किशनगंज: ये कहानी सिर्फ एक लड़की की नहीं है, ये उस भयावह सच की कड़वी सच्चाई है जो हमारे समाज के अंधेरे कोनों में दबी पड़ी है। ये कहानी है खुशबू (बदला हुआ नाम) की, जिसकी उम्र बमुश्किल 19-20 साल होगी, लेकिन उसकी ज़िंदगी के पन्ने इतने दर्दनाक अनुभवों से भरे हैं कि किसी का भी कलेजा काँप जाए। आप सोचिए, वो पिछले पाँच सालों से उस दलदल में फंसी थी जिसे 'रेडलाइट एरिया' कहते हैं, और जब उसे एक साल पहले वहाँ से निकलने का मौका मिला, तो अपनों ने ही उसे ठुकरा दिया।
खुशबू ने जो दास्तान सुनाई है, वो दिल दहला देने वाली है। उसने बताया कि वो एक साल पहले इस 'देह व्यापार के नरक' से निकल तो गई थी, लेकिन पेट और मजबूरी ने उसे फिर उसी दलदल में धकेल दिया।
जब वो अपने घर पहुँची, तो उसके माता-पिता ने उसे अपनाने से साफ़ इनकार कर दिया। उनके शब्द थे, “तुम गलत धंधे में पड़ चुकी हो, अब लोग हमारी बदनामी करेंगे, इसलिए अब इस घर में तुम्हारी कोई जगह नहीं है।
” सोचिए, अपने ही घर के दरवाज़े से उसे दुत्कार कर भगा दिया गया।
खुशबू का दर्द आँखों से छलक रहा था जब उसने कहा, “अगर उस दिन मेरे माता-पिता मुझे अपना लेते, तो शायद आज मेरी जिंदगी कुछ और होती। मुझे दर-दर की ठोकरें नहीं खानी पड़ती और उम्रदराज लोगों के सामने अपने शरीर को यूं नहीं परोसना पड़ता।
” ये सिर्फ उसके शब्द नहीं, ये उस हर बच्ची का चीत्कार है जो इस दलदल में फंसकर अपनों से ही बेगानी हो जाती है। किशनगंज के रेडलाइट एरिया से रविवार को रेस्क्यू की गई खुशबू ने अपनी ज़िंदगी के उन काले पन्नों को दैनिक भास्कर के साथ साझा किया, जो हमें सोचने पर मजबूर करते हैं कि आखिर क्यों ऐसा होता है।
रेडलाइट एरिया पर पुलिस की बड़ी छापेमारी
रविवार की सुबह किशनगंज शहर के खगड़ा स्थित रेडलाइट एरिया में पुलिस ने ताबड़तोड़ छापेमारी की। सालों से पर्दों के पीछे चल रहे देह व्यापार के इस बड़े नेटवर्क का इस कार्रवाई से पर्दाफाश हुआ।
पुलिस की टीम ने यहाँ से दो नाबालिग लड़कियों सहित कुल 18 से अधिक युवतियों को मुक्त कराया। ये लड़कियाँ सिर्फ बिहार की नहीं थीं, बल्कि नेपाल और पश्चिम बंगाल से भी यहाँ लाई गई थीं।
जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पता चला कि इस रेडलाइट एरिया में ग्राहक तो आते ही हैं, लेकिन यहाँ से लड़कियों को ऑन-डिमांड दूसरे शहरों में भी भेजा जाता था, यानी एक तरह से मोबाइल देह व्यापार का नेटवर्क भी चल रहा था।
खुशबू की आपबीती: 'जब मैं नाबालिग थी तब बेची गई'
पुलिस स्टेशन में मौजूद उन रेस्क्यू की गई लड़कियों में से एक, खुशबू ने अपनी कहानी सुनाते हुए बताया कि वह नेपाल की रहने वाली है। उसके अनुसार, “जब मुझे पहली बार इस धंधे में धकेला गया था, तब मैं नाबालिग थी।
मुझे उस समय किसी चीज़ की समझ नहीं थी।” खुशबू ने बताया कि उसे रेलवे स्टेशन से किडनैप किया गया और सीधे किशनगंज लाया गया।
यहाँ उसे एक माया खातून नाम की महिला के पास बेच दिया गया।
खुशबू ने आगे बताया कि माया खातून ने उसे कुछ दिनों तक अपने पास रखा और फिर ज़बरदस्ती देह व्यापार में धकेल दिया। वो कहती है, “मैं उस समय उसके घर में सबसे छोटी थी।
” माया खातून के यहाँ हर उम्र के ग्राहक आया करते थे और वो खुशबू को समझाती थी कि ग्राहकों को जितना खुश रखोगी, तुम्हें उतना ही फ़ायदा होगा। जब खुशबू यह सब करने से मना करती थी, तो माया खातून उसे धमकी भरे लहज़े में कहती थी कि 'तुम्हें पैसे देकर खरीदा है।
जब तक तुमसे पूरे पैसे नहीं निकलवा लूंगी, यहाँ से जाने नहीं दूंगी। तुम जितनी जल्दी इस काम में उतर जाओगी और ग्राहक को खुश करोगी तो तुम्हारे पैसे पूरे हो जाएंगे और मैं तुम्हें यहाँ से जाने दूंगी।
' खुशबू बताती है कि वह उसकी बातों में आ गई और धीरे-धीरे माया जो-जो कहती थी, वह वैसा ही करती चली गई। आप सोचिए, एक बच्ची को किस तरह से फंसाया और मजबूर किया जाता है।
'VIP ट्रीटमेंट' के नाम पर शोषण
खुशबू ने अपने उन दिनों को याद करते हुए बताया कि माया खातून उसे ग्राहकों को यही कहकर दिखाती थी कि 'मेरे यहाँ सबसे कम उम्र की लड़की आई है।' वो दिन खुशबू को आज भी कंपकपा देता है।
दिसंबर 2021 की वो कड़ाके की ठंड थी। माया ने उसे एक स्लीवलेस कपड़ा पहनाकर ग्राहक के सामने खड़ा कर दिया था।
माया खातून ने उससे कहा था, “तुम्हें VIP ट्रीटमेंट के लिए भेज रही हूँ। तुम गोरी हो, सुंदर भी हो…तुम्हारी बड़ी बोली लगी है।
ग्राहक को निराश मत करना, वरना तुम्हारे साथ क्या होगा, ये तुम्हें अच्छे से पता है।” ये वो शब्द हैं जो आज भी खुशबू के ज़हन में गहरे घाव की तरह बैठे हुए हैं।
पुलिस की इस कार्रवाई से पूरे इलाके में अफ़रातफ़री मच गई, और कई दिनों से चल रहे इस घिनौने धंधे का पर्दाफाश हुआ। अब देखने वाली बात ये है कि इन लड़कियों का भविष्य क्या होगा और क्या उन्हें सच में एक नई ज़िंदगी मिल पाएगी।




































