मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में हलचल तेज है, और अगर आप स्टॉक मार्केट की खबरें फॉलो करते हैं, तो आपने 'आईपीओ' शब्द जरूर सुना होगा। लेकिन अब एक ऐसा आईपीओ आने वाला है, जो सिर्फ बड़ा नहीं, बल्कि 'मेगा' आईपीओ होने वाला है। हम बात कर रहे हैं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आईपीओ की, जिसने बाजार में एक नया माहौल बना दिया है।
एनएसई दुनिया भर के 30 से ज्यादा बड़े-बड़े निवेशकों को अपने बारे में बताने वाला है। अगले हफ्ते से इन 'इनवेस्टर मीटिंग्स' का दौर शुरू हो जाएगा।
अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक रहा, तो इस साल अक्टूबर तक एनएसई के शेयर बाजार में लिस्ट हो जाएंगे, यानी आप भी इसके शेयर खरीद पाएंगे।
लेकिन ये सिर्फ एनएसई की बात नहीं है। इस साल एक और धुरंधर कंपनी का आईपीओ आने वाला है – जियो प्लेटफॉर्म्स का।
जरा सोचिए, जब दो इतने बड़े खिलाड़ी एक साथ मैदान में उतरेंगे, तो बाजार में कितना धमाल मचेगा!
क्या है एनएसई के आईपीओ का पूरा मामला?
एनएसई ने पिछले महीने ही अपने ड्राफ्ट पेपर्स सेबी (SEBI) के पास फाइल कर दिए थे, जो भारत में शेयर बाजार का रेगुलेटर है। मोटा-मोटी कहें तो ये एक तरह का आवेदन होता है, जिसमें कंपनी अपनी पूरी जानकारी देती है कि वो कैसे काम करती है, उसके फाइनेंस कैसे हैं और वो आईपीओ क्यों लाना चाहती है।
ये ड्राफ्ट पेपर्स फाइल होते ही, बाजार में उत्सुकता और बढ़ गई। अब एनएसई का सीनियर मैनेजमेंट इस महीने के अंत तक सिंगापुर, मलेशिया और हॉन्गकॉन्ग जैसे देशों में 'रोडशो' भी कर सकता है।
ये रोडशो, ग्लोबल इनवेस्टर्स को अपनी तरफ खींचने की एक कोशिश है, जहां कंपनी अपने बिजनेस प्लान और फ्यूचर ग्रोथ को इन निवेशकों के सामने पेश करती है।
कितनी बड़ी होगी ये डील, कौन बेच रहा हिस्सेदारी?
अब आते हैं असली मुद्दे पर – ये आईपीओ कितना बड़ा होने वाला है? रायटर्स (Reuters) ने पिछले महीने अपने सूत्रों और प्राइवेट मार्केट ट्रेड्स के हवाले से बताया था कि एनएसई का आईपीओ करीब 3.3 अरब डॉलर का हो सकता है। यह एक बहुत बड़ी रकम है, जो इसे इस साल के सबसे बड़े आईपीओ में से एक बनाती है।
यहां एक और दिलचस्प बात है। एनएसई के मौजूदा शेयरहोल्डर्स इस आईपीओ में अपनी करीब 6 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकते हैं।
इसका मतलब है कि नया पैसा सीधे कंपनी में नहीं जाएगा, बल्कि मौजूदा शेयरहोल्डर्स को मिलेगा। ये भी बाजार में निवेश के मौके तलाश रहे लोगों के लिए एक अहम जानकारी है।
बीएसई से क्या मुकाबला, किसका पलड़ा भारी?
जब भी भारत में स्टॉक एक्सचेंज की बात होती है, तो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का नाम जरूर आता है। बीएसई का आईपीओ 2017 में आया था, और लिस्टिंग के बाद से उसके शेयर की कीमत 30 गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है।
तो क्या एनएसई भी ऐसी ही लंबी छलांग लगाने वाला है?
हालांकि, पिछले कुछ सालों में बीएसई के प्रदर्शन में सुधार देखा गया है। वित्त वर्ष 2026 में बीएसई की रेवेन्यू ग्रोथ 88 फीसदी रही, जो वाकई कमाल की है।
वहीं, इसी दौरान एनएसई के रेवेन्यू में 3 फीसदी की गिरावट आई। इसकी एक बड़ी वजह सेबी के डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के सख्त नियम बताए जा रहे हैं, जिसका असर एनएसई के बिजनेस पर पड़ा।
लेकिन यहां कहानी में एक ट्विस्ट है। भले ही एनएसई के रेवेन्यू में थोड़ी गिरावट आई हो, फिर भी उसका कुल रेवेन्यू बीएसई के मुकाबले करीब छह गुना है।
यानी, बाजार पर एनएसई का दबदबा अभी भी कायम है, और ये दिखाता है कि क्यों इसका आईपीओ इतना अहम है।
निवेशकों को क्या सपने दिखा रहा है एनएसई?
कोई भी कंपनी आईपीओ लाने से पहले निवेशकों को अपने भविष्य के प्लान और ग्रोथ की संभावनाएं बताती है। एनएसई भी यही कर रहा है।
उसने इनवेस्टर्स को बताया है कि अगले पांच सालों में कैश इक्विटीज और इक्विटीज फ्यूचर्स की सालाना टर्नओवर ग्रोथ 12 फीसदी रह सकती है।
इतना ही नहीं, इक्विटी ऑप्शंस की ग्रोथ भी अगले पांच सालों में सालाना 10 फीसदी रहने का अनुमान है। अगर एनएसई के मौजूदा मार्केट शेयर की बात करें, तो इक्विटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग में इसकी हिस्सेदारी 100 फीसदी है, कैश मार्केट में 93 फीसदी और इक्विटी ऑप्शंस में 75 फीसदी है।
ये आंकड़े खुद बताते हैं कि एनएसई का बाजार पर कितना गहरा कंट्रोल है।
कंपनी का तर्क है कि भारत में शेयर बाजार तक लोगों की पहुंच अभी विकसित देशों के मुकाबले काफी कम है। इसका मतलब है कि शेयर ट्रेडिंग का वॉल्यूम बढ़ने की बहुत ज्यादा संभावना है।
एनएसई को करेंसी डेरिवेटिव्स मार्केट में भी अपनी ग्रोथ 15 फीसदी रहने की उम्मीद है। तो कुल मिलाकर, कंपनी निवेशकों को एक शानदार फ्यूचर दिखा रही है।
अब देखना ये होगा कि एनएसई का यह मेगा आईपीओ बाजार में क्या रंग लाता है और निवेशकों के लिए कितना फायदेमंद साबित होता है। अगले कुछ महीने शेयर बाजार में खूब चहल-पहल रहने वाली है!




































