दरभंगा: घनी काली घटाओं के बीच सोमवार को जब आसमान से मूसलाधार बारिश बरस रही थी, तब दरभंगा के कोलहंटा पटोरी इलाके में एक ऐसी किरण फूटी, जिसने हजारों बच्चों और उनके अभिभावकों के चेहरों पर उम्मीद की चमक बिखेर दी। बात हो रही है जिले के तीसरे केंद्रीय विद्यालय की, जिसका विधिवत उद्घाटन हो गया है। यूं तो बारिश में अक्सर कार्यक्रम धुल जाते हैं, लेकिन यहां का माहौल कुछ और ही था। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक, शिक्षक, अभिभावक और नन्हे-मुन्ने छात्र-छात्राएं, सब इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे थे। मानो प्रकृति भी इस बड़े कदम को अपनी अश्रुधारा से सलाम कर रही थी, या शायद खुशियों के आंसू बहा रही थी!
ये कोई मामूली स्कूल नहीं, बल्कि एक ऐसा शिक्षण संस्थान है जिसका इंतजार इलाके के लोग लंबे समय से कर रहे थे। अब तक दरभंगा में केंद्रीय विद्यालय के नाम पर दो ही ऑप्शन थे, लेकिन अब तीसरा विकल्प भी खुल गया है।
+2 राजकीय उच्च विद्यालय, कोलहंटा पटोरी के परिसर में यह नया अध्याय लिखा गया। इस उद्घाटन समारोह ने सिर्फ एक इमारत को नहीं, बल्कि अनगिनत सपनों को नई उड़ान दी है।
अब यहां के बच्चे भी देश के उन प्रीमियर शिक्षा संस्थानों में से एक का हिस्सा बन सकेंगे, जिसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जाना जाता है।
एक बड़े सपने का हुआ दीदार: उद्घाटन समारोह की धूम
सोमवार का दिन दरभंगा के लिए वाकई खास था। कार्यक्रम का आगाज़ परंपरा के मुताबिक दीप प्रज्ज्वलन से हुआ, जिसे दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर, बिहार सरकार के मंत्री मदन सहनी, और विधान पार्षद हरि सहनी व सर्वेश कुमार ने मिलकर किया।
जैसे ही दीप जलाए गए, पूरा परिसर एक सकारात्मक ऊर्जा से भर उठा। मिथिला की अपनी खास परंपरा के तहत, अतिथियों का स्वागत पाग (मिथिला की पारंपरिक पगड़ी) और चादर भेंट कर किया गया, जो सम्मान और आतिथ्य का प्रतीक है।
ये सिर्फ एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि इलाके की समृद्ध संस्कृति का एक खूबसूरत प्रदर्शन था, जिसने आयोजन में चार चांद लगा दिए।
सांसद गोपाल जी ठाकुर ने इस मौके पर अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्रीय विद्यालय संगठन सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाले संस्थानों में से एक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-3 की स्थापना से दरभंगा और उसके आस-पास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक, संस्कारयुक्त और उत्कृष्ट शिक्षा मिल सकेगी।
सांसद ने बच्चों को संबोधित करते हुए उन्हें अनुशासन, परिश्रम और नवाचार की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा सिर्फ किताबें पढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व के समग्र विकास का माध्यम है।
पहले सिर्फ घोषणाएं, अब काम जमीन पर: सांसद का बड़ा बयान
सांसद गोपाल जी ठाकुर ने अपने भाषण में एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पहले सिर्फ घोषणाएं होती थीं और शिलान्यास की ईंटें रखी जाती थीं, लेकिन अब सरकार सिर्फ बातें नहीं करती, बल्कि योजनाओं को धरातल पर उतार रही है।
यह उनके शब्दों में विकास की नई परिभाषा थी। उन्होंने बताया कि लगभग 1200 करोड़ रुपये की लागत वाली लहेरियासराय-मुजफ्फरपुर रेल लाइन परियोजना पर भी तेजी से काम आगे बढ़ रहा है।
साथ ही, एक और खुशखबरी देते हुए उन्होंने बताया कि एसटीईटी परीक्षा में मैथिली विषय को भी शामिल कर लिया गया है, जिससे मैथिली शिक्षकों की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा। यह कदम न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में नई नौकरियां लाएगा, बल्कि मैथिली भाषा और संस्कृति के संरक्षण में भी मदद करेगा।
बिहार सरकार के मंत्री मदन सहनी ने भी इस मौके पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विद्यालय के खुलने से विद्यार्थियों को एक बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा, जो उनके भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मंत्री सहनी ने क्षेत्र में चल रहे अन्य विकास कार्यों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रामपुर डीह में लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय का निर्माण कराया जा रहा है।
इसके अलावा, हनुमाननगर प्रखंड और अंचल कार्यालय भवन के निर्माण पर भी लगभग 31 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ये सभी परियोजनाएं क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेंगी और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाएंगी।
औद्योगिक विकास और आधुनिक पार्क की संभावनाएं
मंत्री मदन सहनी ने औद्योगिक विकास की दिशा में भी सरकार के प्रयासों को साझा किया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में औद्योगिक विकास के लिए 285 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई है।
यह दर्शाता है कि सरकार सिर्फ शिक्षा ही नहीं, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक विकास पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने पटोरी के लोगों को एक और तोहफा देने का संकेत दिया।
उन्होंने कहा कि यदि पटोरी में पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराई जाती है, तो 2 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक पार्क का निर्माण भी कराया जाएगा। यह पार्क न सिर्फ बच्चों और बुजुर्गों के लिए मनोरंजन का साधन बनेगा, बल्कि क्षेत्र की सुंदरता में भी इजाफा करेगा।
विधान पार्षद हरि सहनी और सर्वेश कुमार ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान ग्रामीण और आस-पास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध कराएगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह केंद्रीय विद्यालय आने वाले वर्षों में हजारों छात्रों के भविष्य को नई दिशा देगा और उन्हें देश के निर्माण में योगदान देने के लिए तैयार करेगा। उनके चेहरे पर संतोष साफ झलक रहा था, क्योंकि उन्हें पता था कि यह एक ऐसा निवेश है जिसका प्रतिफल कई पीढ़ियों तक मिलता रहेगा।
1 जुलाई से शुरू होंगी कक्षाएं: राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का अनुपालन
विद्यालय के प्राचार्य ऋषि रमण ने अतिथियों और उपस्थित जनसमुदाय का स्वागत करते हुए विद्यालय की भावी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय विद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष बल दिया जाएगा।
इसका मतलब है कि सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि बच्चों के चौतरफा विकास पर ध्यान दिया जाएगा। शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ, खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विज्ञान नवाचार और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों का नियमित संचालन किया जाएगा।
यह सुनिश्चित करेगा कि बच्चे हर क्षेत्र में आगे बढ़ें और एक संपूर्ण व्यक्तित्व के रूप में विकसित हों।
प्राचार्य रमण ने एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की, जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार था। उन्होंने बताया कि विद्यालय में नामांकन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और सबसे बड़ी खबर यह है कि 1 जुलाई से नियमित कक्षाओं का संचालन विधिवत प्रारंभ हो जाएगा।
इस घोषणा के साथ ही, समारोह में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। बच्चों के चेहरे पर खुशी और अभिभावकों की आंखों में चमक साफ दिख रही थी।
अंत में, उद्घाटन समारोह के दौरान बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित लोगों का खूब मन मोहा। यह सिर्फ एक उद्घाटन नहीं, बल्कि दरभंगा के शैक्षिक परिदृश्य में एक नए युग की शुरुआत थी, जहां बच्चों के सुनहरे भविष्य की नींव रखी गई।

