सहरसा: बिहार के सहरसा जिले में मंगलवार की सुबह-सुबह खूब बवाल कटा। यूं समझिए कि चाय की चुस्की के साथ जब लोग अपनी दिनचर्या शुरू कर रहे थे, तभी सहरसा नगर निगम क्षेत्र के सुलिंदाबाद मोहल्ले में सैकड़ों बिजली उपभोक्ताओं का धैर्य जवाब दे गया। सुबह के तकरीबन छह बजे थे, जब ये लोग अपनी समस्याओं का पिटारा लेकर सड़क पर उतर आए और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। मामला ऐसा था कि आप सुनेंगे तो शायद आपका भी खून खौल जाए – शहरी क्षेत्र में रहने के बावजूद इन्हें बिजली की सप्लाई गांव वाले फीडर से मिल रही है, और बिल वसूला जा रहा है शहर वाला! सीधा-सीधा कहें तो सुविधा ग्रामीण वाली, कीमत शहरी वाली। इस असंतुलन ने लोगों को इस कदर परेशान कर रखा है कि उन्हें सड़क पर आने के लिए मजबूर होना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों का साफ-साफ कहना था कि उनका मोहल्ला अब नगर निगम क्षेत्र का हिस्सा है, तो फिर उन्हें बिजली भी शहरी इलाके के हिसाब से ही मिलनी चाहिए। लेकिन होता यह है कि उन्हें आज भी ग्रामीण फीडर से जोड़ा गया है।
इसका नतीजा क्या है? नतीजा यह है कि हर दिन कई-कई घंटों तक बिजली गुल रहती है। आप खुद सोचिए, ऐसे में आम आदमी का क्या हाल होता होगा? बच्चे अपनी पढ़ाई नहीं कर पाते, छोटे-मोटे दुकानदार अपना व्यापार नहीं चला पाते और घर-परिवार में गृहिणियों को भी भारी दिक्कतें आती हैं।
शहरी बिल, ग्रामीण आपूर्ति: एक कड़वी हकीकत
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिजली विभाग उनसे बिजली का बिल तो शहरी उपभोक्ताओं की तरह पूरा वसूलता है, लेकिन जब बात सुविधाओं की आती है तो उन्हें ग्रामीण क्षेत्र जैसी सेवाएं दी जाती हैं। इस विरोधाभास ने लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
मोहल्ले के एक निवासी, मोहम्मद मसीम इमाम ने बताया कि सुलिंदाबाद पिछले कई सालों से नगर निगम क्षेत्र का हिस्सा है, लेकिन बिजली आपूर्ति के मामले में आज भी इसे गांव ही समझा जाता है। उनका दर्द साफ झलक रहा था जब उन्होंने कहा कि मोहल्ले के लोग पिछले चार सालों से इस दोहरी मार को झेल रहे हैं।
चार साल – एक लंबा अरसा होता है, और इस दौरान उनकी शिकायतें शायद हवा में उड़ गईं।
मसीम इमाम ने आगे बताया कि इस संबंध में उन्होंने कई बार बिजली विभाग के बड़े अधिकारियों से शिकायत की है, लेकिन अफसोस! कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनकी मानें तो ग्रामीण फीडर से जुड़े होने के कारण उनके मोहल्ले में रोजाना 14 से 15 घंटे तक बिजली गुल रहती है।
आप कल्पना कीजिए, दिन के आधे से ज्यादा समय बिजली न हो, तो जिंदगी कैसे चलेगी? और इसके बदले में उनसे शहरी क्षेत्र के नाम पर पूरा बिजली बिल वसूल लिया जाता है। यह तो सरासर अन्याय है! लोगों को लगता है कि उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है और उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
सड़क पर उतरा गुस्सा और पुलिस का हस्तक्षेप
बिजली की इस किल्लत और विभाग की मनमानी के खिलाफ सुबह-सुबह जब इतनी बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरे, तो जाहिर है, आवागमन पर भी असर पड़ा। कुछ समय के लिए सड़क जाम हो गई, जिससे राहगीरों को भी परेशानी हुई।
सड़क जाम की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। सदर थानाध्यक्ष अजय कुमार पासवान ने बताया कि पुलिस टीम ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उनसे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की।
पुलिस ने माहौल को शांत करने की कोशिश की, ताकि स्थिति बेकाबू न हो।
लेकिन प्रदर्शनकारी भी अपनी बात पर अड़े हुए थे। उन्होंने साफ-साफ चेतावनी दी कि जब तक सुलिंदाबाद को शहरी फीडर से नियमित और निर्बाध बिजली आपूर्ति नहीं मिलेगी, तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर उनकी मांगों पर जल्द से जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अपने इस आंदोलन को और भी बड़े पैमाने पर ले जाएंगे। मतलब, यह तो अभी शुरुआत है, अगर विभाग ने आंखें नहीं खोलीं तो आने वाले दिनों में और बड़ा विरोध देखने को मिल सकता है।
अब देखना यह है कि बिजली विभाग कब तक इन लोगों की सुध लेता है और सुलिंदाबाद के लोगों को ग्रामीण फीडर के नाम पर मिल रही इस अन्यायपूर्ण बिजली कटौती से मुक्ति कब मिलती है।

