पटना: आजकल टेक्नोलॉजी की दुनिया में हर तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का ही जलवा है। चैटजीपीटी (ChatGPT), क्लाउड (Claude) और जेमिनी (Gemini) जैसे AI मॉडल्स ने तो मानो दुनिया ही बदल दी है। लेकिन एक सवाल जो हमेशा मन में उठता है, वो ये है कि जब हम इन AI से चैट करते हैं या उनसे कोई काम करवाते हैं, तो हमारी पर्सनल जानकारी कितनी सुरक्षित रहती है? क्या कंपनी हमारे डेटा को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल तो नहीं कर रही? इसी चिंता को दूर करने और AI के साथ-साथ प्राइवेसी को भी टॉप पर रखने का बीड़ा उठाया है प्रोटॉन (Proton) ने, वही प्रोटॉन जिसे हम उसके जबरदस्त वीपीएन (VPN) सर्विस के लिए जानते हैं। उन्होंने अब अपना प्राइवेसी-फर्स्ट AI असिस्टेंट, 'लूमों 2.0' (Lumo 2.0) लॉन्च कर दिया है, और कंपनी का दावा है कि अब यूजर्स को पावरफुल AI कैपेबिलिटीज और अपनी प्राइवेसी के बीच चुनाव नहीं करना पड़ेगा।
जी हां, आपने सही पढ़ा। प्रोटॉन का कहना है कि उन्होंने लूमों 2.0 को कुछ इस तरह से बनाया है कि यह एक तरफ तो नए जमाने के AI मॉडल्स को कड़ी टक्कर देगा, वहीं दूसरी तरफ आपकी प्राइवेसी को सबसे पहले रखेगा।
यह एक ऐसा कदम है जो वाकई में AI की दुनिया में गेम चेंजर साबित हो सकता है। क्योंकि ज्यादातर AI कंपनियां डेटा प्राइवेसी को लेकर सवालों के घेरे में रहती हैं।
तो फिर, इस नए लूमों 2.0 में ऐसा क्या खास है जो इसे बाकी सबसे अलग बनाता है?
लूमों 2.0 में क्या-क्या नया मिलेगा?
सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि लूमों 2.0 सिर्फ एक अपडेट नहीं है, बल्कि यह प्रोटॉन के प्राइवेसी-फर्स्ट असिस्टेंट का एक पूरा नया अवतार है। इसमें ढेरों नए और कमाल के फीचर्स जोड़े गए हैं।
इनमें सबसे प्रमुख हैं 'रीजनिंग मोड्स' (reasoning modes), यानी AI अब और बेहतर तरीके से सोच-समझकर जवाब दे पाएगा। इसके अलावा, आप इससे इमेज जनरेट भी करवा सकते हैं और यह इमेज को पहचान भी सकता है।
साथ ही, अब इसमें लाइव वेब सर्च (live web search) की सुविधा भी है, जिसमें यह अपने जवाबों के सोर्स भी बताएगा। यानी, आप खुद चेक कर पाएंगे कि जानकारी कहां से आई है।
इतना ही नहीं, लूमों 2.0 में परसिस्टेंट मेमोरी (persistent memory) भी है। इसका मतलब है कि यह आपकी पिछली बातचीत को याद रख पाएगा, जिससे आपको हर बार नए सिरे से शुरू नहीं करना पड़ेगा।
और हां, आप अपने हिसाब से असिस्टेंट को कस्टमाइज (customizable assistants) भी कर सकते हैं, ताकि वह आपकी जरूरत के हिसाब से काम करे। यह सारे फीचर्स एक साथ एक ही पैकेज में मिलना, वो भी प्राइवेसी की गारंटी के साथ, वाकई में एक बड़ी बात है।
प्राइवेसी को सबसे ऊपर कैसे रखता है ये AI?
यही तो असली 'चैलेंज' है और प्रोटॉन ने इस पर खूब मेहनत की है। लूमों 2.0 में 'जीरो-एक्सेस इंक्रिप्शन' (zero-access encryption) का इस्तेमाल किया गया है।
इसका सीधा सा मतलब है कि आपकी चैट और इमेज को प्रोटॉन भी एक्सेस नहीं कर पाएगा, क्योंकि वे आपके डिवाइस पर ही इंक्रिप्टेड (encrypted) रहेंगी। इसके अलावा, प्रोटॉन ने यह वादा भी किया है कि वे 'नो-लॉग्स' (no-logs) और 'नो-ट्रेनिंग' (no-training) पॉलिसी पर चलते हैं।
यानी, वे आपके डेटा को स्टोर नहीं करेंगे और न ही उसे अपने AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल करेंगे।
प्रोटॉन पहले भी अपने वीपीएन और ईमेल सेवाओं में इन्हीं प्राइवेसी पॉलिसीज के लिए जाना जाता है, जो उन्होंने हमेशा निभाई हैं। इसलिए कंपनी का यह दावा काफी भरोसेमंद लगता है।
वे चाहते हैं कि यूजर्स को AI की ताकत का फायदा मिले, लेकिन अपनी पर्सनल डेटा की सिक्योरिटी को लेकर कोई 'टेंशन' न लेनी पड़े। कुल मिलाकर, प्रोटॉन ने यहां क्रिप्टोग्राफी (cryptography) और सख्त प्राइवेसी पॉलिसीज का एक शानदार मिश्रण तैयार किया है।
कितना स्मार्ट और तेज है लूमों 2.0?
केवल प्राइवेसी देने से तो काम नहीं चलेगा, AI को स्मार्ट और तेज भी होना चाहिए। इस मामले में भी लूमों 2.0 ने शानदार परफॉर्म किया है।
'आर्टिफिशियल एनालिसिस इंटेलिजेंस इंडेक्स' (Artificial Analysis Intelligence Index) पर लूमों 2.0 लाइट (Lite) मॉडल ने लूमों 1.4 से 127% ज्यादा स्कोर किया है, जबकि लूमों 2.0 मैक्स (Max) मॉडल ने तो 240% तक का सुधार दिखाया है। ये आंकड़े बताते हैं कि नया लूमों, पुराने वर्जन से कहीं ज्यादा इंटेलिजेंट है और पिछली पीढ़ी के बड़े AI मॉडल्स के काफी करीब पहुंच गया है।
स्पीड की बात करें तो प्रोटॉन का दावा है कि 'रोजमर्रा की क्वेरीज' (everyday queries) के लिए लूमों 2.0 अब 76% ज्यादा तेज है। हालांकि, अगर आप इससे बहुत ज्यादा कॉम्प्लेक्स या मुश्किल काम करवाते हैं, तो उसमें अभी भी थोड़ा ज्यादा टाइम लग सकता है, लेकिन सामान्य यूज के लिए यह अब काफी तेज हो गया है।
सबसे अच्छी बात यह है कि यह अब 'मल्टीमॉडल' (multimodal) हो गया है। इसका मतलब है कि यह अलग-अलग सोर्सेज से जानकारी जुटा सकता है और उन्हें क्रॉस-चेक भी कर सकता है, जिससे आपको किसी और AI इंजन पर निर्भर रहने की जरूरत कम पड़ेगी।
कस्टमाइज असिस्टेंट और अलग-अलग मोड्स
लूमों 2.0 में एक और धांसू फीचर है 'कस्टम लूमोंस' (Custom Lumos)। ये ऐसे असिस्टेंट हैं जिन्हें आप अपने खास कामों के लिए तैयार कर सकते हैं।
जैसे, अगर आपको कोडिंग में मदद चाहिए या कोई रिसर्च करनी है, तो आप उसके लिए एक कस्टम असिस्टेंट बना सकते हैं। अच्छी बात यह है कि ये कस्टम असिस्टेंट आपकी दी गई इंस्ट्रक्शंस को याद रखते हैं, और सबसे खास बात, ये भी प्राइवेसी के उसी इंक्रिप्शन वादे के साथ आते हैं।
मतलब, आपकी पर्सनल सेटिंग और बातचीत भी सुरक्षित रहेंगी। इससे आपको हर बार अपनी क्वेरी के लिए शुरुआत से सब कुछ बताने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इसके अलावा, यूजर्स के पास दो अलग-अलग मॉडल्स का ऑप्शन भी है: 'लाइट मॉडल' जो कि तेज और सामान्य इस्तेमाल के लिए है, और 'मैक्स मॉडल' जो ज्यादा डिमांडिंग और कॉम्प्लेक्स कामों के लिए बना है। साथ ही, 'फास्ट और थिंकिंग मोड्स' भी दिए गए हैं, जो पिछले वर्जन के मुकाबले दोगुनी 'कॉन्टेक्स्ट विंडो' (context window) ऑफर करते हैं।
इससे बड़े वर्कलोड और ज्यादा मुश्किल सवालों के जवाबों में बेहतर तालमेल और सटीकता मिलती है।
कुल मिलाकर, प्रोटॉन ने लूमों 2.0 के जरिए AI की दुनिया में एक नई राह दिखाने की कोशिश की है, जहां ताकतवर फीचर्स और आपकी पर्सनल प्राइवेसी एक साथ चल सकें। अब देखना यह है कि यूजर्स इसे कितना पसंद करते हैं और यह कैसे AI मार्केट में अपनी जगह बनाता है।





































