि दिवाली तक सोने की चाल कैसी रह सकती है।
सोने की कीमतों में क्यों आई ये जबरदस्त तेजी?
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसी कौन सी बातें हो गईं, जिसकी वजह से सोने की चमक इतनी बढ़ गई है? इसके पीछे कुछ बड़े और पुख्ता कारण हैं, जो ग्लोबल इकोनॉमी और भू-राजनीतिक माहौल से जुड़े हुए हैं। आइए, एक-एक करके इन्हें समझते हैं।
- भू-राजनीतिक टेंशन: अमेरिका और ईरान के बीच का विवाद किसी से छिपा नहीं है। जब भी दो बड़ी ताकतों के बीच इस तरह का टकराव बढ़ता है, तो दुनिया भर के शेयर बाजारों में एक तरह का डर और अस्थिरता आ जाती है। निवेशक ऐसी स्थिति में जोखिम भरे एसेट्स से निकलकर सुरक्षित पनाह ढूंढते हैं, और सोने से बेहतर सुरक्षित ठिकाना और क्या हो सकता है? यही वजह है कि सोने की डिमांड अचानक बढ़ गई है।
- कच्चे तेल का बढ़ता दाम और महंगाई: सिर्फ टेंशन ही नहीं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी एक बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं। जब क्रूड ऑयल महंगा होता है, तो लगभग हर चीज महंगी होने लगती है, क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन और मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ जाती है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। ऐसे में, लोग अपनी पूंजी को महंगाई से बचाने के लिए सोने में निवेश करना पसंद करते हैं, क्योंकि सोना महंगाई के खिलाफ एक शानदार हेज का काम करता है।
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व का पेच: अमेरिका का सेंट्रल बैंक, जिसे फेडरल रिजर्व कहते हैं, उसकी ब्याज दरों को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई है, वो भी सोने के भावों पर असर डाल रही है। जब फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर अस्पष्ट होता है या उनमें बदलाव करता है, तो निवेशकों का सेंटिमेंट प्रभावित होता है। इससे भी सोने में निवेश की तरफ रुझान बढ़ता है।
क्या सोने की कीमतों में अब कोई बड़ी गिरावट आएगी?
कई लोगों को लग रहा होगा कि कीमतें इतनी बढ़ गई हैं, तो अब गिरावट भी तगड़ी ही आएगी। लेकिन बाजार के जानकारों और एक्सपर्ट्स का तो कुछ और ही कहना है।
उनकी मानें तो, हाल के उतार-चढ़ाव के बावजूद, सोने की कीमतों में कोई बहुत बड़ी या भारी गिरावट की उम्मीद फिलहाल नहीं दिख रही है। ये सुनने में शायद आपको थोड़ा अजीब लगे, लेकिन एक्सपर्ट्स इसके पीछे ठोस तर्क देते हैं।
उनका कहना है कि सोना इस वक्त अपने मौजूदा स्तरों पर एक मजबूत आधार बना चुका है। इसका मतलब है कि अब यहां से कीमतों में बड़ी गिरावट आना बहुत मुश्किल है।
अगर कोई करेक्शन या गिरावट आती भी है, तो वह महज 5% तक ही सीमित रहने की संभावना है। यानी, अगर मौजूदा भाव से थोड़ा नीचे भी आता है, तो भी वो खरीदारी का अच्छा मौका ही माना जाएगा, न कि चिंता का विषय।
घरेलू बाजार की बात करें, तो सोने को ₹1.35 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बेहद मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। आसान शब्दों में कहें तो, इस लेवल से नीचे सोना बहुत मुश्किल से जाएगा।
इसलिए, अगर आप इस उम्मीद में अपनी खरीदारी को टाल रहे हैं कि सोना बहुत ज्यादा सस्ता हो जाएगा, तो शायद आपको निराश होना पड़े। एक्सपर्ट्स की राय में, बहुत ज्यादा दाम गिरने का इंतजार करना ठीक नहीं रहेगा।
दिवाली तक कहां पहुंच सकते हैं सोने के भाव?
अब ये सबसे बड़ा सवाल है, जिसका जवाब हर कोई जानना चाहता है। दिवाली, जो कि हमारे देश में सोने की खरीदारी के लिए सबसे शुभ और बड़ा मौका होता है, तब तक सोने के भावों की चाल कैसी रहेगी? विश्लेषकों ने इसको लेकर दो तरह की संभावनाएं जताई हैं, जो कि वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं।
- पहला सिचुएशन: अगर इंटरनेशनल लेवल पर भू-राजनीतिक तनाव थोड़ा कम होता है और हालात सामान्य होने लगते हैं, तो सोने की कीमतें एक जबरदस्त छलांग मार सकती हैं। इस स्थिति में, घरेलू बाजार में सोना ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर तक जा सकता है। ये उन लोगों के लिए अच्छी खबर हो सकती है, जो पहले ही निवेश कर चुके हैं, या फिर जो इस उम्मीद में हैं कि सोना और ऊपर जाएगा।
- दूसरा सिचुएशन: वहीं, अगर तनाव और अनिश्चितता का माहौल ऐसे ही बना रहता है या और बढ़ता है, तो सोने के दाम एक सीमित दायरे में ही बने रहेंगे। इस स्थिति में, कीमतें ₹1.35 लाख से ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम के बीच ही झूलती रहेंगी। यानी, बहुत ज्यादा बड़ी हलचल देखने को नहीं मिलेगी, लेकिन फिर भी ये एक मजबूत स्तर होगा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने को लेकर कुछ टारगेट तय किए गए हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ग्लोबल मार्केट में सोने को $3,800 पर एक मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।
जबकि लंबी अवधि के लिए $5,100 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ये आंकड़े बताते हैं कि सोने में लंबी अवधि में ग्रोथ की अच्छी संभावनाएं बनी हुई हैं।
तो, क्या है ज्वेलरी मार्केट का हाल और खरीदारी का सही मौका?
सोने की कीमतों में जो हालिया तेजी देखने को मिली है, उसके बावजूद ज्वेलरी मार्केट में रौनक लौटने लगी है। लोग अब इस बात को समझ रहे हैं कि बहुत ज्यादा गिरावट का इंतजार करना शायद सही न हो।
ऐसे में, अगर आप शादी-ब्याह या किसी दूसरे शुभ अवसर के लिए सोने की खरीदारी करने की सोच रहे हैं, तो मौजूदा स्तरों पर खरीदारी करने से आपको नुकसान होने की आशंका कम है।
कुल मिलाकर, मार्केट एक्सपर्ट्स का यही कहना है कि सोना मौजूदा हालातों में एक मजबूत निवेश विकल्प बना हुआ है। भू-राजनीतिक अस्थिरता, बढ़ती महंगाई और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सोने की चमक फीकी पड़ने के बजाय और तेज होती दिख रही है।
इसलिए, अपनी निवेश रणनीति बनाते समय इन सभी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।







































