वैश्विक बाजार: अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस वक्त जबरदस्त हलचल मची हुई है और इसका सीधा असर दिख रहा है कच्चे तेल की कीमतों पर। मामला गरमाया है पश्चिम एशिया में, जहां एक बार फिर अमेरिका और ईरान आमने-सामने आ गए हैं। इस टेंशन का नतीजा ये हुआ है कि क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं, ब्रेंट क्रूड 4% से ज्यादा उछलकर 79 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्या हो गया? दरअसल, ये पूरा बवाल स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर कंट्रोल को लेकर है, जो दुनिया की एनर्जी सप्लाई के लिए एक बेहद अहम समुद्री रास्ता है।
ताजा खबर ये है कि साइप्रस के एक कमर्शियल जहाज पर हमला हुआ, जिसका आरोप ईरान पर लगा। बस, फिर क्या था, अमेरिका का पारा चढ़ गया और उसने ईरान के करीब 140 ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले कर दिए।
इसके जवाब में ईरान भी शांत नहीं बैठा और उसने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस सब के बीच, ईरान ने एक बड़ा ऐलान कर दिया – स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को 'अगली सूचना तक' बंद करने की धमकी।
अब इससे तो तेल के बाजार में आग लगनी ही थी!
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज इतना अहम क्यों है?
सबसे पहले तो ये समझना जरूरी है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज है क्या और इसकी इतनी अहमियत क्यों है। बता दें, ये एक ऐसा जलमार्ग है जो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है।
दुनिया की कुल एनर्जी सप्लाई का करीब 20 प्रतिशत इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अब आप खुद सोचिए, अगर ये रास्ता बंद हो जाए या इसमें कोई बाधा आए, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका कितना बड़ा असर पड़ सकता है।
तेल का भाव बढ़ना तो छोटी बात है, इससे तो ग्लोबल सप्लाई चेन ही हिल जाएगी।
सोमवार, 13 जुलाई को जब बाजार खुला तो कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड, जो सितंबर में एक्सपायर होने वाले कॉन्ट्रैक्ट के लिए ट्रेड कर रहा है, वो 79 डॉलर प्रति बैरल के निशान से ऊपर पहुंच गया।
पिछले हफ्ते ही इसमें 5.5% की बढ़त हुई थी और अब ये 4% से ज़्यादा ऊपर है। सिर्फ ब्रेंट ही नहीं, अमेरिकी क्रूड वेरिएंट वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 74 डॉलर प्रति बैरल के पार ट्रेड कर रहा है।
वीकेंड के बाद यूरोपीय नेचुरल गैस फ्यूचर्स में भी 2.5% की तेजी दर्ज की गई। मतलब, कुल मिलाकर एनर्जी मार्केट में आग लगी हुई है।
हॉर्मुज स्ट्रेट खुला है या बंद, इस पर क्या बहस है?
ईरान ने भले ही ऐलान कर दिया हो कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद रहेगा, लेकिन अमेरिका इस बात को मानने को तैयार नहीं है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सीधे-सीधे ईरान के दावों को खारिज कर दिया है।
उन्होंने अपने ‘X’ (पहले ट्विटर) हैंडल पर साफ-साफ लिखा है कि, "हॉर्मुज स्ट्रेट उन सभी जहाजों के लिए खुला है जो कानूनी तौर पर अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरना चाहते हैं।" इसके साथ ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ये भी कहा कि वो नेविगेशन की आज़ादी सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
मतलब, एक तरफ ईरान बंद करने की धमकी दे रहा है और दूसरी तरफ अमेरिका उसे खुला रखने पर अड़ा हुआ है।
यूएस सेंट्रल कमांड ने ये भी जानकारी दी है कि उन्होंने रविवार शाम 5 बजे (ईस्टर्न टाइम) पर हमलों का एक नया दौर शुरू किया है। इन हमलों का मकसद उन ‘कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराना’ था, जो स्ट्रेट में हुए थे।
सीधी सी बात है, अमेरिका ईरान को इस मामले में बख्शने के मूड में नहीं दिख रहा है।
क्या पहले भी सुलह की कोशिशें हुई थीं?
ऐसा नहीं है कि अमेरिका और ईरान के बीच ये पहली बार तनातनी हुई है। पिछले महीने फ्रांस में G7 समिट के दौरान, अमेरिका और ईरान दोनों ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर साइन किए थे।
इस MoU में युद्ध खत्म करने और स्ट्रेट से कमर्शियल जहाजों के सुरक्षित रास्ते को पक्का करने जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल थे। तब लगा था कि शायद हालात सुधरेंगे, लेकिन ताजा हमलों ने उन सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
अब तो लग रहा है कि जो फायदे युद्ध खत्म होने के बाद हुए थे, वो भी गंवा दिए गए हैं और कच्चे तेल की कीमतें फिर से बढ़ने लगी हैं।
अंतर्राष्ट्रीय एनर्जी एजेंसी (IEA) ने भी इस हालिया भड़कने पर चिंता जताई है। उनके बयान के मुताबिक, इससे इस साल के आखिर में खत्म हुए तेल के भंडार को फिर से बनाने की कोशिशों पर बुरा असर पड़ने का खतरा है।
यानी, अगर तनाव ऐसे ही जारी रहा तो भविष्य में तेल की सप्लाई और कीमतों को लेकर बड़ी मुश्किल आ सकती है।
जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर (JMIC) की रिपोर्ट भी कुछ अच्छी नहीं है। रविवार को स्ट्रेट से लगभग कोई ट्रैफिक नहीं था, सिर्फ दो तेल प्रोडक्ट टैंकर ही चोकपॉइंट के पास आते देखे गए।
हालांकि, JMIC ने यह भी बताया है कि ओमान द्वारा कोऑर्डिनेट किया गया दक्षिणी रूट अभी भी उपलब्ध है। कुल मिलाकर, अभी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच यह घमासान किस मोड़ पर जाकर खत्म होता है।






































