बाजार डेस्क: पिछले दो कारोबारी दिनों से जो शेयर बाजार हरे निशान में चमक रहा था, आज उसकी रौनक अचानक फीकी पड़ गई। मुंबई के दलाल स्ट्रीट पर आज सुबह से ही कुछ अजीब सा माहौल था, और देखते ही देखते सेंसेक्स और निफ्टी 50 धड़ाम से गिर गए। एक तरफ आईटी सेक्टर अपनी पूरी जान लगाकर बाजार को संभालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन कुछ और सेक्टरों की बिकवाली ने मिलकर इसे नीचे खींच लिया।
आपको याद होगा, ठीक एक कारोबारी दिन पहले यानी 10 जुलाई को सेंसेक्स पूरे 827.57 पॉइंट ऊपर चढ़कर 77,569.39 पर बंद हुआ था। निफ्टी 50 भी पीछे नहीं था, वो भी 244.10 पॉइंट की उछाल के साथ 23,206.90 के शानदार स्तर पर पहुंचा था।
लग रहा था कि बाजार में अब तेजी का दौर शुरू हो गया है, लेकिन आज सुबह ही सारी उम्मीदें हवा हो गईं।
शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 700 पॉइंट से ज़्यादा टूट गया और निफ्टी 50 भी 24000 के अहम साइकोलॉजिकल लेवल पर आ गया। ब्रॉडर मार्केट में भी जबरदस्त दबाव देखने को मिला, निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में भी आधे फीसदी से ज़्यादा की गिरावट दर्ज हुई।
कुल मिलाकर, निवेशकों के चेहरों पर मायूसी साफ दिख रही थी।
आखिर बाजार धड़ाम क्यों हुआ?
अब सवाल उठता है कि अचानक ये गिरावट आई क्यों? असल में, इसके पीछे एक नहीं, बल्कि कई बड़ी वजहें काम कर रही थीं, जिन्होंने मिलकर बाजार का मूड खराब कर दिया।
अमेरिका और ईरान के बीच क्या खिचड़ी पक रही है?
बाजार पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिका और ईरान के बीच गहराते तनाव ने डाला। खबरें आ रही थीं कि दोनों देशों के बीच फिर से सैन्य हमले शुरू हो गए हैं।
इस खबर ने दुनियाभर के बाजारों में एक तरह की घबराहट पैदा कर दी। रही-सही कसर ईरान के उस ऐलान ने पूरी कर दी, जिसमें उसने होर्मुज स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) को बंद करने की धमकी दी।
यह दुनिया के सबसे अहम शिपिंग रूट्स में से एक है और यहां से बड़ी मात्रा में तेल का ट्रांसपोर्ट होता है। इस धमकी से भू-राजनीतिक चिंताएं बढ़ गईं और इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ा।
कच्चे तेल में क्यों आया उबाल?
ईरान की होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी से कच्चा तेल उबल पड़ा। मार्केट में मानो खलबली मच गई।
सितंबर डिलीवरी वाला बेंचमार्क ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स एकदम से 4% से ज़्यादा उछलकर 79 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, क्योंकि इससे ट्रांसपोर्टेशन महंगा होता है, महंगाई बढ़ने का डर रहता है और कंपनियों के मुनाफे पर भी असर पड़ता है।
इसी डर ने बाजार की रौनक फीकी कर दी।
इंडिया विक्स ने क्यों बढ़ाया टेंशन?
बाजार की घबराहट को मापने वाला एक पैमाना होता है 'इंडिया विक्स' (India VIX)। इसमें तेज उछाल का मतलब है कि मार्केट में आने वाले दिनों में और ज़्यादा वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) आने की आशंका बढ़ गई है।
आज इंडिया विक्स में भी उछाल देखने को मिला, जिससे निवेशकों की चिंताएं और बढ़ गईं। हालांकि, खबर लिखे जाने तक इसमें 7.63% की गिरावट के साथ यह 13.19 पर था, लेकिन शुरुआती उछाल ने बाजार को तगड़ा झटका दे दिया था।
इसका ज्यादा होना बताता है कि ट्रेडर्स आगे चलकर बड़े उतार-चढ़ाव की उम्मीद कर रहे हैं, जो बाजार के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता।
किस सेक्टर ने दी ताकत और किसने किया निराश?
गिरते बाजार में एक सेक्टर ऐसा भी था, जो अपनी पूरी ताकत से खड़ा रहा और बाजार को कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश की। वो था आईटी सेक्टर।
निफ्टी आईटी इंडेक्स में आधे फीसदी से ज़्यादा की मज़बूती देखने को मिली। लेकिन, कहते हैं ना, एक अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।
आईटी की इस कोशिश के बावजूद मेटल और फार्मा सेक्टर ने बाजार को नीचे खींच लिया। इनके निफ्टी इंडेक्स आधे फीसदी से ज़्यादा कमजोर हुए।
इसके अलावा, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी ऑटो में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार पर ओवरऑल दबाव और बढ़ गया।
फिलहाल, सुबह 10:30 बजे के आंकड़ों के मुताबिक, सेंसेक्स 200.69 पॉइंट यानी 0.26% की फिसलन के साथ 77,360.70 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि निफ्टी 50 भी 69.40 पॉइंट यानी 0.29% की गिरावट के साथ 24,137.50 पर था। हालांकि, इंट्रा-डे में सेंसेक्स 711.96 पॉइंट टूटकर 76,857.43 तक और निफ्टी 206.70 पॉइंट गिरकर 24,000.20 तक आ गया था।
यानी, बाजार ने आज निवेशकों को तगड़ा झटका दिया और आगे क्या होगा, ये देखने वाली बात होगी।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी तरह का निवेश करने से पहले हमेशा किसी योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह ज़रूर लें। हम आपको कहीं भी पैसा लगाने की सलाह नहीं देते हैं।




































