गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज जिले में जिंदगी की जद्दोजहद में लगा एक परिवार अचानक मौत के ऐसे झटके से टूट गया, जिसकी भरपाई नामुमकिन सी लगती है। बात भोरे थाना क्षेत्र के कोरेया गांव की है, जहां 34 साल के राजीव कुमार मांझी हर दिन की तरह अपने घर से काम पर निकले थे। मजदूरी, खासकर सेंट्रिंग का काम, एक ऐसा काम जिसमें हाथ और पसीने से छतें बनती हैं, लेकिन राजीव को क्या पता था कि जिस इमारत को वो खड़ा करने जा रहे हैं, वो उनकी अपनी उम्मीदों पर ही भारी पड़ जाएगी। ये सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक मेहनतकश इंसान की कहानी का दुखद अंत है, जिसने अपने पीछे पत्नी, बेटी और बेटे के लिए सिर्फ एक खालीपन छोड़ दिया है।
ये घटना महज़ एक आंकड़े से कहीं ज़्यादा है। राजीव कुमार मांझी अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे।
उनकी कमाई से ही घर का चूल्हा जलता था, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य के सपने बुने जाते थे। सोचिए ज़रा, जिस पिता ने अपनी 12 साल की बेटी और 10 साल के बेटे के लिए बेहतर ज़िंदगी के सपने देखे थे, एक पल में सब कुछ खत्म हो गया।
उनकी पत्नी किरण देवी के सिर से पति का साया ऐसे हटा है, जैसे आसमान से कोई वज्रपात हुआ हो। अब सवाल ये है कि इस परिवार का क्या होगा? कैसे जिएंगे वो बिना उस सहारे के, जिस पर उनकी पूरी ज़िंदगी टिकी थी?
घटना का पूरा मंज़र
कोरेया गांव में उस दिन भी आम दिनों की तरह ही रौनक थी। राजीव सुबह अपनी पत्नी और बच्चों को देखकर काम पर निकल पड़े थे।
उनका काम था सेंट्रिंग का, यानी भवन निर्माण में छत या बीम डालने से पहले लोहे के सांचों को लगाना। ये काम जितना शारीरिक मेहनत मांगता है, उतना ही सावधानी भी।
काम अपनी रफ़्तार पर था, लोग अपने-अपने हिस्से का काम कर रहे थे। राजीव भी पूरी लगन से काम में जुटे थे।
लेकिन किसे पता था कि एक अनदेखा खतरा बिजली के तार के रूप में उनकी घात लगाए बैठा है।
बताया जाता है कि काम करते-करते अचानक राजीव कुमार मांझी हाई वोल्टेज बिजली के तार के संपर्क में आ गए। शायद तार खुला था, या सुरक्षा के इंतज़ाम नाकाफी थे, या फिर बस एक पल की चूक.
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कारण जो भी रहा हो, परिणाम बेहद भयावह था। करंट का झटका इतना ज़बरदस्त था कि राजीव वहीं अचेत होकर गिर पड़े।
उनके शरीर काफ़ी हद तक झुलस गया था। आसपास काम कर रहे सहकर्मी और स्थानीय लोग उनकी चीख सुनकर दौड़े।
मंज़र दिल दहला देने वाला था। लोग तुरंत हरकत में आए, बिजली आपूर्ति बंद की गई और किसी तरह उन्हें तार से अलग किया गया।
बिना वक़्त गवाए, उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। हर कोई दुआ कर रहा था, उम्मीद लगाए बैठा था कि राजीव बच जाएंगे।
लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने जांच की और बताया कि राजीव अब इस दुनिया में नहीं रहे।
डॉक्टरों की बात सुनते ही वहां मौजूद लोगों पर जैसे पहाड़ टूट पड़ा। ये ख़बर जंगल की आग की तरह पूरे गांव में फैल गई और हर तरफ़ सन्नाटा पसर गई।
गांव में मातम छा गया, खासकर राजीव के घर में।
परिवार पर टूटा पहाड़
राजीव के घर पर इस ख़बर ने कहर बनकर तबाही मचाई। पत्नी किरण देवी का रो-रोकर बुरा हाल था।
उनके बच्चों को अभी तक पूरी तरह से ये समझ नहीं आया था कि उनके पिता अब कभी वापस नहीं आएंगे। एक पल में, बच्चों के सिर से पिता का और किरण देवी के सिर से पति का साया उठ गया।
राजीव कुमार मांझी अपने घर के इकलौते कमाऊ सदस्य थे। उनकी दैनिक मजदूरी से ही घर का खर्च चलता था।
बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर के राशन-पानी तक, सब कुछ उनकी कमाई पर निर्भर था।
अब इस परिवार के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा है - आगे क्या? कैसे चलेगी घर-गृहस्थी? कैसे पढ़ेंगे बच्चे? भविष्य की चिंता और वर्तमान का दुख, दोनों ने मिलकर इस परिवार को अंदर से तोड़ दिया है। जो घर कल तक राजीव की आवाज़ से गुलज़ार रहता था, आज वहां सिर्फ़ खामोशी और चीत्कार थी।
गांव के लोग भी इस घटना से स्तब्ध थे और हर कोई इस परिवार के दुख में शरीक था।
उठे सवाल और पुलिस कार्रवाई
इस हृदय विदारक घटना के बाद ग्रामीणों में गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने इस हादसे के लिए बिजली विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।
ग्रामीणों का आरोप था कि इलाके में बिजली के तारों का रखरखाव ठीक से नहीं होता, खुले और लटकते तार अक्सर हादसों का कारण बनते हैं। अगर बिजली विभाग ने समय रहते इन तारों की मरम्मत की होती या सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए होते, तो शायद राजीव की जान बच सकती थी।
यह सिर्फ एक ग्रामीण का आरोप नहीं, बल्कि कई बार ऐसे हादसे विभाग की लापरवाही को उजागर करते रहे हैं।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और ग्रामीणों से पूछताछ की।
राजीव कुमार मांझी के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के सही कारणों का पता चल पाएगा।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गहनता से जांच शुरू कर दी है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था और क्या बिजली के तार खुले या असुरक्षित अवस्था में थे।
इस जांच के बाद ही पता चलेगा कि इस दुखद हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है और क्या लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाएगी। परिवार को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा और इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलेगी।

