नई दिल्ली: घर में एक नन्हे मेहमान का आना किसी भी माता-पिता के लिए ज़िंदगी का सबसे प्यारा और बदल देने वाला पल होता है। ये पल ढेर सारी खुशियां लेकर आते हैं, लेकिन अपने साथ कई नई और बड़ी जिम्मेदारियां भी साथ लाते हैं। हर पेरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा ज़िंदगी में हर मुकाम हासिल करे, और इस सपने को पूरा करने के लिए एक मज़बूत आर्थिक बुनियाद होना बेहद ज़रूरी है।
अक्सर देखा गया है कि नए माता-पिता अपने बच्चे की परवरिश में इतने मसरूफ़ हो जाते हैं कि उसके भविष्य की वित्तीय प्लानिंग को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। उन्हें लगता है कि अभी तो बच्चा छोटा है, प्लानिंग बाद में भी हो सकती है।
लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चे की अच्छी पढ़ाई, बेहतर स्वास्थ्य और बाकी लंबी अवधि के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए शुरुआत से ही सही कदम उठाना बेहद ज़रूरी है। तो क्या आपने अपने बच्चे के सुनहरे भविष्य की आर्थिक नींव रखी है?
आज हम एक्सपर्ट्स के बताए कुछ ऐसे ज़रूरी फॉर्मूलों पर बात करेंगे, जो नए माता-पिता को अपने बच्चे के सुरक्षित भविष्य के लिए तुरंत अपनाने चाहिए। ये कुछ ऐसे कदम हैं जो आपको मानसिक शांति भी देंगे और आपके बच्चे के सपनों को उड़ान भरने में भी मदद करेंगे।
बच्चे का भविष्य सुरक्षित रखने का पहला कदम क्या है?
एक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि नए माता-पिता के लिए सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए एक बेहतरीन टर्म इंश्योरेंस प्लान लेना। ज़रा सोचिए, अगर खुदा न खास्ता कोई अनहोनी हो जाती है, तो आपके परिवार और खासकर बच्चे का क्या होगा? टर्म इंश्योरेंस यही सुनिश्चित करता है कि आपकी गैर-मौजूदगी में भी बच्चे की पढ़ाई-लिखाई और बाकी ज़रूरतें पूरी होती रहें।
यह एक तरह का 'सेफ्टी नेट' है जो परिवार को आर्थिक झटकों से बचाता है।
इसके तुरंत बाद, एक कॉम्प्रीहेंसिव हेल्थ इंश्योरेंस प्लान भी उतना ही ज़रूरी है। आजकल मेडिकल खर्च किस तेज़ी से बढ़ रहे हैं, यह किसी से छिपा नहीं है।
एक छोटी सी बीमारी या कोई एक्सीडेंट आपकी सारी जमा-पूंजी को पल भर में खत्म कर सकता है। सही हेल्थ कवर होने से आपकी गाढ़ी कमाई सुरक्षित रहती है, जिसे आप बाद में बच्चे के लिए ही निवेश कर सकते हैं।
यह आपको बिना किसी चिंता के बच्चे को बेहतर इलाज मुहैया कराने का भरोसा देता है और आपकी जेब पर पड़ने वाले अचानक बोझ से बचाता है।
मुश्किल वक्त के लिए कैसी तैयारी ज़रूरी है?
ज़िंदगी में कब क्या हो जाए, कोई नहीं जानता। कभी नौकरी जा सकती है, कभी बिजनेस में घाटा हो सकता है, या कोई अचानक मेडिकल इमरजेंसी आ सकती है (जिसके खर्च हेल्थ इंश्योरेंस से कवर न हों या तब तक के लिए जब तक इंश्योरेंस क्लेम न आ जाए)।
ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए माता-पिता को कम से कम 6 महीने के घरेलू खर्च के बराबर एक इमरजेंसी फंड ज़रूर बनाए रखना चाहिए।
ये फंड आपके पास कैश के रूप में या सेविंग्स अकाउंट में होना चाहिए, ताकि किसी भी ज़रूरत के समय आप आसानी से इसे इस्तेमाल कर सकें। इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपको अपने लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट्स जैसे म्यूचुअल फंड या एफडी को बीच में तोड़ना नहीं पड़ेगा।
अगर आप इमरजेंसी में अपने निवेश को तोड़ते हैं, तो आपको बड़ा नुकसान हो सकता है और आपके बच्चे के भविष्य के लिए रखे गए पैसे पर भी असर पड़ सकता है। यह लिक्विड फंड आपको हर मुश्किल स्थिति में मानसिक शांति देगा।
उच्च शिक्षा के लिए कैसे करें निवेश की शुरुआत?
बच्चे की उच्च शिक्षा, यानी हायर एजुकेशन, एक ऐसा लक्ष्य है जिसके लिए लंबी अवधि के निवेश की ज़रूरत होती है। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि उच्च शिक्षा के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के ज़रिए निवेश करना सबसे बेहतर विकल्प है।
एसआईपी का फायदा ये है कि आप हर महीने छोटी-छोटी रकम निवेश करते हैं, जिससे शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम हो जाता है और लॉन्ग-टर्म में अच्छा रिटर्न मिलता है। इसे 'कंपाउंडिंग की ताकत' कहते हैं, जहां आपके पैसे पर पैसा बनता चला जाता है।
एक्सपर्ट खासकर सलाह देते हैं कि माता-पिता को यह एसआईपी विशेष रूप से अपने नाबालिग बच्चे के बैंक खाते से ही शुरू करनी चाहिए। ऐसा करने से माता-पिता अपने लक्ष्य के प्रति ज्यादा प्रतिबद्ध रहते हैं और उस पैसे को किसी अन्य काम में खर्च करने से बचते हैं।
यह एक मनोवैज्ञानिक रणनीति है जो आपको बच्चे के भविष्य के लिए ज़्यादा फ़ोकस्ड रखती है।
एक और ज़रूरी बात: उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महंगाई दर करीब 8% की रफ्तार से बढ़ रही है। इसका मतलब है कि जो शिक्षा आज आपको ₹30 लाख में मिल रही है, वही शिक्षा 18 साल बाद 8% की महंगाई दर के कारण लगभग ₹1.2 करोड़ (1,20,00,000) की हो जाएगी।
इतनी बड़ी रकम जुटाने के लिए निवेश में देरी करना आपको बहुत भारी पड़ सकता है। इसलिए, आज से ही और सही जगह निवेश शुरू करना आपके बच्चे के भविष्य के सपनों को साकार करने के लिए बेहद ज़रूरी है।
ये कदम सिर्फ पैसे बचाने के बारे में नहीं हैं, बल्कि बच्चे के लिए एक मजबूत और सुरक्षित कल बनाने के बारे में हैं।




































