पटना: बिहार की सियासत में आजकल एक नया बखेड़ा खड़ा हो गया है, जिसने शिक्षा विभाग से लेकर प्रशासन के ऊंचे गलियारों तक हलचल मचा दी है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐसी-ऐसी बातें कहीं कि लोग दांतों तले उंगली दबा बैठे। उनके निशाने पर थे बिहार के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर और उनके साथ 8 और आईएएस अफसर। आरोप इतने गंभीर हैं कि सुधाकर सिंह ने सीधे-सीधे अदालत की निगरानी में जांच की मांग कर दी है, बिल्कुल वैसे ही जैसे चारा घोटाले की हुई थी। मामला है 'रिशु श्री टेंडर' का, लेकिन सुधाकर सिंह की मानें तो कहानी सिर्फ यहीं तक नहीं रुकती, इसके तार कई और बड़े घोटालों से जुड़े हैं!
बात सोमवार की है, जब बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने पत्रकारों को बुलाया और बम फोड़ दिया। उन्होंने बड़े ही साफ-साफ शब्दों में कहा कि बिहार में घोटालों की जो शुरुआत हुई है, खासकर शिक्षा विभाग में, उसका सीधा संबंध आनंद किशोर के कार्यकाल से है।
उन्होंने पिछले दस सालों में हुई तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार अनियमितताओं का दावा किया और तो और, 'टॉपर घोटाला' की याद भी दिला दी। उनका कहना था, “बिहार में पहले टॉपर घोटाला हुआ था और इस बार भी उसी तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं।
” यानी, ये कोई नई बात नहीं है, बल्कि एक लंबी कड़ी का हिस्सा है!
शिक्षा विभाग में घोटालों की लंबी फेहरिस्त?
सुधाकर सिंह के आरोपों का केंद्र बिहार का शिक्षा विभाग है, जिसे लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। सांसद महोदय ने सीधे-सीधे कहा कि आनंद किशोर जब शिक्षा विभाग में थे, तभी से गड़बड़ियों का खेल शुरू हुआ।
उन्होंने यह भी इशारा किया कि पिछले एक दशक में हुई कई सरकारी परीक्षाओं में लगातार धांधली की खबरें आती रही हैं। उनका दावा था कि ये सब एक पैटर्न का हिस्सा है, जहां सिस्टम के भीतर से ही चीजों को मैनिपुलेट किया जा रहा है।
उनके लहजे से साफ था कि वह इन आरोपों को हल्के में नहीं ले रहे हैं, बल्कि इसे एक बड़े भ्रष्टाचार का संकेत मान रहे हैं जो कहीं गहरे तक फैला हुआ है।
उन्होंने कहा कि ये सिर्फ एक 'रिशु श्री टेंडर' का मामला नहीं है, बल्कि शिक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में लगातार हो रही अनियमितताओं की तरफ इशारा करता है। उनके मुताबिक, इस तरह की धांधली से योग्य उम्मीदवारों का हक मारा जाता है और राज्य की प्रतिभाओं का नुकसान होता है।
उनका ये भी कहना था कि जब तक इन 'अनियमितताओं' की जड़ तक नहीं पहुंचा जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं रुकेंगी नहीं।
आनंद किशोर पर सीधा हमला: 'सबसे बड़े माफिया' का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, सुधाकर सिंह ने आनंद किशोर को 'सबसे बड़ा माफिया' तक कह डाला। ये कोई छोटा-मोटा आरोप नहीं था, बल्कि एक सांसद द्वारा किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पर लगाया गया बेहद गंभीर आरोप था।
उन्होंने दावा किया कि 'रिशु श्री' कंपनी को सबसे पहला टेंडर आनंद किशोर ने ही दिया था। यहां सुधाकर सिंह ने सिर्फ एक अधिकारी को नहीं घेरा, बल्कि मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि दीपक कुमार के 'संरक्षण' में आनंद किशोर कथित घोटालों को अंजाम दे रहे हैं।
सुधाकर सिंह की बातों से ये बात साफ हो गई कि उनकी ये लड़ाई किसी एक अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वो पूरे सिस्टम में मौजूद कथित 'भ्रष्टाचार' को उजागर करना चाहते हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आनंद किशोर समेत कुल 9 आईएएस अधिकारी इस पूरे मामले के लिए जिम्मेदार हैं।
यह एक बड़ा आरोप है जो बिहार के प्रशासनिक हलकों में भूचाल ला सकता है। अब देखना ये होगा कि बिहार सरकार और प्रशासन इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या कोई जांच शुरू की जाती है या नहीं।
'चारा घोटाले' की तर्ज पर कोर्ट निगरानी की मांग
जब बात जांच की आई, तो सुधाकर सिंह ने एक बड़ा उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह बिहार के कुख्यात चारा घोटाले की जांच न्यायिक निगरानी में हुई थी, ठीक उसी तरह इस पूरे 'रिशु श्री टेंडर' और उससे जुड़े मामलों की भी कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए।
ये मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि न्यायिक निगरानी में जांच आमतौर पर अधिक विश्वसनीय और निष्पक्ष मानी जाती है। इससे ये भी पता चलता है कि सुधाकर सिंह इन आरोपों को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं और वो किसी भी 'लीपापोती' के मूड में नहीं हैं।
उनकी ये मांग न सिर्फ प्रशासन पर दबाव बढ़ाती है, बल्कि जनता के मन में उठ रहे सवालों को भी आवाज देती है। सुधाकर सिंह का मानना है कि केवल एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच ही सच सामने ला सकती है और उन लोगों को बेनकाब कर सकती है जो कथित तौर पर इन घोटालों के पीछे हैं।
अब बिहार की जनता और राजनीतिक गलियारों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सुधाकर सिंह के इन गंभीर आरोपों पर सरकार का अगला कदम क्या होता है और क्या वाकई 'चारा घोटाले' की तर्ज पर इस मामले की भी कोर्ट निगरानी में जांच शुरू होगी?

