न्यू यॉर्क: दुनिया के सबसे बड़े दानदाताओं में से एक वॉरेन बफे ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने बिल गेट्स की फाउंडेशन को सवालों के घेरे में ला दिया है। बर्कशायर हैथवे के चेयरमैन बफे ने इस साल गेट्स फाउंडेशन को दिया जाने वाला अपना अरबों डॉलर का नियमित मध्य-वर्षीय दान रोक दिया है। वजह? दिवंगत यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन और फाउंडेशन के पुराने संबंधों की एक बाहरी समीक्षा। यह खबर वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय जगत में खलबली मचा दी है।
यह कोई छोटा-मोटा फैसला नहीं है। वॉरेन बफे पिछले दो दशकों से गेट्स फाउंडेशन को दिल खोलकर दान देते रहे हैं, जिसकी कुल राशि 47 अरब डॉलर से भी ज़्यादा है।
ऐसे में उनका अचानक दान रोकना, यह बताता है कि मामला कितना गंभीर हो सकता है। फिलहाल, बफे इस बाहरी समीक्षा रिपोर्ट के आने का इंतज़ार कर रहे हैं, जो गर्मियों में किसी भी वक्त आ सकती है।
इसके बाद ही वे दान पर अपना अंतिम फैसला लेंगे, शायद अपनी थैंक्सगिविंग चिट्ठी जारी करते समय, जैसा कि रिपोर्टों में बताया गया है।
गेट्स फाउंडेशन के सीईओ मार्क सुजमैन ने एपस्टीन से जुड़े फाउंडेशन के पुराने संपर्कों की एक स्वतंत्र जांच शुरू कराई है। यह जांच इसलिए जरूरी हो गई, क्योंकि फाउंडेशन उस वक्त विवादों में आ गया था, जब अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी कुछ ईमेल में एपस्टीन और फाउंडेशन के कर्मचारियों के बीच हुई बातचीत का जिक्र सामने आया।
यह मामला अब इतना बड़ा हो गया है कि वॉरेन बफे जैसे दिग्गज भी इस पर अपनी पैनी नज़र बनाए हुए हैं, और समीक्षा पूरी होने तक अपने दान को रोककर एक कड़ा संदेश दे रहे हैं।
जेफ्री एपस्टीन कनेक्शन: एक पुराना और गहरा दाग
जेफ्री एपस्टीन का नाम दुनिया भर में यौन अपराधों और मानव तस्करी के लिए बदनाम है। उनके संबंधों का जाल बहुत दूर तक फैला हुआ था, और कई बड़ी हस्तियों के नाम भी उनके साथ जोड़े जाते रहे हैं।
गेट्स फाउंडेशन के लिए यह एक मुश्किल स्थिति है, क्योंकि उनके कर्मचारियों और एपस्टीन के बीच संवाद के सबूत सामने आए हैं। इन्हीं सबूतों के आधार पर एक स्वतंत्र जांच चल रही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और फाउंडेशन अपनी पारदर्शिता पर लगे दाग को धो सके।
यह जांच सिर्फ वित्तीय लेनदेन की नहीं, बल्कि नैतिक और प्रतिष्ठा से जुड़े गहरे सवालों की भी है।
वॉरेन बफे, जो अपनी नैतिक और व्यावसायिक शुचिता के लिए जाने जाते हैं, उनका यह कदम दिखाता है कि वे किसी भी तरह के संदेह या विवाद से दूरी बनाए रखना चाहते हैं। उनकी बर्कशायर हैथवे कंपनी का नाम भी किसी विवाद में न फंसे, यह उनकी प्राथमिकता है।
यह घटना बिल गेट्स के लिए भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि उनकी फाउंडेशन दुनिया भर में स्वास्थ्य, शिक्षा और गरीबी उन्मूलन के लिए काम करती है। ऐसे में इस तरह के आरोपों का असर उनके महान परोपकारी कार्यों पर भी पड़ सकता है।
रॉयटर्स के अनुसार, इस मामले पर बर्कशायर हैथवे और गेट्स फाउंडेशन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है, और एजेंसी स्वतंत्र रूप से वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट की पुष्टि भी नहीं कर सकी है। यह स्थिति मामले को और भी रहस्यमयी और पेचीदा बना देती है।
चीन के पूर्व अरबपति गुओ वेनगुई को अमेरिकी जेल में 30 साल की सज़ा
एक और चौंकाने वाली अंतरराष्ट्रीय खबर में, चीन के पूर्व अरबपति कारोबारी और अपनी सरकार के मुखर आलोचक गुओ वेनगुई को अमेरिका की एक अदालत ने 1 अरब डॉलर से ज़्यादा की निवेश धोखाधड़ी के मामले में 30 साल कैद की सज़ा सुनाई है। यह उन लोगों के लिए एक बड़ा झटका है, जिन्होंने गुओ पर भरोसा किया था और लोकतंत्र समर्थक गतिविधियों के नाम पर अपनी मेहनत की कमाई उनके हवाले कर दी थी।
न्यूयॉर्क की जज एनालिसा टोरेस ने अपने फैसले में साफ कहा कि गुओ ने चीन में लोकतंत्र की उम्मीद रखने वाले लोगों का शोषण किया। उन्हें रैकेटियरिंग, धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग सहित कई गंभीर आरोपों में दोषी ठहराया गया है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, गुओ ने 2018 से 2023 के बीच अपने ऑनलाइन समर्थकों से निवेश और क्रिप्टोकरेंसी योजनाओं के जरिए एक अरब डॉलर से भी ज़्यादा की रकम जुटाई। लेकिन इस पैसे का इस्तेमाल उन्होंने गरीबों या लोकतंत्र के लिए नहीं, बल्कि अपने आलीशान जीवन पर किया।
आरोप है कि गुओ ने इस धोखाधड़ी के पैसों से 50 हज़ार वर्गफुट की एक शानदार हवेली, 10 लाख डॉलर की लेम्बोर्गिनी कार और 3.7 करोड़ डॉलर की एक विशालकाय यॉट (नाव) जैसी महंगी संपत्तियां खरीदीं।
हालांकि, गुओ ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है और उनका कहना था कि यह रकम उनके राजनीतिक अभियान और चीन में लोकतंत्र समर्थक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल की गई थी। गुओ 2017 में चीन में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद अमेरिका चले गए थे और वहां खुद को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के एक बड़े आलोचक के रूप में स्थापित किया था, जिससे उन्होंने बड़ी संख्या में ऑनलाइन समर्थक भी जुटा लिए थे।
यह मामला दिखाता है कि कैसे सत्ता के आलोचक भी कई बार अपने ही समर्थकों का विश्वास तोड़ सकते हैं।
किंग चार्ल्स III: आस्था के रक्षक का ऐतिहासिक खिताब और आधुनिक बदलाव
ब्रिटेन के राजशाही से जुड़ी एक दिलचस्प खबर है। किंग चार्ल्स तृतीय के आधिकारिक कार्य विवरण से 500 साल पुरानी 'डिफेंडर ऑफ द फेथ' (आस्था के रक्षक) की उपाधि हटा दी गई है।
यह एक ऐतिहासिक बदलाव है, जो आधुनिक ब्रिटेन की बदलती हुई तस्वीर को दर्शाता है। यह उपाधि मूल रूप से हेनरी अष्टम को पोप लियो दशम द्वारा दी गई थी, जब उन्होंने मार्टिन लूथर के सुधारों के खिलाफ लिखा था।
तब से यह ब्रिटिश सम्राटों के साथ जुड़ी हुई थी, और इसका मुख्य संबंध इंग्लैंड के चर्च से था।
2025-26 की सॉवरेन ग्रांट रिपोर्ट में अब किंग चार्ल्स को इंग्लैंड चर्च का सुप्रीम गवर्नर और ब्रिटेन के बहुधार्मिक समाज में आस्था के लिए स्थान की रक्षा करने वाला बताया गया है। यह नई भाषा पिछले साल की रिपोर्ट से काफी अलग है, जिसमें चार्ल्स को 'हेड ऑफ द चर्च ऑफ इंग्लैंड एंड डिफेंडर ऑफ द फेथ' कहा गया था।
इस बदलाव से यह संकेत मिलता है कि ब्रिटिश राजशाही अब सिर्फ एक धर्म विशेष (एंग्लिकनवाद) की संरक्षक नहीं रह गई है, बल्कि पूरे ब्रिटेन के विविध धार्मिक परिदृश्य को समाहित करने की कोशिश कर रही है।
यह कदम किंग चार्ल्स की उस इच्छा को भी दर्शाता है कि वे सभी धर्मों और आस्थाओं का सम्मान करें और एक ऐसे राष्ट्र में धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा दें, जहां कई संस्कृतियां और मान्यताएं एक साथ पनपती हैं। इस नए विवरण के साथ, किंग चार्ल्स ब्रिटिश समाज की आधुनिक और समावेशी भावना के अनुरूप अपनी भूमिका को और व्यापक बना रहे हैं, जो एक महत्वपूर्ण सांकेतिक परिवर्तन है।

