मधुबनी: शनिवार की शाम थी। बिहार के मधुबनी जिले में एक आम दिन की तरह ही सब कुछ चल रहा था। अपने घर लक्ष्मीपुर वार्ड संख्या-13 की ओर लौट रहे 74 साल के गरभू मंडल ने शायद सोचा भी नहीं होगा कि ये उनकी जिंदगी की आखिरी शाम होगी। अपनी साइकिल पर फूल और सब्ज़ियों के पौधे (बिचड़ा) बेचकर आ रहे गरभू मंडल को मनसापुर चौक के पास एक तेज रफ्तार ट्रक ने ऐसे रौंदा कि अस्पताल पहुंचते-पहुंचते उनकी सांसों की डोर टूट गई। इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार से उनके मुखिया को छीन लिया और घर में मातम पसर गया।
गरभू मंडल जैसे मेहनतकश लोग ही हमारे समाज की बुनियाद होते हैं। 74 साल की उम्र में भी वो सिर्फ आराम करने के बजाय, अपने परिवार के लिए दो वक़्त की रोटी जुटाने के लिए दिन-रात मेहनत करते थे।
उनका काम था फूलों और सब्जियों के छोटे-छोटे पौधे तैयार करना और उन्हें बाजार में बेचकर घर का खर्च चलाना। पोते सचिन मंडल ने बताया कि गरभू मंडल हर शाम की तरह ही शनिवार को भी बाजार गए थे, ताकि कुछ पैसे कमाकर ला सकें।
शाम ढल रही थी और वो अपनी साइकिल पर घर की ओर बढ़ रहे थे, उम्मीद थी कि घर जाकर परिवार के साथ रात का खाना खाएंगे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
मधुबनी के लौकही थाना क्षेत्र में पड़ने वाले मनसापुर चौक पर जब वो पहुंचे, तो पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि गरभू मंडल अपनी साइकिल समेत सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से तुरंत फरार हो गया, उसे रोकने वाला कोई नहीं था। चारों ओर चीख-पुकार मच गई और लोग मदद के लिए दौड़े।
दर्दनाक हादसा और अस्पताल का सफर
स्थानीय लोग तुरंत गरभू मंडल की मदद के लिए आगे आए। उन्होंने देखा कि बुजुर्ग बुरी तरह घायल थे और खून से लथपथ थे।
बिना देर किए, उन्हें नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया। डॉक्टरों ने वहां प्राथमिक उपचार तो किया, लेकिन उनकी गंभीर हालत को देखते हुए तुरंत दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (DMCH) रेफर कर दिया।
यह उम्मीद थी कि DMCH की बेहतर सुविधाओं से शायद उनकी जान बच जाए। परिवार के लोग और रिश्तेदार भी आनन-फानन में दरभंगा की ओर भागे, एक उम्मीद की किरण के साथ।
लेकिन अस्पताल पहुंचने तक बहुत देर हो चुकी थी। DMCH में डॉक्टरों ने तमाम कोशिशों के बाद भी गरभू मंडल को बचा नहीं पाए और उन्हें मृत घोषित कर दिया।
यह खबर सुनकर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस बुजुर्ग ने अपनी पूरी जिंदगी परिवार को पालने में खपा दी, उसकी मौत सड़क हादसे में हो गई, वो भी ऐसे समय जब वो अपने घर लौट रहे थे।
पोते सचिन मंडल ने बताया कि उनके दादाजी पूरे परिवार का पेट पालने के लिए फूल और सब्जी के पौधे बेचते थे। उनके जाने से अब परिवार के सामने भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
दुर्घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस भी हरकत में आई। बेंता थानाध्यक्ष विनय कुमार मिश्रा ने इस घटना की पुष्टि की।
उन्होंने बताया कि गरभू मंडल को डीएमसीएच लाया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत शव का पोस्टमार्टम कराया और फिर शव को उनके परिजनों को सौंप दिया गया, ताकि वे अंतिम संस्कार कर सकें।
अब लौकही पुलिस इस पूरे मामले की छानबीन में जुट गई है। उनका सबसे पहला काम उस फरार ट्रक चालक की पहचान करना और उसे गिरफ्तार करना है, जिसने एक बुजुर्ग की जान ले ली और मौके से भाग निकला।
ऐसे मामलों में अक्सर देखा गया है कि लापरवाह ड्राइवर जल्दबाजी में फरार हो जाते हैं, लेकिन पुलिस ऐसे अपराधियों को पकड़ने के लिए पूरी कोशिश करती है। गरभू मंडल के परिवार को न्याय दिलाने और ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है।
पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही होगी और प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ कर रही होगी, ताकि ट्रक और उसके चालक के बारे में कोई सुराग मिल सके।
यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती है। तेज रफ्तार और लापरवाही न जाने कितनी जिंदगियों को हर दिन असमय छीन लेती है।
गरभू मंडल की मौत सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक परिवार का दर्द है, जिसे अब इस सदमे से उबरना होगा और आगे की जिंदगी का सामना करना होगा, वो भी अपने मुखिया के बिना।




































