औरंगाबाद: ज़रा सोचिए, एक अस्पताल का ICU. वो जगह, जहां ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहे मरीज़ों को हर हाल में सुकून और सबसे बेहतर इलाज मिलना चाहिए. लेकिन बिहार के औरंगाबाद सदर अस्पताल में फिलहाल ऐसा नहीं है. यहां के 'आधुनिक' कहे जाने वाले ICU में पिछले 24 घंटे से AC बंद पड़ा है और अगले चार दिन तक इसके चालू होने की कोई उम्मीद भी नहीं है. यानी वो मरीज़, जिन्हें ज़रा सी भी गर्मी या उमस से दिक्कत हो सकती है, उन्हें इस तपती गर्मी में इलाज झेलना पड़ रहा है. ये सिर्फ़ गर्मी नहीं, ये उन गंभीर मरीज़ों के लिए आफत है जिनकी सांसें भी मशीनों के भरोसे चल रही हैं.
कहने को तो औरंगाबाद सदर अस्पताल का नया भवन तमाम आधुनिक सुविधाओं से लैस होने का दावा करता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. ICU जैसे संवेदनशील वार्ड में AC का बंद हो जाना सीधे-सीधे मरीज़ों की जान से खिलवाड़ है.
बाहर अगर थोड़ी देर गर्मी लगे तो हम घर के अंदर AC या कूलर ढूंढते हैं, लेकिन यहां तो अंदर ही 'बाहर' जैसी स्थिति बन गई है. मरीज़ और उनके परिजन इस भीषण उमस और गर्मी से बेहाल हैं.
सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने महत्वपूर्ण वार्ड में ऐसी लापरवाही कैसे बरती जा सकती है.
आईसीयू में तपिश और मरीजों की तड़प
इस संकट के सीधे भुक्तभोगी वे मरीज़ हैं जो पहले से ही बीमारी की मार झेल रहे हैं. इन्हीं में से एक हैं वरुण कुमार, जिनके पिता औरंगाबाद सदर अस्पताल के ICU में भर्ती हैं.
वरुण ने बताया कि कल रात उनके पिता की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें सदर अस्पताल लाया गया और डॉक्टरों ने ICU में भर्ती करने की सलाह दी. सब ठीक ही चल रहा था, लेकिन कुछ ही देर बाद AC ने काम करना बंद कर दिया.
वरुण कहते हैं, “AC बंद होने के बाद तो जैसे मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा. उमस भरी गर्मी में मेरे पिताजी का हाल बेहाल हो गया.
हम जैसे-तैसे उन्हें पंखे और हाथों से हवा देकर थोड़ी राहत देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ICU के अंदर की स्थिति इतनी गंभीर है कि वह नाकाफी है.” वरुण के चेहरे पर अपने पिता की हालत देखकर उपजी चिंता साफ झलक रही थी.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, ICU जैसे वार्ड में तापमान नियंत्रित रहना बेहद ज़रूरी होता है. यह सिर्फ मरीज़ों को आराम देने के लिए नहीं, बल्कि उनके इलाज का एक अहम हिस्सा है.
अनियंत्रित तापमान और उमस से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है और कई तरह की अन्य जटिलताएं भी पैदा हो सकती हैं, जो मरीज़ की स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं. ऐसे में जब AC अगले चार दिन तक बंद रहने की बात कही जा रही है, तो यह गंभीर चिंता का विषय बन जाता है.
तकनीकी खराबी की लंबी कहानी और इंतजार
अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ICU में लगे AC के स्टेबलाइजर में तकनीकी खराबी आ गई है. जैसे ही यह दिक्कत सामने आई, स्थानीय स्तर पर इलेक्ट्रिशियन को बुलाकर जांच कराई गई.
लेकिन पता चला कि इस स्टेबलाइजर की मरम्मत के लिए जो ज़रूरी पुर्जा चाहिए, वह औरंगाबाद में उपलब्ध नहीं है. अब सोचिए, एक मामूली पुर्जे की कमी पूरे ICU की व्यवस्था ठप कर सकती है.
इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने संबंधित AC कंपनी को सूचना भेज दी है. अब कंपनी के तकनीशियन के आने और आवश्यक उपकरण मिलने के बाद ही AC चालू हो सकेगा.
इस पूरी प्रक्रिया में करीब 4 दिन का समय लग सकता है. इन चार दिनों तक ICU में भर्ती मरीज़ों को गर्मी और उमस से जूझना होगा, जो उनके पहले से कमज़ोर शरीर के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है.
यह स्थिति न सिर्फ मरीज़ों को शारीरिक कष्ट दे रही है, बल्कि उनके परिजनों को भी मानसिक रूप से परेशान कर रही है. उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे अपने बीमार परिजनों के लिए क्या करें और कब तक उन्हें इस तपिश में रहना पड़ेगा.
पहले भी सामने आ चुकी हैं खामियां
यह पहला मौका नहीं है जब औरंगाबाद सदर अस्पताल में अव्यवस्था और तकनीकी खामियों की शिकायतें सामने आई हैं. पहले भी इस अस्पताल परिसर में कई जगहों पर छत से पानी टपकने, उपकरणों के रखरखाव में लापरवाही और अन्य तकनीकी समस्याओं की खबरें आती रही हैं.
ये घटनाएं बताती हैं कि अस्पताल में सिर्फ सुविधाओं का होना काफी नहीं, बल्कि उनका नियमित रखरखाव और समय पर मरम्मत भी उतनी ही ज़रूरी है. एक आधुनिक भवन बनाने से ही काम नहीं चलता, बल्कि उसकी एक-एक चीज़ का ध्यान रखना पड़ता है ताकि ज़रूरत पड़ने पर वह सही से काम कर सके.
लेकिन अस्पताल में बार-बार ऐसी खामियां सामने आना, प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है.
अस्पताल प्रबंधन का क्या है कहना?
इस पूरे मामले पर अस्पताल प्रबंधक प्रफुल्ल कांत निराला ने अपनी बात रखी है. उन्होंने बताया कि ICU के AC स्टेबलाइजर में तकनीकी खराबी आई है.
उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि स्थानीय स्तर पर मरम्मत का प्रयास किया गया था, लेकिन ज़रूरी सामान उपलब्ध न होने के कारण इसमें देरी हुई है. प्रबंधक निराला ने बताया कि संबंधित कंपनी को सूचना दे दी गई है और जल्द से जल्द AC चालू कराने का प्रयास किया जा रहा है.
उन्होंने यह भी ज़ोर देकर कहा कि अस्पताल में जहां-जहां कमियां हैं, उन्हें दूर करके बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रबंधन गंभीर और सजग है. हालांकि, उनका यह आश्वासन मरीज़ों की तत्काल परेशानी को कम नहीं कर पा रहा है जो अभी भी गर्मी और उमस में इलाज का इंतज़ार कर रहे हैं.

