पूर्णिया: सुबह-सुबह की बात है, जब शहर अपनी नींद तोड़कर चहल-पहल में लग रहा था। पूर्णिया के गुलाबबाग में भी वैसी ही एक आम सुबह थी। सूरज की किरणें धीमी-धीमी सड़कों पर फैल रही थीं और लोग अपने-अपने कामों में जुटने लगे थे। दमका चौक के दिनेश यादव भी इसी सुबह अपने घर से साइकिल उठाकर निकल पड़े थे। उनका मकसद कोई बहुत बड़ा या पेचीदा नहीं था, बस पास के गुलाबबाग बाजार से ताज़ी सब्ज़ियां लेकर आना था। वो नहीं जानते थे कि आज की सुबह उनकी ज़िंदगी की आखिरी सुबह बन जाएगी। एक तेज रफ्तार ऑटो, जिसने शायद सारे नियम-कानून ताक पर रख दिए थे, उनकी दिशा में तूफान बनकर आया और चंद सेकंड में एक हंसते-खेलते घर में मातम पसर गया।
ये कोई मामूली सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक दर्दनाक कहानी है, जो पूर्णिया की सड़कों पर बढ़ती लापरवाही को उजागर करती है। 62 साल के दिनेश यादव, जो अपनी उम्र के इस पड़ाव पर भी घर-परिवार के लिए दौड़-भाग कर रहे थे, अब इस दुनिया में नहीं हैं।
उनके परिवार के लिए ये यकीन कर पाना मुश्किल है कि जिस शख्स को वो कुछ देर पहले हंसते हुए घर से निकलता देख रहे थे, उसकी लाश अब अस्पताल के पोस्टमॉर्टम रूम में रखी है। ये सब हुआ एक ऐसे ड्राइवर की लापरवाही से, जिसने टक्कर मारी और अपनी ज़िम्मेदारी से मुंह मोड़कर भाग खड़ा हुआ।
हादसे का मंजर: जब सब कुछ थम सा गया
घटना गुलाबबाग के मुख्य सड़क पर हुई। दिनेश यादव अपनी पुरानी साइकिल पर सवार होकर आराम से बाजार की ओर बढ़ रहे थे।
वो शायद अपनी लिस्ट में लिखी सब्जियों के बारे में सोच रहे होंगे, या फिर घर लौटने के बाद परिवार के साथ नाश्ते की योजना बना रहे होंगे। लेकिन तभी, विपरीत दिशा से एक बेकाबू ऑटो तेज रफ्तार में उनकी तरफ आया।
ऑटो की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि ड्राइवर शायद उसे कंट्रोल नहीं कर पा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ऑटो सीधे दिनेश यादव की साइकिल से टकराया।
टक्कर इतनी भीषण थी कि साइकिल और दिनेश यादव हवा में उछले और सड़क पर दूर जा गिरे। उनके सिर और शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं।
खून देखकर आसपास के लोग दहशत में आ गए।
हादसे के बाद सड़क पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े।
दिनेश यादव दर्द से कराह रहे थे और पूरी तरह से बेसुध हो चुके थे। जिस ऑटो ने उन्हें टक्कर मारी थी, उसका ड्राइवर गाड़ी को वहीं छोड़कर मौके से फरार हो गया।
ये वही पुराना और घिसा-पिटा बहाना है जो अक्सर ऐसे हादसों के बाद सुनाई देता है। किसी को इतनी भी इंसानियत नहीं सूझी कि वो एक घायल बुजुर्ग को अस्पताल तक पहुंचा दे।
बचाने की जद्दोजहद: अपनों की आखिरी कोशिश
स्थानीय लोगों की मदद से दिनेश यादव को तुरंत पूर्णिया के GMCH (गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल) पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत देखते हुए तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू किया, लेकिन उनकी चोटें इतनी गहरी थीं कि डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया।
परिवार वाले और आसपास के लोग, जो अब तक हादसे की खबर सुनकर अस्पताल पहुंच चुके थे, बुरी तरह से डरे हुए थे। उनके सामने दिनेश यादव की ज़िंदगी बचाने की एक आखिरी उम्मीद थी।
परिवार ने बिना देर किए, उन्हें GMCH से निकालकर मैक्स सेवन अस्पताल ले जाने का फैसला किया। हर पल कीमती था, हर सांस के साथ उम्मीद टिकी हुई थी।
एम्बुलेंस में, रास्ते भर, परिवार के सदस्य भगवान से दुआएं मांग रहे थे। लेकिन शायद ऊपर वाले को कुछ और ही मंजूर था।
मैक्स सेवन अस्पताल पहुंचते-पहुंचते, दिनेश यादव ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल के गलियारों में सन्नाटा छा गया और परिवार की उम्मीदें पूरी तरह टूट गईं। जिन अपनों के लिए वो सुबह सब्जी खरीदने निकले थे, वही उन्हें बचा न पाए।
पुलिस की कार्रवाई और फरार ड्राइवर की तलाश
हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और सबसे पहले उस ऑटो को जब्त किया, जिसने इस दुखद घटना को अंजाम दिया था।
ऑटो वहीं सड़क किनारे लावारिस पड़ा था, क्योंकि उसका ड्राइवर अपनी जान बचाने के चक्कर में वहां से फरार हो गया था। पुलिस ने पंचनामा तैयार कर दिनेश यादव के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए GMCH भेज दिया, ताकि मौत के सही कारणों का पता चल सके और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।
सदर थाना पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। पुलिस का कहना है कि उन्होंने फरार ऑटो ड्राइवर की तलाश शुरू कर दी है।
इसके लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और मुखबिरों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। एक अधिकारी ने बताया, "हमने ऑटो जब्त कर लिया है और ड्राइवर की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।
जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा और कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।" परिवार के सदस्यों ने पुलिस से जल्द से जल्द आरोपी ड्राइवर को पकड़ने की गुहार लगाई है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके।
इस हादसे ने एक बार फिर शहर में तेज रफ्तार और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़कों पर बढ़ती ऐसी घटनाएं चिंता का विषय हैं और प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
फिलहाल, दिनेश यादव के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और वे सिर्फ इंसाफ का इंतज़ार कर रहे हैं।

