आरा (भोजपुर): कहानी किसी फिल्म के क्लाइमेक्स जैसी है, जहां गम और गुस्सा एक साथ फूट पड़ा। जगह थी बिहार के भोजपुर जिले का बिलौटी गांव। मौका था हाल ही में विवादित परिस्थितियों में मारे गए भरत तिवारी के श्राद्धकर्म से ठीक एक दिन पहले का। माहौल गमगीन था, लेकिन तनाव ऐसा कि किसी भी पल चिंगारी भड़क सकती थी। इसी बीच बक्सर से बीजेपी विधायक आनंद मिश्रा और शाहपुर के बीजेपी विधायक राकेश ओझा भरत तिवारी के माता-पिता से मिलने पहुंचे। वे परिवार को ढांढस बंधा रहे थे, मदद का भरोसा दे रहे थे, तभी भीड़ में से एक शख्स ने मोर्चा संभाल लिया।
बातचीत चल ही रही थी कि शख्स ने जोर-जोर से ‘प्रशासन मुर्दाबाद’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। उसने जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल उठाए, आरोप लगाया कि कोई उनकी आवाज नहीं उठा रहा।
विधायक आनंद मिश्रा ने पहले खुद को बिलौटी गांव का भांजा बताया, भरत तिवारी के परिवार के दर्द को समझने की बात कही। लेकिन माहौल इतना गरमाया कि एक पल के लिए ऐसा लगा, जैसे विधायक और उस प्रदर्शनकारी के बीच की दूरी बस मिटने ही वाली है।
हंगामा और आरोपों की बौछार
विधायक आनंद मिश्रा और राकेश ओझा, भरत के पिता काशीनाथ तिवारी से बात कर रहे थे। तभी वो शख्स चिल्लाने लगा कि पुलिस और प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है, सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं।
उसने कहा, “प्रशासन को लगता है कि 10-15 दिन भीड़ रहेगी, फिर सब चले जाएंगे।” शख्स ने सीधे तौर पर पुलिस पर आरोप लगाया कि जब भरत आवाज उठा रहा था, तब तो वे एक्टिव थे, लेकिन अब जब उसका ‘एनकाउंटर’ हो चुका है, तो कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
उस शख्स की आवाज सुनते ही और भी लोग पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। भीड़ में से एक बुजुर्ग ने तो ये तक कह दिया कि भरत तिवारी तो प्रशासन की चोरी की पोल खोल रहा था।
माहौल तेजी से बिगड़ रहा था। शख्स यहीं नहीं रुका, उसने पास बैठे शाहपुर विधायक राकेश ओझा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि विधायक को 12 दिनों बाद भरत की याद आ रही है।
‘एनकाउंटर गलत है’ सुनकर भड़के विधायक
अचानक उस प्रदर्शनकारी ने विधायक आनंद मिश्रा और राकेश ओझा से कहा, “आप लोग बोलिए कि प्रशासन ने गलत किया है, ये एनकाउंटर गलत है!” बस यही बात थी, जिसने विधायक आनंद मिश्रा को भड़का दिया। उनका लहजा बदल गया, उन्होंने तल्ख आवाज में कहा, “हम लोगों को जो कहना था, बोल दिया है।
अगर गलत नहीं होता तो मैं यहां आया होता क्या?” विधायक की ये बात सुनकर भी शख्स पीछे हटने को तैयार नहीं था।
बातचीत तीखी होती जा रही थी। आनंद मिश्रा ने उससे पूछा, “आप कहां से आए हैं?” शख्स ने बेबाकी से जवाब दिया, “मैं यहां का रहने वाला नहीं हूं, यूपी से आया हूं।
” यूपी से आने की बात सुनते ही विधायक आनंद मिश्रा का पारा और चढ़ गया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “मैं समझ रहा हूं कि आप क्या कर रहे हैं, आप चुप रहिए!” एक तरह से ये सीधे-सीधे उस शख्स को चेतावनी थी कि वह माहौल को और खराब न करे।
भरत के पिता का दर्द और न्याय की गुहार
इन सब हंगामे के बीच, भरत के पिता काशीनाथ तिवारी की आंखों में बेटे को खोने का दर्द साफ दिख रहा था। उन्होंने विधायक आनंद मिश्रा से बात करते हुए दिल का बोझ हल्का किया।
काशीनाथ तिवारी ने साफ शब्दों में कहा कि वीडियो में सामने उनके बेटे के ‘एनकाउंटर’ के दोषी दिख रहे हैं, फिर भी उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? पिता ने मार्मिक अपील की, “हत्यारा सामने दिख रहा है, कार्रवाई क्यों नहीं हो रही!”
उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है जैसे कानून की आंखों पर पट्टी बंधी हुई है, इसलिए शायद उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। एक पिता की ये बेबसी और न्याय की पुकार वाकई दिल दहला देने वाली थी।
विधायक आनंद मिश्रा ने उनकी बात धैर्य से सुनी और उन्हें हर तरह की मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने स्थानीय विधायक राकेश ओझा की ओर इशारा करते हुए यह भी जताया कि वे सब मिलकर परिवार की मदद के लिए प्रतिबद्ध हैं।
बिलौटी गांव में उस दिन सिर्फ एक राजनीतिक गहमागहमी नहीं थी, बल्कि एक पिता का दर्द, एक समुदाय का गुस्सा और न्याय की तलाश साफ दिखाई दे रही थी।

