किशनगंज: बिहार के किशनगंज जिले में एक मदरसे में नई भर्ती को लेकर बड़ा बखेड़ा खड़ा हो गया है। यहां के मदरसा इत्तेहादुल मुस्लेमीन, बाभनगांव (जिसका मदरसा संख्या 369/609 है) में एक नए कर्मचारी की नियुक्ति पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि यह नियुक्ति इतनी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है कि अब इसकी उच्च-स्तरीय जांच की मांग हो रही है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए किशनगंज के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने शिकायत को बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड, पटना के पाले में डाल दिया है।
मामला कुछ यूं है कि किसी ने सीधे एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (Integrated Grievance Redressal System) में एक अर्जी लगाई। इसका पंजीकरण संख्या REF471233 है।
इस अर्जी में साफ-साफ लिखा गया कि बाभनगांव के इस मदरसे में एक कर्मचारी की नियुक्ति में भारी धांधली हुई है। शिकायतकर्ता ने सिर्फ आरोप लगाकर छुट्टी नहीं ली, बल्कि अपनी मांगों को भी बड़े साफ तरीके से सामने रखा।
उनकी पहली मांग है कि इस पूरी नियुक्ति प्रक्रिया की किसी ऊंचे अधिकारी से जांच कराई जाए। दूसरी, जो लोग इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
और तीसरी, जिस नए कर्मचारी की नियुक्ति पर सवाल उठे हैं, उसे तुरंत प्रभाव से सस्पेंड किया जाए।
शिकायत पहुंची, DEO ने गेंद बोर्ड के पाले में डाली
अब जब शिकायत इतनी ठोस थी, तो किशनगंज जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय भी हरकत में आया। कार्यालय की स्थापना शाखा ने इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए एक आदेश जारी किया।
इस आदेश में साफ कहा गया है कि चूंकि शिकायतकर्ता का मूल आवेदन सीधे बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष को संबोधित था, और मदरसों में कर्मचारियों की नियुक्ति के साथ-साथ उनके प्रशासनिक मामलों पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार पूरी तरह से मदरसा बोर्ड के पास होता है, इसलिए यह मामला उनके ही अधिकार क्षेत्र में आता है।
इसी आधार पर, जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय ने शिकायतकर्ता का मूल आवेदन और संबंधित कागजात बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के सचिव को भेज दिए हैं। पत्र में यह बात बिल्कुल साफ कर दी गई है कि इस पूरे मामले की आगे की जांच-पड़ताल और इस पर क्या कार्रवाई करनी है, इसका फैसला बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के स्तर से ही लिया जाएगा।
मतलब, किशनगंज के DEO ने अपनी तरफ से जो प्रशासनिक कार्रवाई करनी थी, वो कर दी है और अब मामला पटना पहुंच गया है।
अब मदरसे का क्या होगा? सबकी निगाहें बोर्ड पर
अब सबकी निगाहें बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड, पटना पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि बोर्ड इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है।
क्या वे आरोपों की जांच के लिए कोई विशेष समिति बनाएंगे? अगर जांच होती है और आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो बोर्ड दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है, और जिस नए कर्मचारी की नियुक्ति पर सवाल उठे हैं, उसका क्या होगा – क्या उसे निलंबित किया जाएगा या नौकरी से हटाया जाएगा? ये सारे सवाल अब बोर्ड के फैसले पर निर्भर करते हैं।
इस पूरे मामले को लेकर किशनगंज के स्थानीय लोग भी आपस में खूब चर्चा कर रहे हैं। शिकायतकर्ता ने एक बार फिर अपनी मांग दोहराई है कि जांच बिल्कुल निष्पक्ष होनी चाहिए।
उनका कहना है कि अगर नियुक्ति में कोई भी अनियमितता पाई जाती है, तो जो भी अधिकारी या कर्मचारी इसमें शामिल पाए जाते हैं, उनके खिलाफ ऐसी कड़ी कार्रवाई हो, जो एक मिसाल बन सके। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में किसी भी तरह की धांधली को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए, खासकर तब जब मामला मदरसों से जुड़ा हो, जहां हजारों बच्चों का भविष्य बनता है।
यह मामला एक बार फिर शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही के बड़े सवाल खड़े करता है। बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के सामने अब एक चुनौती है कि वह न सिर्फ इस विशेष शिकायत का समाधान करे, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी ठोस कदम उठाए।
आने वाले दिनों में ही यह साफ हो पाएगा कि बाभनगांव के मदरसा इत्तेहादुल मुस्लेमीन में हुई इस संदिग्ध नियुक्ति का सच क्या है और इसके क्या परिणाम निकलते हैं।




































