बाज़ार डेस्क: सुबह-सुबह की चाय की चुस्की के साथ अखबार पलटने वालों से लेकर मोबाइल पर मार्केट अपडेट देखने वालों तक, एक बात तो पक्की है कि सबकी निगाहें आज भारतीय शेयर बाजार पर टिकी होंगी। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से जो वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव थोड़ा शांत लग रहा था, वो एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिसका सीधा असर ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर पड़ने की आशंका है। इसका नतीजा ये हुआ कि कच्चे तेल की कीमतें अचानक उछल गईं और दुनिया भर के बाजारों में निवेशक अब ‘रिस्क लेने’ से बच रहे हैं। ऐसे में सवाल ये है कि क्या आज सोमवार, 13 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार में बुल (तेजी) की पकड़ बनेगी या बेयर (गिरावट) हावी रहेगा?
बाजार के शुरुआती संकेत तो कुछ और ही कहानी कह रहे हैं। हफ्ते के पहले दिन भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स, सेंसेक्स और निफ्टी, गिरावट के साथ खुल सकते हैं।
इसका सीधा संकेत हमें गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) से मिल रहा है। सुबह करीब 8:20 बजे गिफ्ट निफ्टी 24,024 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था, जो लगभग 210.50 पॉइंट्स की बड़ी गिरावट दिखा रहा था।
मतलब साफ है कि निफ्टी 50 शुक्रवार के 24,206.90 के बंद स्तर से काफी नीचे खुलने वाला है।
आखिर क्यों सहमा हुआ है बाजार?
बाजार के इस कमजोर रुख की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है। जब भी ऐसे बड़े देशों के बीच कुछ होता है, तो कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ जाती है।
इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है और वो तेजी से बढ़ जाती हैं। जब तेल महंगा होता है, तो कंपनियों की लागत बढ़ती है, महंगाई का डर बढ़ता है और कुल मिलाकर निवेशकों का सेंटिमेंट खराब हो जाता है।
ऐसे में वे सुरक्षित निवेश की तरफ भागते हैं और इक्विटी जैसे 'जोखिम भरे' एसेट्स से दूरी बना लेते हैं।
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने इस बारे में बात करते हुए बताया कि, “भारतीय इक्विटी मार्केट के सावधानी के साथ खुलने की उम्मीद है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच नए सैन्य हमलों के बाद भू-राजनीतिक टेंशन फिर से बढ़ गई है। इससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं और फाइनेंशियल मार्केट में रिस्क से बचने की सोच बढ़ गई है।
” उनकी बात का सीधा मतलब ये है कि निवेशक फिलहाल कोई बड़ा दांव लगाने से बचेंगे और बाजार में शुरुआती दबाव देखने को मिलेगा।
क्या पिछले हफ्ते अच्छी थी भारतीय बाजारों की चाल?
दिलचस्प बात ये है कि यह कमजोर संकेत तब आया है, जब पिछले हफ्ते भारतीय इक्विटी बाजार ने काफी मजबूती के साथ क्लोजिंग दी थी। शुक्रवार को सेंसेक्स 827.6 पॉइंट्स या 1.08 प्रतिशत बढ़कर 77,569.4 पर बंद हुआ था।
वहीं, निफ्टी भी 244.1 पॉइंट्स या 1.02 प्रतिशत चढ़कर 24,206.9 पर पहुंच गया था। इस मजबूती के बाद अब ग्लोबल खबरों ने सारा खेल पलट दिया है और बाजार पर शुरुआती दबाव बना हुआ है।
निफ्टी के लिए कौन से लेवल हैं सबसे अहम?
अब बात करते हैं कि आज निफ्टी 50 का आउटलुक कैसा रह सकता है और निवेशकों को किन लेवल्स पर ध्यान देना चाहिए। रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, अजीत मिश्रा ने निफ्टी के बारे में अपनी राय दी।
उन्होंने कहा कि, “निफ्टी 50 ने 23,800 के सपोर्ट ज़ोन को बचाने के बाद तेजी से वापसी की है और एक बार फिर 24,150 के आसपास 100 DEMA (डेली एक्सपोनेनशियल मूविंग एवरेज) मार्क को वापस पा लिया है। यह निचले लेवल्स पर खरीदारी में नई दिलचस्पी का संकेत देता है।
”
मिश्रा आगे बताते हैं कि, “अगर निफ्टी 24,150 जोन से ऊपर लगातार बना रहता है, तो यह 24,400–24,600 रीजन की ओर बढ़ने का रास्ता बना सकता है।” मतलब साफ है कि 24,150 का स्तर निफ्टी के लिए एक अहम 'बॉर्डर लाइन' का काम करेगा।
अगर बाजार में रिकवरी आती है और निफ्टी इस स्तर के ऊपर टिकता है, तो आगे और तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, नीचे की तरफ, 24,000 का मार्क एक तुरंत सपोर्ट का काम करेगा।
इसके बाद अगला मजबूत सपोर्ट 23,800 के ज़ोन में मिलेगा। तो, इन लेवल्स पर नजर बनाए रखना बहुत जरूरी है।
बैंक निफ्टी में क्या है खास?
अब आते हैं बैंक निफ्टी पर, जो भारतीय बाजार में एक बड़ा और अहम सेक्टर है। एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का मानना है कि बैंक निफ्टी ने 58,000 के 'साइकोलॉजिकल लेवल' को वापस पा लिया है।
'साइकोलॉजिकल लेवल' का मतलब होता है एक ऐसा आंकड़ा, जो भले ही तकनीकी तौर पर बहुत बड़ा रेजिस्टेंस या सपोर्ट न हो, लेकिन निवेशक और ट्रेडर उसे एक अहम मानसिक सीमा मानते हैं।
इस स्तर को वापस पाना बैंक निफ्टी के लिए एक पॉजिटिव संकेत है। पोनमुडी आर के अनुसार, “58,000 के साइकोलॉजिकल लेवल को वापस पाने के बाद बैंक निफ्टी में एक कंसॉलिडेशन (मजबूती के साथ एक दायरे में बने रहना) देखने को मिल सकता है, जो आगे चलकर ऊपर की चाल का आधार बन सकता है।
” कुल मिलाकर, ग्लोबल तनाव के बावजूद, भारतीय बाजार में एक्सपर्ट्स अभी भी कुछ अहम लेवल्स पर मजबूती देख रहे हैं, लेकिन शुरुआती घंटों में सावधानी बरतना ही समझदारी होगी।




































