मधुबनी: बिहार का मधुबनी जिला, जिसे अपनी कला, संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है, एक बार फिर अपने गौरवशाली इतिहास से जुड़ा। सोमवार की शाम, रहिका प्रखंड के सनौर गांव में एक ऐसा ही ऐतिहासिक पल आया, जब सदियों से लोकगाथाओं में जिंदा रहने वाले राजा सल्हेश की नई प्रतिमा का अनावरण किया गया और एक भव्य मंदिर का भी विधिवत उद्घाटन हुआ। गांव में जश्न का माहौल था। ढोल-नगाड़ों की थाप और जयघोषों के बीच, बिहार सरकार के गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार पासवान ने इस विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की।
शाम के करीब पांच बजे का वक्त था। सनौर गांव की गलियां और मंदिर परिसर श्रद्धालुओं और ग्रामीणों से खचाखच भरा हुआ था।
हर चेहरे पर एक अलग चमक और आंखों में एक उम्मीद थी। राजा सल्हेश, जिन्हें मिथिलांचल में न्याय, शौर्य और सामाजिक समरसता के प्रतीक के तौर पर पूजा जाता है, उनकी प्रतिमा स्थापित होने जा रही थी।
यह सिर्फ एक पत्थर की मूर्ति नहीं, बल्कि सदियों की आस्था और पहचान का प्रतीक थी। कार्यक्रम का इंतजार बेसब्री से किया जा रहा था।
मंत्री का भव्य स्वागत और मिथिला की अनूठी परंपरा
जैसे ही मंत्री संजय कुमार पासवान कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, उनका स्वागत मिथिला की समृद्ध परंपरा के अनुसार किया गया। स्थानीय लोगों और आयोजकों ने उन्हें बड़े सम्मान के साथ अंगवस्त्र, पुष्पमाला और सम्मान चिह्न भेंट किया।
यह स्वागत सिर्फ एक मंत्री का नहीं, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक गरिमा और आपसी सौहार्द का प्रतीक था। भीड़ में से जयघोष गूंज रहे थे, जिससे पूरे वातावरण में एक अद्भुत ऊर्जा का संचार हो गया।
मंत्री ने सभी का अभिवादन स्वीकार किया और इस भव्य स्वागत के लिए आभार जताया। उनका चेहरा भी इस पल की खुशी को दर्शा रहा था, जब वह लोक आस्था से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम का हिस्सा बनने पहुंचे थे।
इस अवसर पर सनौर पंचायत के मुखिया धर्मेंद्र कुमार पासवान, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मधुबनी जिला अध्यक्ष अनुपम राजा समेत पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद थे। सभी ने इस पहल को सराहा, जो राजा सल्हेश की लोकपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक अहम कदम था।
उनका मानना था कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ पाती है।
नव-निर्मित मंदिर का उद्घाटन और प्रतिमा अनावरण
स्वागत समारोह के बाद, कार्यक्रम अपने मुख्य पड़ाव पर पहुंचा। मंत्री संजय कुमार पासवान ने सबसे पहले नव-निर्मित मंदिर का फीता काटकर विधिवत उद्घाटन किया।
मंदिर के अंदर रोशनी और फूलों से सजावट की गई थी, जो उसकी दिव्यता को और बढ़ा रही थी। इसके तुरंत बाद, राजा सल्हेश की भव्य प्रतिमा से पर्दा हटाया गया।
जैसे ही प्रतिमा सामने आई, पूरा परिसर 'राजा सल्हेश महाराज की जय' के नारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर और श्रद्धापूर्वक सिर झुकाकर अपने आराध्य का अभिनंदन किया।
इस शुभ अवसर पर, मंत्री पासवान ने स्वयं मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने विधि-विधान से पूजा कर क्षेत्रवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
उन्होंने कहा कि यह मंदिर और प्रतिमा केवल ईंट-पत्थर से बनी संरचना नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बनेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह स्थल आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास और मूल्यों से प्रेरणा लेने का मौका देगा।
प्रसाद वितरण के साथ ही यह धार्मिक क्रिया संपन्न हुई, जिससे उपस्थित जनसमूह में एक संतोष और प्रसन्नता का भाव देखा गया।
राजा सल्हेश: मिथिला की लोकआस्था और गौरव के प्रतीक
कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री संजय कुमार पासवान ने राजा सल्हेश के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि राजा सल्हेश सिर्फ एक ऐतिहासिक व्यक्ति नहीं, बल्कि मिथिला की लोकआस्था, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव के एक जीवंत प्रतीक हैं।
उन्होंने बताया कि सदियों से मिथिलांचल के जन-जन में उनकी गाथाएं रची-बसी हैं, जो त्याग, बलिदान और न्याय के मूल्यों को दर्शाती हैं। मंत्री ने जोर देकर कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का निर्माण समाज को अपनी समृद्ध विरासत से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।
यह हमें याद दिलाता है कि हमारे पूर्वजों ने किन मूल्यों को जिया और कैसे वे आज भी हमारे जीवन में प्रासंगिक हैं।
मंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। उनका मानना था कि किसी भी समाज की पहचान उसकी संस्कृति और विरासत से होती है, और उन्हें संजोकर रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आपसी भाईचारे, सौहार्द और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। उनका संदेश स्पष्ट था: विरासत को संजोएं, एकता को मजबूत करें और मिलकर एक बेहतर समाज का निर्माण करें।
क्षेत्र के विकास का आश्वासन और भविष्य की उम्मीदें
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री पासवान ने स्थानीय लोगों द्वारा दिए गए स्नेह और सम्मान के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने दोहराया कि क्षेत्र के विकास के लिए सरकार हरसंभव सहयोग देगी।
उन्होंने कहा कि यह मंदिर और प्रतिमा स्थल केवल एक धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि एक ऐसा स्थान भी बनेगा जो स्थानीय पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा, जिससे क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि भी आएगी। यह आश्वासन ग्रामीणों के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया।
पूरा कार्यक्रम श्रद्धालुओं के जयघोष, मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण के साथ खुशी-खुशी संपन्न हुआ। सूर्य अस्त हो चुका था, लेकिन सनौर गांव में राजा सल्हेश की लोककथाओं और नई उम्मीदों का सूरज चमक रहा था।
यह आयोजन सिर्फ एक मंदिर का उद्घाटन नहीं था, बल्कि मिथिला की आत्मा का एक बार फिर जागृत होना था, जहां लोक आस्था और सरकारी प्रयास मिलकर एक नई गाथा लिख रहे थे।

