कैमूर: बिहार के कैमूर जिले से एक ऐसी खबर आई है, जो ज़िंदगी की अनिश्चितता और सड़क हादसों के भयानक सच को सामने लाती है। रामनगर से अपने गांव भेरिया लौट रहा एक नौजवान, रोहित सिंह, घर पहुंचने से पहले ही काल के क्रूर चंगुल में फंस गया। एक बेकाबू ट्रक ने उसे ऐसी टक्कर मारी कि मौके पर ही उसकी सांसें थम गईं। यह घटना कर्मनाशा से खजुरा की ओर नौबतपुर से आगे हुई, जहां सड़क पर मौत का तांडव देखने को मिला।
रोहित रामनगर से भेरिया अपने घर जा रहा था। रोज़मर्रा की तरह ही वह अपना काम निपटाकर घर वापसी के रास्ते पर था।
कर्मनाशा से खजुरा की ओर, नौबतपुर के पास, सब कुछ सामान्य लग रहा था। लेकिन तभी, पीछे से एक अनियंत्रित ट्रक यमदूत बनकर आया।
उसने रोहित के वाहन को ऐसी भीषण टक्कर मारी कि कुछ सोचने-समझने का मौका भी नहीं मिला। टक्कर इतनी ज़बरदस्त थी कि रोहित सीधे ड्राइवर की तरफ गिरे और उन्हें इतनी गहरी चोटें आईं कि बचने की कोई गुंजाइश नहीं बची।
घटना स्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि रोहित की मौत लगभग मौके पर ही हो चुकी थी।
सड़क पर हुए इस भयानक मंज़र को देखकर आस-पास के लोग सन्न रह गए। गाड़ियों की रफ़्तार थम गई और चारों ओर एक चीख-पुकार और अफरातफरी का माहौल बन गया।
स्थानीय लोगों ने फौरन रोहित के परिजनों को खबर की। ख़बर मिलते ही घर में कोहराम मच गया।
परिजनों के पैरों तले ज़मीन खिसक गई, वे बदहवास हालत में रामनगर से घटनास्थल तक पहुंचने के लिए भागे। लेकिन जब वे पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
उनका लाडला रोहित अब इस दुनिया में नहीं था, और उनके सामने सिर्फ़ उसकी बेजान देह पड़ी थी।
हादसे का दर्दनाक मंज़र और परिजनों का इंतजार
रोहित अविवाहित था। उसके परिवार के लिए यह सदमा असहनीय था।
एक जवान बेटे का यूँ अचानक चले जाना, किसी भी परिवार के लिए एक ऐसा घाव होता है, जो शायद कभी भरता नहीं। मृतक के रिश्तेदार विजय पांडे, जो खुद इस पूरे घटनाक्रम के गवाह बने, बताते हुए भावुक हो गए।
उन्होंने बताया कि किस तरह से रोहित अपने काम से लौट रहा था और कैसे एक पल में सब कुछ खत्म हो गया। इस उम्र में घर के चिराग को खोने का दर्द क्या होता है, ये तो वही परिवार जानता है, जिसने ऐसे हादसे झेले हों।
गांव में मातम पसरा हुआ था, हर आंख नम थी और हर चेहरा सदमे में था।
मौके पर पहुंची भीड़ में सन्नाटा पसरा हुआ था। लोग आपस में फुसफुसा रहे थे कि कैसे रोज़ाना ऐसे हादसे होते हैं और कई मासूम जानें चली जाती हैं।
कभी तेज़ रफ़्तार, कभी लापरवाही, तो कभी सड़कों की बदहाली, ये सब मिलकर मौत का रास्ता बनाते हैं। हर दुर्घटना के बाद कुछ दिन तक बातें होती हैं, लेकिन फिर सब कुछ सामान्य हो जाता है, जब तक कोई और नया हादसा नहीं हो जाता।
लेकिन इस बार शिकार हुआ एक जवान लड़का, जिसके लिए अभी तो पूरी ज़िंदगी बाकी थी। उसका परिवार अभी भी इस सच को स्वीकार नहीं पा रहा था कि रोहित अब कभी वापस नहीं आएगा।
सरकार से मुआवज़े की मांग और आगे का रास्ता
इस दुखद हादसे के बाद, रोहित के नाना विजय पांडे और गांव के अन्य लोग अब प्रशासन से न्याय और सहयोग की गुहार लगा रहे हैं। उनकी मुख्य मांग है कि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द सरकार की ओर से उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
उनका कहना है कि रोहित परिवार का सहारा था और उसके जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर में कमाने वाला एक अहम सदस्य चला गया है, जिससे परिवार के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।
ऐसे में सरकारी मदद ही उन्हें इस मुश्किल घड़ी से निकलने में थोड़ी राहत दे सकती है, जिससे वे कम से कम अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर सकें।
विजय पांडे ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "हम चाहते हैं कि सरकार हमारे परिवार की सुध ले। हमारा बच्चा चला गया, अब उसकी भरपाई तो कोई नहीं कर सकता, लेकिन कम से कम आर्थिक सहायता से हम इस सदमे से उबरने की कोशिश कर सकते हैं।
ऐसे हादसों पर लगाम लगाने के लिए भी सख्त कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि किसी और परिवार को यह दिन न देखना पड़े।" ग्रामीणों ने भी इस मांग का पुरज़ोर समर्थन किया है और स्थानीय प्रशासन से इस मामले में संवेदनशीलता दिखाने और त्वरित कार्रवाई करने की अपील की है।
उनका कहना है कि ऐसे मामलों में देर से मिली सहायता का कोई अर्थ नहीं रह जाता है।
सड़क सुरक्षा को लेकर आए दिन सवाल उठते रहते हैं। खासकर हाईवे और मुख्य सड़कों पर, जहां भारी वाहनों की आवाजाही ज्यादा होती है।
अक्सर देखा जाता है कि ट्रक चालक या तो नशे में होते हैं या लापरवाही से गाड़ी चलाते हैं। कई बार ट्रकों की फिटनेस और ओवरलोडिंग की समस्या भी इन हादसों का कारण बनती है।
इन अनियंत्रित ट्रकों की वजह से कई घरों के चिराग बुझ जाते हैं और कई परिवार बिखर जाते हैं। यह ज़रूरी है कि प्रशासन ऐसे मामलों में गंभीरता दिखाए और न सिर्फ पीड़ित परिवारों को मुआवज़ा दे, बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस रणनीति भी बनाए।
नियमों का सख्ती से पालन करवाया जाए और लापरवाह चालकों पर कड़ी कार्रवाई हो, तभी ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाई जा सकती है।
रोहित की मौत ने न सिर्फ उसके परिवार को बल्कि पूरे गांव को हिलाकर रख दिया है। एक युवा ज़िंदगी का यूँ अचानक खत्म हो जाना, हर किसी के मन में भय और दुख पैदा करता है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी जल्दी और क्या कार्रवाई करता है, और क्या रोहित के बेसहारा परिवार को न्याय और उचित सहायता मिल पाती है। इस दुखद घड़ी में, सभी की निगाहें सरकार और स्थानीय प्रशासन पर टिकी हैं कि वे कितनी संवेदनशीलता और तेज़ी से इस मामले को संभालते हैं।

