कैमूर: बिहार के कैमूर जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ चैनपुर थाना इलाके के बौरई गांव में आसमान से गिरी बिजली ने एक हंसते-खेलते घर को मातम में बदल दिया है। ज़रा सोचिए, रोजमर्रा के काम निपटाने निकली एक महिला अपनी भैंसों को चराने के लिए गांव से कुछ दूर बधार में गई थी। धूप खिली थी या हल्की बदली, ये तो ठीक-ठीक पता नहीं, लेकिन मौसम का मिजाज ऐसा पलटा कि चंद मिनटों में सब कुछ तहस-नहस हो गया। तेज हवाएं चलीं, काले बादल छाए और फिर बादलों की गड़गड़ाहट के साथ ऐसी बिजली गिरी कि एक पल में जिंदगी का सफर खत्म हो गया।
ये दर्दनाक घटना चैनपुर थाना क्षेत्र के बौरई गांव की है। यहां की रहने वाली 53 साल की मोतिया देवी, जो लालू बिंद की पत्नी थीं, हर दिन की तरह अपनी भैंसों को लेकर गांव के पास खेत-खलिहान वाले इलाके में गई थीं।
अक्सर ग्रामीण महिलाएं अपने पशुओं को चराने के लिए ऐसे खुले मैदानों में ले जाती हैं। ये उनका रोज़ का काम था, जिससे घर-परिवार चलता था।
मोतिया देवी भी शायद यही सोचकर निकली होंगी कि शाम तक पशुओं को चराकर वापस आ जाएंगी, घर के बाकी काम देखेंगी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
घटना का पूरा ब्यौरा: एक पल में सब खत्म
जिस वक्त मोतिया देवी बधार में थीं, मौसम ने अचानक करवट ली। आसमान में तेजी से काले बादल छाने लगे।
दूर से आती बादलों की गर्जना धीरे-धीरे पास आने लगी। ग्रामीण इलाकों में ऐसा मौसम बदलना आम बात है, खासकर मानसून से पहले या मानसून के दौरान।
तेज आंधी ने अपनी दस्तक दी और उसके साथ ही शुरू हो गई मूसलाधार बारिश। मोतिया देवी ने शायद सुरक्षित जगह तलाशने की कोशिश की होगी।
उन्होंने सोचा होगा कि किसी पेड़ के नीचे या किसी ओट में खड़ी होकर बारिश थमने का इंतजार कर लें। लेकिन उन्हें कहां पता था कि मौत बिजली बनकर उनके ही इंतज़ार में खड़ी है।
अभी मोतिया देवी संभल पातीं, या किसी पेड़ की छांव तक पहुंच पातीं, कि अचानक एक तेज गर्जना के साथ आसमानी बिजली सीधे उन पर आ गिरी। बिजली इतनी घातक थी कि मोतिया देवी को संभलने का मौका ही नहीं मिला।
वज्रपात की चपेट में आने से वह बुरी तरह झुलस गईं और वहीं मौके पर अचेत होकर गिर पड़ीं। जो महिला कुछ देर पहले अपनी भैंसों को चरा रही थी, हंसी-खुशी जीवन बिता रही थी, वो एक पल में ही धरती पर निष्प्राण पड़ी थी।
आसपास के लोगों की मदद और अस्पताल तक का सफर
बिजली गिरने की तेज आवाज और फिर बारिश के शांत होने पर आसपास के कुछ लोगों ने मोतिया देवी को ज़मीन पर बेसुध पड़ा देखा। वे भागे-भागे उनके पास पहुंचे।
इस मंजर को देखकर उनके होश उड़ गए। तुरंत ही मोतिया देवी के परिजनों को सूचना दी गई।
परिवार के लोग और गांव के अन्य लोग दौड़ते-भागते घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि मोतिया देवी की सांसें शायद थम चुकी थीं, लेकिन एक उम्मीद की किरण लिए वे उन्हें तत्काल चैनपुर के सरकारी अस्पताल ले गए।
हर कोई यही दुआ कर रहा था कि किसी तरह मोतिया देवी की जान बच जाए।
अस्पताल में डॉक्टरों ने तुरंत मोतिया देवी की जांच की। उन्होंने तमाम कोशिशें कीं, लेकिन होनी को कौन टाल सकता था।
डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद मोतिया देवी को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल में मौजूद परिजनों के लिए यह खबर किसी वज्रपात से कम नहीं थी।
उनकी आंखों के सामने उनकी मां, उनकी पत्नी अब इस दुनिया में नहीं थीं। रोने-बिलखने की आवाज से पूरा अस्पताल परिसर गमगीन हो उठा।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया
मोतिया देवी के निधन की सूचना मिलते ही स्थानीय चैनपुर पुलिस भी सरकारी अस्पताल पहुंच गई। पुलिसकर्मियों ने पूरे मामले की जानकारी ली और अस्पताल के डॉक्टरों से बात की।
शव को कब्जे में लिया गया और कानूनी प्रक्रिया के तहत पंचनामा तैयार किया गया। यह एक महत्वपूर्ण कदम होता है, जिसमें घटना की परिस्थितियों और शव की स्थिति का विस्तृत विवरण दर्ज किया जाता है।
इसके बाद, मोतिया देवी के शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के सही कारणों का पता चल पाएगा और यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि बिजली गिरने से ही उनकी मौत हुई है या कोई अन्य कारण है।
मोतिया देवी के पति लालू बिंद ने इस दुखद घटना की पुष्टि की है। उनके अनुसार, यह पूरी तरह से एक प्राकृतिक आपदा थी, जिसमें उनकी पत्नी की जान चली गई।
लालू बिंद और उनका पूरा परिवार इस समय गहरे सदमे में है। गांव में भी मातम पसरा हुआ है, क्योंकि मोतिया देवी एक जानी-मानी ग्रामीण महिला थीं और उनके आकस्मिक निधन से सभी दुखी हैं।
अक्सर मानसून के मौसम में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, और यह एक बार फिर इस बात को याद दिलाती है कि प्रकृति के सामने इंसान कितना बेबस है। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में आकाशीय बिजली से बचाव के उपायों पर सोचने को मजबूर किया है, ताकि ऐसी दर्दनाक घटनाओं को भविष्य में रोका जा सके।

