बाजार डेस्क: पिछले कुछ दिनों से शेयर बाजार में जो हलचल मची है, वो किसी एक्शन थ्रिलर फिल्म के क्लाइमेक्स से कम नहीं है। सोचिए, एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच जियोपॉलिटिकल तनाव फिर से सिर उठा रहा है, सीजफायर टूटने की खबरें चारों तरफ फैल रही हैं। वहीं, दूसरी तरफ ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें आग की तरह बढ़ रही हैं, ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के अहम निशान को पार कर चुका है। इन सब ग्लोबल झमेलों के बीच हमारा भारतीय शेयर बाजार, खासकर निफ्टी और बैंक निफ्टी, एक अजीब सी चौराहे पर खड़े हैं। निवेशक, ट्रेडर्स और आम आदमी हर कोई बस एक ही सवाल पूछ रहा है – क्या ये दोनों इंडेक्स इन बाहरी चुनौतियों के बावजूद अपने अहम सपोर्ट लेवल्स को बचा पाएंगे या फिर बाजार में और उथल-पुथल मचेगी? आइए, आज इसी पहेली को सुलझाते हैं और समझते हैं कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल क्या हो सकती है, और आपके पैसे का क्या होगा?
क्या निफ्टी 24,000 का किला बचा पाएगा?
बाजार के दिग्गज जानकारों की मानें तो, निफ्टी को अगर फिर से तेज़ी की राह पकड़नी है और 24,500-24,600 के स्तर तक मजबूत होकर ऊपर जाना है, तो उसे एक बड़ी चुनौती पार करनी होगी। वो चुनौती है पिछले बुधवार को बना 'बेयरिश गैप' भरना।
ये बिल्कुल ऐसा है जैसे कोई धावक अपनी रेस में पीछे छूट गए फासले को पहले कवर करता है, तभी वो आगे निकल पाता है। जब तक निफ्टी इस गैप को भर नहीं देता और उसके ऊपर मजबूती से टिका नहीं रहता, तब तक मार्केट में मौजूदा कंसोलिडेशन, यानी एक दायरे में सीमित उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है।
ये एक ऐसी स्थिति होती है जहाँ निवेशक ये तय नहीं कर पाते कि बाजार ऊपर जाएगा या नीचे, इसलिए वो एक रेंज में घूमता रहता है।
अगर सपोर्ट की बात करें, तो निफ्टी के लिए 24,000 पर तत्काल सपोर्ट मौजूद है। इसे आप बाजार के लिए एक मजबूत सुरक्षा दीवार मान सकते हैं, जो इसे गिरने से बचा सकती है।
लेकिन, अगर किसी वजह से ये दीवार टूटती है और निफ्टी इस लेवल से नीचे आता है, तो अगला बड़ा सपोर्ट 23,800 के स्तर पर दिख रहा है। ये वो लेवल है जहाँ से बाजार को फिर से वापसी करने की उम्मीद की जा सकती है।
लेकिन अगर निफ्टी 24,400 के लेवल से ऊपर जाकर मजबूती दिखाता है, तो फिर से एक अपट्रेंड की उम्मीद जग सकती है, यानी बाजार में तेज़ी का दौर वापस आ सकता है।
बैंक निफ्टी की राह कितनी मुश्किल है?
सिर्फ निफ्टी ही नहीं, बैंक निफ्टी भी अपनी राह तलाश रहा है और निवेशकों को असमंजस में डाले हुए है। बैंक निफ्टी में और तेज़ी की पुष्टि तब होगी, जब ये 58,600-58,700 के ज़ोन से ऊपर लगातार क्लोजिंग दे।
तब तक, इसमें भी कंसोलिडेशन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसे ऐसे समझिए कि बैंक निफ्टी अभी अपनी सही दिशा तय करने में लगा है।
बैंक निफ्टी के लिए 57,500-57,300 के ज़ोन में तत्काल सपोर्ट मौजूद है। ये एक अहम लेवल है जहाँ से इसे सहारा मिल सकता है।
अगर ये सपोर्ट टूटता है, तो अगला अहम सपोर्ट 56,500 के स्तर पर दिख रहा है। बैंकिंग स्टॉक्स का बाजार में बड़ा प्रभाव होता है, इसलिए बैंक निफ्टी की चाल पर भी सबकी नज़रें टिकी हुई हैं।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं: राजेश पालविया की खास राय?
एक्सिस सिक्योरिटीज में रिसर्च हेड राजेश पालविया ने बाजार के इस पूरे मिजाज़ को बड़े कायदे से समझाया है। उन्होंने बताया कि पिछले हफ्ते निफ्टी में खूब उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
इसकी मुख्य वजहें वही थीं—अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर टूटने से बढ़ा जियोपॉलिटिकल तनाव और ब्रेंट क्रूड का $80 प्रति बैरल के अहम स्तर पर पहुंचना। इन ग्लोबल संकेतों ने भारतीय बाजार पर सीधे असर डाला।
इतनी उठापटक के बावजूद, हफ्ते के आखिर में निफ्टी 64 अंक गिरकर बंद हुआ, जो बताता है कि बाजार में कितनी अनिश्चितता और असमंजस की स्थिति है।
वीकली चार्ट क्या इशारा कर रहा है?
राजेश पालविया ने वीकली चार्ट पर निफ्टी की स्थिति पर रोशनी डालते हुए कहा कि इंडेक्स ने एक छोटी 'बेयरिश कैंडल' बनाई है, जिसके दोनों तरफ लंबी शैडो (परछाई) थीं। ये ऐसी कैंडल होती है जो बाजार में तेज उतार-चढ़ाव और दुविधा की स्थिति को साफ तौर पर दिखाती है।
इसका मतलब है कि खरीददार और बेचने वाले, दोनों ही फिलहाल कोई मजबूत फैसला नहीं ले पा रहे हैं। टेक्निकल नजरिए से देखें तो, अगर निफ्टी पिछले हफ्ते के 24,521 के हाई से ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट देता है, तो ही खरीदारी का मोमेंटम फिर से बढ़ सकता है और इंडेक्स 24,750 की ओर बढ़ सकता है।
यह लेवल फरवरी-अप्रैल 2026 की गिरावट के 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के बराबर है, जो एक अहम रेजिस्टेंस लेवल होता है। इसके बाद 24,846 पर स्थित 200-डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज) अगला अहम लेवल होगा, जो बाजार के लिए एक और मजबूत दीवार का काम करेगा।
क्या 24,000 का लेवल टूट सकता है?
हालांकि, अगर निफ्टी 24,000 के अहम सपोर्ट लेवल को तोड़ता है और उससे नीचे फिसल जाता है, तो 23,817-23,650 का बुलिश गैप जोन फिर से टेस्ट हो सकता है। यह एक ऐसा इलाका है जहां बाजार में पहले से खरीदारी का दबाव रहा है, और यह फिर से सपोर्ट देने की कोशिश कर सकता है।
लेकिन अगर ये गैप भी टूटता है, तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
एक अच्छी खबर यह है कि वीकली RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) अपनी रेफरेंस लाइन से ऊपर बना हुआ है, जो दिखाता है कि बाजार का ओवरऑल रुख अभी भी पॉजिटिव है। लेकिन, सबसे बड़ा गेमचेंजर अमेरिका-ईरान विवाद और कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला बदलाव ही होगा।
ये ही आने वाले समय में मार्केट की दिशा तय करने वाले मुख्य कारण होंगे, जिन पर निवेशकों को पैनी नज़र रखनी चाहिए।
निवेशकों के लिए क्या है खास स्ट्रेटेजी?
अब बात करते हैं स्ट्रेटेजी की, यानी निवेशकों और ट्रेडर्स को इस मुश्किल घड़ी में क्या करना चाहिए? जानकारों के मुताबिक, निफ्टी फ्यूचर्स को 24,080 के आसपास खरीदने की सलाह दी जा रही है। इसमें 23,950 का स्टॉप-लॉस रखने को कहा गया है, ताकि अगर बाजार उम्मीद के मुताबिक न चले तो नुकसान सीमित रहे।
टारगेट 24,250–24,350 के जोन का रखा गया है, यानी इस रेंज में मुनाफ़ा बुक किया जा सकता है। लेकिन याद रहे, यह सिर्फ एक सलाह है और शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा हो सकता है।
कुल मिलाकर, बाजार अभी एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। ग्लोबल टेंशन, तेल की बढ़ती कीमतें और घरेलू बाजार के अहम लेवल्स—ये सब मिलकर एक बड़ा चैलेंज पेश कर रहे हैं।
निवेशकों को सावधानी से कदम रखने और एक्सपर्ट की सलाह पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। अब देखना ये होगा कि निफ्टी और बैंक निफ्टी इस मुश्किल दौर से कैसे निकलते हैं और क्या वे अपने अहम लेवल्स को बचा पाते हैं, या फिर बाजार कोई नई करवट लेता है।




































