गिरिडीह: झारखंड के गिरिडीह जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक चार साल के मासूम बच्चे पर आवारा कुत्तों ने बर्बरता से हमला कर दिया। ये घटना इतनी खौफनाक थी कि बच्चे के चेहरे पर गहरे जख्म बन गए और उसकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। बच्चे को पहले स्थानीय अस्पताल, फिर धनबाद और आखिर में रांची के रिम्स (RIMS) रेफर किया गया है, जहां वो जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है। कल्पना कीजिए, एक बच्चा अपने घर के बाहर बेफिक्र खेल रहा है और अचानक मौत उस पर झपट्टा मार देती है। यही हुआ जमजोरी गांव में, जब एक आवारा कुत्ते ने इस मासूम को अपना शिकार बनाया।
ये वाकया गिरिडीह जिले के अहिल्यापुर थाना क्षेत्र के गांडेय प्रखंड के जमजोरी गांव का है। हर रोज की तरह, शाम का वक्त था और बच्चे घर के बाहर खेलने में मशगूल थे।
चार साल का नन्हा बच्चा भी अपने घर के आंगन से सटकर बाहर खेल रहा था, दुनिया की किसी भी फिक्र से अनजान। उसे क्या पता था कि अगले ही पल उसकी मासूमियत पर एक खूंखार हमला होने वाला है।
अचानक, एक आवारा कुत्ता कहीं से आया और बिना किसी चेतावनी के सीधे उस मासूम पर टूट पड़ा। कुत्ते ने बच्चे को जमीन पर गिरा दिया और उसके चेहरे के बाईं ओर, गाल के पास, अपने नुकीले दांतों से गहरे घाव कर दिए।
हमला इतना भीषण था कि कुत्ता कुछ देर तक बच्चे को दबोचे रहा, जैसे कोई शिकारी अपने शिकार को जकड़े रहता है। बच्चा दर्द से कराह उठा और उसकी चीखें पूरे गांव में गूंज उठीं।
आसपास के लोगों ने जब ये भयावह चीख-पुकार सुनी, तो फौरन मदद के लिए दौड़ पड़े। गांव वालों ने बड़ी मुश्किल से उस आदमखोर कुत्ते को बच्चे से दूर भगाया।
उस वक्त नजारा ऐसा था कि देखने वालों के भी रोंगटे खड़े हो गए। बच्चे का चेहरा खून से लथपथ था और उसके गाल पर गहरे जख्म बन गए थे।
परिजनों ने बिना एक पल गंवाए, लहूलुहान बच्चे को उठाकर नजदीकी अस्पताल की तरफ भागे।
जिंदगी की लड़ाई: अस्पताल से अस्पताल का सफर
स्थानीय अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्चे को प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि वहां के डॉक्टरों ने तुरंत उसे बेहतर इलाज के लिए धनबाद रेफर कर दिया। परिजन, उम्मीद की एक नई किरण के साथ बच्चे को लेकर धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचे।
वहां के डॉक्टरों ने बच्चे की हालत का जायजा लिया। चेहरे पर गहरे जख्म थे और संक्रमण का खतरा भी था।
धनबाद के डॉक्टरों ने भी बच्चे की चिंताजनक हालत को देखते हुए और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा के लिए उसे राजधानी रांची स्थित रिम्स (Rajendra Institute of Medical Sciences) भेजने का फैसला किया।
सोचिए, एक चार साल के बच्चे को इतनी कम उम्र में कितनी तकलीफ से गुजरना पड़ रहा है। गिरिडीह से धनबाद और फिर धनबाद से रांची, ये पूरा सफर परिजनों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था।
हर पल उनके मन में बच्चे की सलामती की दुआएं चल रही थीं। फिलहाल, बच्चे का इलाज रांची के रिम्स में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है।
डॉक्टर अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं कि मासूम को बचाया जा सके और उसके जख्मों को ठीक किया जा सके।
ग्रामीणों में आक्रोश: आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक
इस खौफनाक घटना के बाद जमजोरी गांव और आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है, बल्कि पिछले काफी समय से क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक बना हुआ है।
ये कुत्ते झुंड में घूमते हैं और आए दिन राहगीरों और खासकर बच्चों को निशाना बनाते रहते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर उन्होंने कई बार स्थानीय प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
गांव वालों का दर्द जायज है। जब एक मासूम बच्चा इस तरह के हमले का शिकार हो जाता है, तो स्वाभाविक है कि लोग सहम जाते हैं और उनमें गुस्सा भर जाता है।
स्थानीय लोगों ने अब एक बार फिर प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाए। उनकी मांग है कि इन कुत्तों को पकड़कर आबादी वाले इलाकों से दूर किया जाए और इनकी नसबंदी (sterilization) जैसे कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इस घटना ने पूरे इलाके में भय का माहौल पैदा कर दिया है। बच्चे के परिजन तो सदमे में हैं ही, साथ ही गांव के अन्य माता-पिता भी अपने बच्चों को घर से बाहर भेजने में डरने लगे हैं।
उन्हें हर पल यह चिंता सता रही है कि कहीं उनका बच्चा भी ऐसे किसी हमले का शिकार न हो जाए। यह सिर्फ एक बच्चे का मामला नहीं है, बल्कि यह प्रशासन की लापरवाही और जन सुरक्षा से जुड़े एक बड़े सवाल को उठाता है।
उम्मीद है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देगा और ऐसे कदम उठाएगा जिससे गांव वाले और उनके बच्चे सुरक्षित महसूस कर सकें। मासूम के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की जा रही है।

