पूर्णिया: बिहार के पूर्णिया जिले में रविवार देर शाम एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने एक परिवार की खुशियों पर जैसे वज्रपात कर दिया। मीरगंज थाना क्षेत्र के बहेलिया स्थान चौक पर सड़क पर दौड़ती जिंदगी का भयानक अंत हुआ, जब एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने स्कूटी पर सवार मां और बेटी को रौंद दिया। यह सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं थी, बल्कि दो जिंदगियों का असमय छीन लिया जाना था, जिसमें एक मां ने अपनी जान गंवा दी और उसकी बेटी जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है।
हादसा उस वक्त हुआ जब 38 साल की कविता देवी, अपनी बेटी शिवानी कुमारी के साथ मीरगंज से पूर्णिया की तरफ अपने घर लौट रही थीं। दिनभर के काम के बाद घर लौटने की थकान और अगले दिन की तैयारी के बीच कौन जानता था कि सड़क पर मौत घात लगाए बैठी है।
स्कूटी पर सवार होकर वो दोनों शायद अपने घर पहुंचने के सपने देख रही थीं, लेकिन बहेलिया स्थान चौक पर एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो काल बनकर आई। उसने पीछे से ऐसी जोरदार टक्कर मारी कि मां-बेटी हवा में उछल गईं और सड़क पर लहूलुहान होकर गिर पड़ीं।
यह मंजर इतना भयानक था कि देखने वालों की रूह कांप उठी।
एक पल में सब कुछ खत्म: मां की मौत, बेटी जिंदगी से जूझती
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कविता देवी को मौके पर ही गंभीर चोटें आईं। स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े।
चीख-पुकार मच गई। लहूलुहान मां-बेटी को उठाकर जल्द से जल्द पूर्णिया के जीएमसीएच अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही कविता देवी ने रास्ते में दम तोड़ दिया। उनकी सांसे थम चुकी थीं।
दूसरी ओर, बेटी शिवानी कुमारी भी गंभीर रूप से घायल थीं। उन्हें आनन-फानन में पूर्णिया के राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (GMCCH) में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है।
मृतक कविता देवी मूल रूप से करमा चौसा की रहने वाली थीं और पूर्णिया के कोर्ट स्टेशन इलाके में अपने पति विजय यादव के साथ रहती थीं। मां और बेटी, दोनों ही हेल्थ कोच के रूप में काम करती थीं।
यानी, उनका काम लोगों को स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था, लेकिन विडंबना देखिए, खुद उनके जीवन को सड़क पर एक लापरवाह ड्राइवर ने तबाह कर दिया। परिवार को जैसे ही इस हादसे की खबर मिली, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
अनुपम स्वरूप, जो परिवार के ही सदस्य हैं, उन्होंने बताया कि मां की मौत हो चुकी है और बेटी का इलाज चल रहा है। इस खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
कल्पना कीजिए, एक परिवार जो शाम को अपनी मां और बेटी के घर लौटने का इंतजार कर रहा था, उन्हें अचानक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर मिलती है। जो घर खुशियों से गुलजार था, वहां मातम पसर गया।
कविता देवी का जाना उनके पति विजय यादव और पूरे परिवार के लिए एक ऐसा घाव है जो शायद कभी नहीं भरेगा। शिवानी, जो अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही हैं, उन्हें जब होश आएगा तो मां के खोने का गम कितना गहरा होगा, यह सोचकर ही दिल दहल उठता है।
पुलिस की कार्रवाई और सड़क सुरक्षा के सवाल
हादसे की सूचना मिलते ही मीरगंज थानाध्यक्ष रौशन कुमार सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि उन्हें थाना क्षेत्र में हुई सड़क दुर्घटना की जानकारी मिली थी।
पुलिस ने फौरन घायलों को अस्पताल भेजने का इंतजाम किया। थानाध्यक्ष ने कविता देवी की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले को लेकर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अब स्कॉर्पियो चालक की तलाश में जुट गई है, जिसने इस भयावह हादसे को अंजाम दिया और मौके से फरार हो गया। एफआईआर दर्ज करने और दोषी को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा के बड़े सवालों को खड़ा करती है। क्या हमारे शहरों की सड़कें वाकई सुरक्षित हैं? तेज रफ्तार और लापरवाही से ड्राइविंग करने वाले चालकों पर लगाम कैसे लगाई जाए? हर साल ऐसी अनगिनत दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें बेकसूर लोग अपनी जान गंवा देते हैं या जिंदगी भर के लिए अपाहिज हो जाते हैं।
पूर्णिया में हुई यह दर्दनाक घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कब तक यूं ही जिंदगियां सड़कों पर बेमौत मरती रहेंगी। पुलिस को ऐसे मामलों में सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके और सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है और पुलिस की कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
कविता देवी और शिवानी कुमारी, दोनों हेल्थ कोच थीं, जिनका काम लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना था। यह कितना विरोधाभासी है कि जो दूसरों को जीवन जीने की प्रेरणा देती थीं, उन्हीं में से एक को अपना जीवन यूं ही गंवाना पड़ा।
शिवानी के जल्द स्वस्थ होने और परिवार को इस गहरे सदमे से उबरने की प्रार्थनाएं की जा रही हैं। यह हादसा पूर्णिया ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार में सड़क सुरक्षा की स्थिति पर एक गंभीर चिंतन की मांग करता है।




































