नवादा: बिहार के नवादा जिले में एक सड़क हादसे ने दो परिवारों की खुशियों पर ऐसा कहर ढाया कि अब सिर्फ मातम और आंसू हैं। सोमवार का दिन था, वारसलीगंज थाना क्षेत्र के नवाजगढ़ गांव के पास हमेशा की तरह जिंदगी अपनी रफ्तार से चल रही थी। लेकिन अचानक एक टेंपो और बाइक की आमने-सामने की टक्कर हुई और पल भर में दो दोस्त मौत के मुंह में समा गए। ये सिर्फ एक हादसा नहीं था, बल्कि दो जिंदगियों का अंत और दो परिवारों के लिए कभी न भरने वाला घाव था।
मरने वाले दोनों दोस्त रोह थाना क्षेत्र के दुल्लाम बीघा गांव के रहने वाले थे – पंकज कुमार और अनिल मांझी। दोनों एक साथ निजी नौकरी करते थे और उस दिन शेखपुरा जिले में पंकज के ससुराल जा रहे थे।
उन्हें क्या पता था कि घर से निकला उनका ये सफर अधूरा रह जाएगा और उनकी मंजिल मौत का वो दर्दनाक मोड़ बन जाएगी, जहां से वापसी नामुमकिन है। ये खबर जैसे ही दुल्लाम बीघा गांव पहुंची, पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया और दोनों परिवारों पर तो मानो पहाड़ ही टूट पड़ा।
अधूरे सपने, गर्भवती पत्नी और इकलौता बेटा
पंकज कुमार की उम्र करीब 25 साल थी। वो आकाश रविदास के बेटे थे।
उनके जीजा दीपू कुमार ने बताया कि पंकज की शादी अभी दो साल पहले ही हुई थी और उनकी पत्नी नौ महीने की गर्भवती हैं। घर में आने वाली नई खुशी का इंतजार हो रहा था, मां-बाप इकलौते बेटे की शादी के बाद अब पोते-पोती का मुंह देखने का सपना संजोए बैठे थे।
पंकज अपने घर के इकलौते चिराग थे, जिस पर पूरे परिवार की उम्मीदें टिकी थीं। अब सोचिए, उस परिवार पर क्या गुजरी होगी, जब उन्हें पता चला कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है।
जिस घर में बच्चे की किलकारी गूंजने वाली थी, वहां अब सिर्फ सिसकियां और रुदन है। पंकज के जाने से सिर्फ एक युवा ही नहीं गया, बल्कि उसके साथ उस नवजात का भविष्य भी अधर में लटक गया, जिसने अभी दुनिया देखी भी नहीं है।
यह उन सपनों का अंत है जो पंकज और उसकी पत्नी ने साथ देखे थे, उन खुशियों का अंत है जो आने वाली थीं।
सात बच्चों का सहारा छीना, परिवार हुआ बेसहारा
दूसरे मृतक अनिल मांझी की कहानी भी कम हृदयविदारक नहीं है। उनकी उम्र करीब 40 साल थी और वे गोरेलाल मांझी के बेटे थे।
अनिल अपने पीछे अपनी पत्नी और सात छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। जी हां, सात बच्चे! गोरेलाल मांझी ने बताया कि अनिल घर के सबसे बड़े बेटे थे और पूरे परिवार का पेट पालने वाले इकलौते कमाने वाले सदस्य थे।
सात बच्चों का लालन-पालन, उनकी पढ़ाई-लिखाई, उनका भविष्य – ये सारी जिम्मेदारियां अनिल के कंधों पर थीं। अचानक हुए इस हादसे ने इन सातों बच्चों के सिर से पिता का साया छीन लिया है।
अब उनकी मां और ये मासूम बच्चे कैसे अपनी जिंदगी गुजारेंगे, यह सोचकर ही रूह कांप जाती है। जिस परिवार का मुख्य स्तंभ ही टूट जाए, उसकी क्या हालत होती है, ये दुख सिर्फ वही महसूस कर सकते हैं जो इस त्रासदी से गुजर रहे हैं।
अनिल का जाना सिर्फ एक व्यक्ति का जाना नहीं है, बल्कि एक पूरे परिवार को बेसहारा छोड़ जाना है, जहां अब रोजी-रोटी का संकट मंडरा रहा है और बच्चों के सपनों पर ग्रहण लग गया है।
हादसे के बाद का मंजर और पुलिस कार्रवाई
हादसे की सूचना जैसे ही मिली, इलाके में हड़कंप मच गया। आसपास के लोगों ने फौरन पुलिस को जानकारी दी।
मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि दोनों दोस्त सड़क पर पड़े थे और उनकी सांसे थम चुकी थीं। घटनास्थल पर भीड़ जमा हो गई थी, हर कोई इस दर्दनाक मंजर को देखकर स्तब्ध था।
उधर, जैसे ही मृतकों के परिजनों को इस भीषण खबर की जानकारी मिली, वे सदमे में आ गए। आनन-फानन में रोते-बिलखते परिजन सदर अस्पताल नवादा पहुंचे, जहां दोनों शवों को लाया गया था।
अस्पताल में अपने प्रियजनों के निष्प्राण शरीर को देखकर उनका रो-रोकर बुरा हाल था। परिजनों ने उनकी पहचान की, जिसके बाद पुलिस ने आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की।
वारसलीगंज थाना प्रभारी पंकज कुमार सैनी ने बताया कि दोनों शवों को कब्जे में ले लिया गया है और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल नवादा भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही शवों को परिजनों के हवाले किया जाएगा।
यह एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इन परिवारों के लिए ये इंतज़ार का हर पल सदियों जैसा लग रहा होगा। अस्पताल में मौजूद हर आंख नम थी, हर कोई इन परिवारों के दर्द को महसूस कर रहा था।
इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया है। सड़कों पर तेज रफ्तार और लापरवाही अक्सर ऐसे दर्दनाक अंजाम लेकर आती है, जो कई जिंदगियों को तबाह कर देते हैं।
पंकज और अनिल के परिवारों के लिए यह क्षति अपूरणीय है। गांव में मातम पसरा है और हर कोई ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है कि इन परिवारों को इस भीषण दुख को सहने की शक्ति दे।
यह घटना नवादा ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के लिए एक चेतावनी है कि सड़क पर जरा सी चूक कितनी महंगी पड़ सकती है।

