किशनगंज: भारत-नेपाल सीमा पर अक्सर ऐसी खबरें आती रहती हैं जो सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की ओर इशारा करती हैं। लेकिन इस बार जो खबर आई है, उसने सीधे-सीधे अवैध पैसों के खेल को उजागर किया है। बिहार के किशनगंज जिले में, पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने मिलकर एक ऐसा कारनामा किया है, जिसने तस्करों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। एक संयुक्त कार्रवाई में, टीम ने 4 लाख नेपाली रुपये के साथ दो संदिग्धों को धर दबोचा है। सोचिए, एक मोटरसाइकिल पर 4 लाख नेपाली रुपये! ये कोई छोटी रकम नहीं है और इसे छुपाने की कोशिश में लगे ये लोग अब सलाखों के पीछे हैं।
ये पूरा मामला शुरू होता है भारत-नेपाल की खुली सीमा पर, जो अक्सर तस्करों के लिए एक आसान रास्ता बन जाती है। सोमवार को, एसएसबी सालबाड़ी की टीम और स्थानीय पुलिस ने मिलकर सीमावर्ती इलाके में अपनी चौकसी बढ़ा दी।
उन्हें शायद पहले से ही कुछ भनक थी, या फिर उनकी तेज नजरों ने कुछ ऐसा भांप लिया, जिसकी वजह से उन्होंने वाहन चेकिंग अभियान शुरू किया। सीमा पर ऐसे अभियानों की अहमियत बहुत ज्यादा होती है, क्योंकि यहीं से अक्सर बड़ी-बड़ी अवैध खेपें निकल जाती हैं।
सीमा पर गाड़ी रोकी; 4 लाख कैश बरामद
चेकिंग अभियान के दौरान, पुलिस और एसएसबी के जवानों की नजर एक पल्सर मोटरसाइकिल (नंबर BR-37AA-4136) पर पड़ी। इस मोटरसाइकिल पर दो लोग सवार थे, और उनकी हरकतों में कुछ तो ऐसा था जो सामान्य नहीं लग रहा था।
जवानों ने तुरंत उन्हें रुकने का इशारा किया। जैसे ही मोटरसाइकिल रुकी, जवानों ने अपनी पेशेवर अंदाज में उनकी तलाशी लेनी शुरू की।
और फिर वही हुआ, जिसका अक्सर अनुमान लगाया जाता है। तलाशी के दौरान, जवानों को उनके पास से पूरे 4,00,000 नेपाली रुपये नकद मिले।
इतनी बड़ी रकम, बिना किसी ठोस वजह के, एक मोटरसाइकिल पर ले जाई जा रही थी – यह अपने आप में ही संदिग्ध था।
पुलिस ने तुरंत इन दोनों व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया। पूछताछ शुरू हुई, तो पता चला कि ये कोई आम मुसाफ़िर नहीं हैं।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान चंद्र प्रसाद सिंह राजवंशी (61 वर्ष) के रूप में हुई है, जो नेपाल के झापा जिले के पिंडलबाड़ी के रहने वाले हैं। दूसरे आरोपी का नाम विशेश्वर प्रसाद गिरी (52 वर्ष) है, जो किशनगंज जिले के दिघलबैंक थाना क्षेत्र के पसंगाछी गांव के निवासी हैं।
एक नेपाल का, दूसरा भारत के सीमावर्ती जिले का – यह कनेक्शन भी जांच एजेंसियों के लिए कई सवाल खड़े करता है।
सवाल-जवाब और संदिग्ध जवाब
जब पुलिस ने चंद्र प्रसाद सिंह राजवंशी और विशेश्वर प्रसाद गिरी से इतनी बड़ी मात्रा में नेपाली करेंसी के बारे में पूछा, तो उनके जवाब संतोषजनक नहीं थे। वे न तो इस रकम के स्रोत के बारे में कुछ बता पाए और न ही इसे ले जाने के उद्देश्य के बारे में कोई ठोस वजह दे पाए।
जब इतनी बड़ी नगद राशि के साथ कोई व्यक्ति पकड़ा जाता है और उसके पास कोई वाजिब जवाब नहीं होता, तो शक गहराना स्वाभाविक है। यही वजह है कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों को हिरासत में ले लिया और बरामद किए गए 4 लाख नेपाली रुपये के साथ-साथ उस पल्सर मोटरसाइकिल को भी जब्त कर लिया, जिस पर वे सवार थे।
पुलिस के लिए यह सिर्फ एक नकदी की बरामदगी का मामला नहीं है। प्राथमिक जांच में ही यह आशंका जताई जा रही है कि यह मामला हवाला कारोबार या फिर सीधे-सीधे तस्करी से जुड़ा हो सकता है।
हवाला एक ऐसा अवैध तरीका है, जिसमें बिना किसी शारीरिक नकदी के लेन-देन के, एक जगह से दूसरी जगह पैसा ट्रांसफर किया जाता है। अक्सर, तस्कर और अवैध गतिविधियों में लिप्त लोग इसका इस्तेमाल करते हैं ताकि पकड़े जाने का खतरा कम हो।
लेकिन जब नकदी सीधे पकड़ी जाती है, तो यह हवाला नेटवर्क का एक हिस्सा हो सकता है, जहां नकदी को भौतिक रूप से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा रहा था।
हवाला या तस्करी: जांच का दायरा बढ़ा
अब पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि क्या यह रकम भारत लाई जा रही थी या इसे नेपाल भेजा जा रहा था। यह एक अहम सवाल है, क्योंकि इससे पता चलेगा कि यह अवैध लेनदेन किस दिशा में हो रहा था और इसका मकसद क्या था।
क्या यह किसी आपराधिक गतिविधि का पैसा है जिसे सीमा पार भेजा जा रहा था? या फिर यह अवैध रूप से कमाए गए पैसे को सफेद करने की कोशिश थी? इन सभी पहलुओं पर गहनता से जांच की जा रही है।
पुलिस दोनों आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इन दोनों का पहले भी किसी तरह की तस्करी या हवाला कारोबार से संबंध रहा है।
अक्सर, ऐसे मामलों में पकड़े गए लोग किसी बड़े नेटवर्क का सिर्फ एक छोटा सा मोहरा होते हैं। जांच एजेंसियों का मकसद इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करना होता है, ताकि ऐसी गतिविधियों को जड़ से खत्म किया जा सके।
खुली सीमा का फायदा और 'जीरो टॉलरेंस' नीति
भारत और नेपाल के बीच की सीमा बहुत लंबी और खुली है। दोनों देशों के लोगों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध गहरे हैं, और इसीलिए इस सीमा पर आवाजाही अपेक्षाकृत आसान है।
लेकिन इसी खुली सीमा का फायदा अक्सर तस्कर उठाते हैं। वे अवैध करेंसी, नशीले पदार्थ, हथियार और अन्य प्रतिबंधित सामानों की ढुलाई के लिए इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं।
यह न सिर्फ दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए खतरा है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती पैदा करता है।
किशनगंज पुलिस और एसएसबी ने इस गिरफ्तारी के बाद एक बात साफ कर दी है: सीमा पर अवैध गतिविधियों के खिलाफ उनकी 'जीरो टॉलरेंस' की नीति जारी रहेगी। इसका मतलब है कि किसी भी कीमत पर अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह सिर्फ एक बयान नहीं है, बल्कि ऐसी गिरफ्तारियां इस बात का प्रमाण हैं कि एजेंसियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही इस पूरे रैकेट के बारे में और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आएंगी।
सीमा सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस के इस संयुक्त अभियान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे सीमा पार अपराधों पर नकेल कसने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।

