भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले में 17 जून को पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी की तेरहवीं आज उनके पैतृक गांव बिलौटी में मनाई जा रही है। ये सिर्फ एक रस्म अदायगी नहीं, बल्कि न्याय की एक खुली मांग का बड़ा मजमा बन गई है। उम्मीद से कहीं ज्यादा लोग यहां जमा हुए हैं। गांव का कोना-कोना लोगों से पटा हुआ है, और सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों से लोग भरत को श्रद्धांजलि देने पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि 25 हजार लोगों के लिए खाने-पीने का इंतजाम किया गया है, जिसके लिए 20 से ज्यादा रसोइये कई दिनों से लगे हुए हैं।
लेकिन इस विशाल भीड़ और भोज के बीच, भरत तिवारी की मां आशा देवी का दर्द और संकल्प किसी को भी झकझोर सकता है। उनकी आवाज में एक साफ संदेश है।
उन्होंने साफ कहा है कि उन्हें केवल हाईकोर्ट पर भरोसा है कि उनके बेटे को इंसाफ मिलेगा। सरकारी न्यायिक जांच टीम और भोजपुर पुलिस पर उनका रत्ती भर भी भरोसा नहीं है।
यह बयान अपने आप में पुलिस की कार्रवाई और बाद की जांच प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल उठाता है। यह घटना सिर्फ एक एनकाउंटर नहीं, बल्कि पूरे इलाके में आक्रोश और राजनीतिक सरगर्मी का केंद्र बन चुकी है।
घटना की पृष्ठभूमि और पुलिस का दावा
यह पूरा मामला 17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र में हुए एक पुलिस एनकाउंटर से जुड़ा है। पुलिस का दावा है कि उन्होंने आत्मरक्षा में भरत तिवारी पर गोलियां चलाईं, जिससे उनकी मौत हो गई।
पुलिस के मुताबिक, 16 जून को भरत तिवारी शाहपुर पुलिस को पिस्टल लेकर धमकाते हुए दिखाई दिए थे। इसके अगले दिन, 17 जून को, पुलिस का कहना है कि भरत ने हथियार फेंककर सरेंडर कर दिया था, लेकिन फिर भी आत्मरक्षा में उन्हें 5 गोलियां मारी गईं।
भरत को इलाज के लिए पटना ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। हालांकि, भरत के परिवार और कई स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने हथियार फेंक दिए थे और पुलिस ने निहत्थे शख्स पर गोली चलाई, जिसे एनकाउंटर नहीं कहा जा सकता।
आक्रोश और शुरुआती कार्रवाई
भरत तिवारी की मौत के बाद भोजपुर में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। 18 जून को बड़ी संख्या में लोगों ने हाई-वे जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव इतना बढ़ गया कि पुलिस को लोगों पर बंदूकें ताननी पड़ीं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
लोगों के इस भारी आक्रोश और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, 20 जून को पुलिस विभाग ने एक आंतरिक जांच शुरू की। इस जांच में कुछ पुलिसकर्मियों की लापरवाही पाई गई।
इसके बाद, शाहपुर SHO राजेश मालाकार समेत चार पुलिसकर्मियों को तुरंत निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई इस बात का संकेत थी कि मामला सिर्फ एक सामान्य पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि इसमें कहीं न कहीं चूक हुई है।
नेताओं और हस्तियों का तांता
भरत तिवारी की मौत के बाद से ही बिलौटी गांव में नेताओं और मशहूर हस्तियों का आना-जाना लगा हुआ है। इस घटना ने बिहार की राजनीति में भी उबाल ला दिया है।
परिवार से मिलने और सांत्वना देने वालों की लंबी फेहरिस्त है:
- 21 जून: बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम परिवार से मिलने पहुंचे और अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
- 22 जून: भोजपुरी फिल्मों के जाने-माने अभिनेता खेसारी लाल यादव ने भरत के परिवार से मुलाकात की और दुख जताया।
- 23 जून: ज्योति सिंह भी परिवार से मिलने पहुंचीं। इसी दिन बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मदन मोहन झा भी बिलौटी गांव पहुंचे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर कोई व्यक्ति निहत्था हो तो उसके खिलाफ इस तरह की कार्रवाई को एनकाउंटर नहीं कहा जा सकता।
- 24 जून: चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भरत के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो वह आंदोलन छेड़ देंगे। इसी दिन, एनकाउंटर के आठवें दिन, रात के वक्त एसपी भी परिजनों से मिलने पहुंचे।
- 27 जून: उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने परिवार से मुलाकात की। उन्होंने भरत की मां के पैर छूकर कहा कि उनका बेटा 'वीर' था, और अगर न्याय नहीं मिला तो आंदोलन होगा। इसी दिन हरियाणा के कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स भी बिलौटी गांव पहुंचे और भरत की मां को गले लगाकर सांत्वना दी।
- 29 जून: बक्सर के विधायक आनंद मिश्रा भी भरत के घर पहुंचे। उन्होंने भी सार्वजनिक रूप से माना कि यह एनकाउंटर गलत हुआ है।
इन सभी मुलाकातों और बयानों ने इस मामले को और भी ज्यादा सुर्खियों में ला दिया है, और पुलिस तथा सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
बिलौटी गांव में हुई महापंचायत
इस पूरे मामले को लेकर बिलौटी गांव में एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया था, जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। इस महापंचायत में न सिर्फ स्थानीय लोग, बल्कि आसपास के जिलों और अन्य राज्यों से भी लोग पहुंचे थे।
बताया गया कि 1 हजार से ज्यादा गाड़ियों से लोग बिलौटी गांव पहुंचे थे, जो इस महापंचायत की व्यापकता को दर्शाता है। महापंचायत में शामिल कई लोगों के हाथों में तिरंगा झंडा दिखाई दिया, जो न्याय की मांग को एक राष्ट्रीय पहचान देने की कोशिश थी।
महापंचायत के दौरान भरत तिवारी के घर पर लोगों ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों का गुस्सा साफ दिख रहा था और वे इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
महापंचायत के बाद गांव में 'शहीद भरत नगर जवइनिया' का बोर्ड भी लगाया गया, जिससे यह साफ है कि स्थानीय लोग भरत को एक शहीद के तौर पर देख रहे हैं। यह महापंचायत एक तरह से सरकार और प्रशासन को साफ संदेश था कि लोग इस घटना को आसानी से भूलने वाले नहीं हैं और न्याय के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
आज की तेरहवीं भी उसी जन-आक्रोश और न्याय की मांग का एक बड़ा हिस्सा है, जहां हजारों आंखें सिर्फ इंसाफ का इंतजार कर रही हैं।

