खेल जगत: भारत और इंग्लैंड के बीच चल रही T20 सीरीज, जो अब अपने आखिरी मोड़ पर है, टीम इंडिया के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रही है। लगातार तीन मैच हारकर सीरीज गँवा चुकी भारतीय टीम अब शनिवार, 11 जुलाई को होने वाले पांचवें और आखिरी मुकाबले में बस इज्जत बचाने की कोशिश करेगी। लेकिन इस हार के बाद से ही टीम के भीतर और बाहर बड़े-बड़े सवाल उठने लगे हैं। खासकर टीम की प्लेइंग इलेवन और उपकप्तान तिलक वर्मा के प्रदर्शन पर हर कोई अपनी राय दे रहा है।
सीरीज तो हाथ से निकल चुकी है, अब बस ये देखना है कि टीम आखिरी मैच में क्या बदलाव करती है। इन सबके बीच, एक नाम है जो चर्चा के केंद्र में है – वो हैं टीम के उपकप्तान तिलक वर्मा।
इस पूरे दौरे पर उनका प्रदर्शन उतना खास नहीं रहा, जितनी उनसे उम्मीदें थीं।
एक वक्त था, जब तिलक वर्मा ने आयरलैंड के खिलाफ एक मैच में तूफानी 55 रन बनाए थे। लगा था कि ये खिलाड़ी लंबी रेस का घोड़ा है।
लेकिन उस पारी के बाद से कहानी कुछ और ही बन गई।
क्या तिलक वर्मा की फॉर्म बनी चिंता की वजह?
आयरलैंड के खिलाफ उस दमदार 55 रन की पारी के बाद, तिलक वर्मा ने अगले पांच मुकाबलों में सिर्फ 70 रन ही बटोरे हैं। आंकड़े बताते हैं कि उनकी फॉर्म ने कहीं न कहीं भारतीय टीम मैनेजमेंट और फैंस, दोनों को चिंता में डाल दिया है।
यही वजह है कि अब उनकी जगह को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं, खासकर जब टीम सीरीज हार चुकी हो।
इंग्लैंड के गेंदबाज भी तिलक की कमजोरियों को अच्छे से भाँप चुके हैं। उन्होंने देखा है कि तिलक को स्पिन के खिलाफ थोड़ी दिक्कत होती है और वे लगातार उनके सामने स्पिनर्स को लगा रहे हैं।
इसका नतीजा ये हुआ कि तिलक इस दौरे पर कोई बड़ी या मैच जिताऊ पारी खेल ही नहीं पाए।
उनकी लगातार गिरती फॉर्म और उपकप्तान होने के बावजूद प्रदर्शन न कर पाना, कई सवाल खड़े करता है। ऐसे में, पूर्व भारतीय विकेटकीपर पार्थिव पटेल ने भी इस पूरे मसले पर अपनी बेबाक राय रखी है।
उन्होंने तिलक की स्थिति की तुलना शुभमन गिल से की है, जिनके साथ पहले ऐसा ही कुछ हुआ था और उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा था।
पार्थिव पटेल ने किस पर उठाए सवाल?
पूर्व भारतीय क्रिकेटर पार्थिव पटेल ने JioStar के अपने शो 'गूगलीज' पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि कोई और उपकप्तान टीम से बाहर नहीं होगा।
उनका इशारा साफ तौर पर तिलक वर्मा की तरफ था, जिनकी फॉर्म लगातार गिर रही है। पार्थिव ने कहा, "मैं बस उम्मीद कर रहा हूं कि हमें कोई और वाइस-कैप्टन ड्रॉप होते हुए न दिखे।
"
उन्होंने साफ-साफ शब्दों में बताया कि भारतीय टीम का मौजूदा बैटिंग लाइन-अप लंबे समय तक टिक नहीं पाएगा। पार्थिव ने कहा, "हमारे पास जिस तरह का बैटिंग लाइन-अप है, वह लंबे समय तक काम नहीं कर सकता।
अगर आपके टॉप सात बैटर में से छह लेफ्ट-हैंडर हैं, तो वह बैटिंग ऑर्डर काम नहीं करेगा। कहीं न कहीं बदलाव तो करने ही होंगे।
"
पार्थिव पटेल के मुताबिक, टीम को अब यह सोचना होगा कि कौन अंदर आता है और किस राइट-हैंडर बल्लेबाज को सपोर्ट दिया जाता है। उनका जोर इस बात पर था कि टीम को संतुलित बनाने के लिए कुछ बड़े फैसले लेने होंगे।
उन्होंने तिलक वर्मा को सीधे तौर पर कहा कि उन्हें अब रन बनाने की जरूरत है, ताकि वह अपनी जगह और उपकप्तानी को सही ठहरा सकें।
बैटिंग ऑर्डर में क्या गड़बड़ है?
अगर पार्थिव पटेल की बात पर गौर करें, तो उनका मुख्य मुद्दा टीम के बैटिंग ऑर्डर में लेफ्ट-हैंडर्स की अधिकता है। उनका कहना है कि टॉप सात बल्लेबाजों में से छह का लेफ्ट-हैंडर होना एक बड़ी समस्या है।
सोचिए, जब सामने वाले गेंदबाज को पता हो कि उसे लगातार एक ही तरह के बल्लेबाज को गेंदबाजी करनी है, तो वह आसानी से प्लान बना सकता है और दबाव डाल सकता है।
यह बात सिर्फ एक मैच की नहीं है, बल्कि पूरी सीरीज में इंग्लैंड के गेंदबाजों ने इसका फायदा उठाया है। उन्होंने बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ खास रणनीति बनाई और लगातार सफलता हासिल की।
ऐसे में, टीम को बल्लेबाजी क्रम में संतुलन लाने की सख्त जरूरत है। क्या टीम इंडिया इस बात पर ध्यान देगी, ये देखने वाली बात होगी।
पार्थिव पटेल ने उम्मीद जताई कि तिलक वर्मा को खुद को साबित करने का पूरा मौका मिलेगा और वह जल्द ही अच्छी बल्लेबाजी कर वापसी करेंगे। लेकिन क्या टीम मैनेजमेंट उन्हें इतने मौके देगा, खासकर जब सीरीज का रिजल्ट खराब रहा हो? ये सवाल भी उठना लाज़मी है।
सिर्फ बैटिंग ही नहीं, फील्डिंग का भी है बुरा हाल?
पार्थिव पटेल सिर्फ बैटिंग लाइन-अप पर ही नहीं रुके। उन्होंने भारतीय टीम की फील्डिंग पर भी तीखे सवाल उठाए।
और ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं है, बल्कि एक ऐसी समस्या है जो भारतीय क्रिकेट को पिछले कुछ समय से लगातार परेशान कर रही है। पार्थिव ने कहा कि ये परेशानी सिर्फ पुरुष टीम तक ही सीमित नहीं है, बल्कि महिला और जूनियर टीमों में भी साफ दिख रही है।
उन्होंने आयरलैंड सीरीज का उदाहरण दिया, जहां खराब फील्डिंग ने टीम को काफी नुकसान पहुंचाया। पार्थिव के मुताबिक, "नतीजा थोड़ा हैरान करने वाला और चौंकाने वाला था।
खराब क्रिकेट खेलने के बाद आप आयरलैंड को हराने की उम्मीद नहीं कर सकते।" उन्होंने आगे कहा कि पिछले दो से ढाई साल में भारतीय क्रिकेट की सबसे चिंताजनक बात फील्डिंग रही है, चाहे पुरुष टीम हो, महिला टीम हो या जूनियर क्रिकेट।
आयरलैंड सीरीज के पहले मैच का जिक्र करते हुए पार्थिव ने बताया कि अगर दो या तीन कैच पकड़ लिए जाते, तो आयरलैंड 180 से ज्यादा का स्कोर बना ही नहीं पाती। दूसरे मैच में भी ठीक ऐसा ही हुआ।
सोचिए, एक टीम जो दुनिया की टॉप टीमों में गिनी जाती है, उसके खिलाड़ी ऐसे कैच टपका रहे हैं। यह वाकई चिंता का विषय है और निश्चित रूप से एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर भारतीय क्रिकेट को तुरंत काम करने की जरूरत है।
कुल मिलाकर, इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज की हार ने भारतीय क्रिकेट में कई खामियों को उजागर कर दिया है। चाहे वह तिलक वर्मा की फॉर्म हो, बैटिंग ऑर्डर का संतुलन हो या फिर टीम की फील्डिंग।
पार्थिव पटेल जैसे दिग्गजों की बेबाक टिप्पणियां बताती हैं कि अब बदलाव का समय आ गया है। अब देखना ये है कि टीम मैनेजमेंट और खिलाड़ी इन चुनौतियों से कैसे निपटते हैं और आने वाले मुकाबलों में क्या नया करके दिखाते हैं।









































