टैक्स डेस्क: हर साल जब इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर भरने का मौसम आता है, तो एक बड़ा सवाल सीधे माथे पर आकर बैठ जाता है कि भई, इस बार ओल्ड टैक्स रिजीम को चुना जाए या फिर न्यू टैक्स रिजीम के साथ आगे बढ़ा जाए? ये एक ऐसा 'चैलेंज' है, जिससे हर सैलरीड पर्सन दो-चार होता है। हर कोई अपने हिसाब से हिसाब-किताब लगाता है, किधर कम टैक्स देना पड़ेगा और किधर ज्यादा बचत होगी। लेकिन एक बात बता दें, हाल ही में कुछ 'थंब रूल' सामने आए हैं, जो इस उलझन को काफी हद तक सुलझा सकते हैं। ये नियम टैक्स देनदारी का मामला थोड़ा साफ कर रहे हैं, पर हां, ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि सैलरी पर्सन टू पर्सन वैरी करती है और कोई एक सिंगल रूल आपकी पूरी टैक्स देनदारी का सही खाका नहीं खींच सकता।
आपकी सहूलियत के लिए एक और जरूरी बात ये कि अब न्यू टैक्स रिजीम को 'डिफॉल्ट विकल्प' बना दिया गया है। इसका मतलब है कि अगर आप आईटीआर फाइल करते समय कोई विकल्प नहीं चुनते हैं, तो आपका रिटर्न ऑटोमैटिकली न्यू टैक्स रिजीम के तहत ही प्रोसेस होगा।
तो फिर सवाल उठता है कि क्या अब भी एक्टिव होकर ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनना फायदेमंद है? आइए, इस बड़े सवाल के पीछे के पूरे गणित को समझने की कोशिश करते हैं।
क्या न्यू टैक्स रिजीम वाकई पुरानी से बेहतर है?
ग्रांट थॉर्नटन भारत (Grant Thornton Bharat) ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए एक खास तुलनात्मक गणना की है। इस कैलकुलेशन के नतीजे बताते हैं कि न्यू टैक्स रिजीम कई सैलरी स्लैब में जबरदस्त बचत दे रही है।
ये आंकड़ा उन लोगों के लिए खास तौर पर काम का है, जिनकी उम्र 60 साल से कम है और जो ओल्ड रिजीम के तहत कुल 4.25 लाख रुपये के डिडक्शन (छूट) का दावा करते हैं। चलिए, जानते हैं कि ये 4.25 लाख रुपये की छूट किन-किन मदों में मिल रही है:
- धारा 80C के तहत: 1,50,000 रुपये की छूट (ये इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 80C और 2025 के अधिनियम की धारा 123 के तहत मिलती है)।
- धारा 80D के तहत: 25,000 रुपये की छूट (ये 1961 के अधिनियम की धारा 80D और 2025 के अधिनियम की धारा 126 के तहत आती है)।
- HRA (हाउस रेंट अलाउंस): इस पर 2,00,000 रुपये की छूट।
- स्टैंडर्ड डिडक्शन: 50,000 रुपये की छूट।
तो भैया, कुल मिलाकर ओल्ड टैक्स रिजीम में आपको इतने सारे डिडक्शन मिलते थे, जिनका टोटल 4.25 लाख रुपये होता था। लेकिन, न्यू टैक्स रिजीम में क्या है? यहां सिर्फ एक 75,000 रुपये का 'स्टैंडर्ड डिडक्शन' ही शामिल किया गया है।
Grant Thornton Bharat की इस कैलकुलेशन में लागू सरचार्ज और 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस को भी जोड़ा गया है, ताकि तस्वीर एकदम साफ हो सके।
विभिन्न सैलरी स्लैब पर कितनी बचत कर सकते हैं आप?
अब बात करते हैं, अलग-अलग सैलरी लेवल पर टैक्सपेयर्स को कितनी बचत हो सकती है। ये आंकड़े आपको चौंका सकते हैं और आपके फैसले में बड़ी मदद कर सकते हैं:
25 लाख रुपये की सैलरी पर कितना बचेगा?
अगर आपकी सालाना सैलरी 25 लाख रुपये है, तो ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत आपका टैक्स 4,52,400 रुपये बनता है। वहीं, अगर आप न्यू टैक्स रिजीम को चुनते हैं, तो यही बिल सिर्फ 3,19,800 रुपये हो जाता है।
सीधा-सीधा हिसाब है, न्यू टैक्स रिजीम चुनने पर आपको 1,32,600 रुपये की बड़ी बचत होती है। ये कोई छोटी-मोटी रकम नहीं है!
50 लाख रुपये की सैलरी पर भी उतनी ही बचत?
दिलचस्प बात ये है कि अगर आपकी सैलरी 50 लाख रुपये सालाना है, तब भी दोनों रिजीम के टैक्स का अंतर 1,32,600 रुपये ही रहता है। यहां भी न्यू टैक्स रिजीम ही टैक्सपेयर्स के लिए विनर साबित होती दिख रही है।
ये आंकड़ा दिखाता है कि चाहे आपकी सैलरी 25 लाख हो या 50 लाख, न्यू टैक्स रिजीम एक समान और आकर्षक बचत का मौका दे रही है।
75 लाख और 1 करोड़ रुपये की सैलरी पर क्या है खास?
जैसे ही आपकी सैलरी 75 लाख या 1 करोड़ रुपये के लेवल पर पहुंचती है, टैक्स के नियम थोड़े और बदल जाते हैं। इस स्लैब में 10 फीसदी का सरचार्ज भी लागू हो जाता है।
इसके बावजूद, न्यू टैक्स रिजीम यहां भी टैक्सपेयर्स को फायदा ही पहुंचा रही है। Grant Thornton Bharat की गणना के मुताबिक, इन सैलरी स्लैब पर न्यू टैक्स रिजीम चुनने पर टैक्सपेयर्स को करीब 1.46 लाख रुपये की बचत हो सकती है।
यानी, ज्यादा कमाई करने वालों के लिए भी नई रिजीम फायदे का सौदा बन सकती है।
कुल मिलाकर, इन आंकड़ों को देखकर एक बात साफ है कि अगर आप उन डिडक्शंस का फायदा नहीं उठा रहे हैं, जो ओल्ड टैक्स रिजीम में मिलते हैं, तो न्यू टैक्स रिजीम आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। खासकर जब ये डिफॉल्ट विकल्प भी बन गई है।
लेकिन हां, हर इंडिविजुअल की फाइनेंशियल सिचुएशन अलग होती है। इसलिए, कोई भी फाइनल फैसला लेने से पहले किसी एक्सपर्ट 'अडवाइस' लेना हमेशा बेहतर होता है।
वे आपकी इनकम, आपकी निवेश योजनाओं और आपकी कुल देनदारियों के हिसाब से आपको सही रास्ता दिखा सकते हैं।




































