अयोध्या: राम मंदिर से जुड़ा चोरी का मामला इन दिनों यूपी में खूब गरमाया हुआ है. अभी तक चोरी गए चढ़ावे, गहनों और नगदी की बात थी, लेकिन अब तो मामला एकदम खुलासे दर खुलासे पर आ गया है. हुआ यूं कि जब पुलिस ने राम मंदिर से चढ़ावा चुराने के आरोप में जेल में बंद अविनाश शुक्ला के अयोध्या वाले योग केंद्र पर छापा मारा, तो वहां से जो मिला, वो सुनकर आपके कान खड़े हो जाएंगे. पुलिस को वहां एक बक्सा मिला, जिसे देखकर लग रहा था कि ये कोई पुराना सामान नहीं, बल्कि साफ़-सुथरा डिब्बा है. उस पर बड़े-बड़े लाल अक्षरों में लिखा था 'रामराज्य कोष'. और तो और, उस पर बकायदा एक पेटीएम का क्यूआर कोड भी चिपका हुआ था. जनाब, सोचिए एक तरफ राम मंदिर का पवित्र नाम, दूसरी तरफ चोरी के आरोप में पकड़े गए शख्स के ठिकाने से ऐसा 'कोष' मिलना. इस छापेमारी का एक वीडियो भी अब सामने आ गया है, जिसने पूरे मामले में आग में घी डालने का काम किया है.
पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, अब तक गिरफ्तार किए गए सभी आठों आरोपियों से पूछताछ का सिलसिला तेज कर दिया है. ये सभी आरोपी इस वक्त फैजाबाद जेल में बंद हैं.
इनमें से अविनाश शुक्ला वो शख्स है, जिससे सबसे लंबी पूछताछ की गई. करीब दो घंटे तक चली इस पूछताछ में पुलिस ने अविनाश से 5 जून को बरामद हुए 20 लाख रुपए नकद और बेशकीमती गहनों के बारे में कई तीखे सवाल पूछे.
ये तो हुई पकड़े गए आरोपियों की बात, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि अब इसकी आंच मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था तक भी पहुंच गई है.
राम मंदिर की सुरक्षा में सेंध: 400 सुरक्षाकर्मी भी लपेटे में
अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर की सुरक्षा एक बड़ा मसला है और इस चोरी के बाद अब तो पूरी सुरक्षा व्यवस्था ही सवालों के घेरे में आ गई है. जानकारी के मुताबिक, मंदिर परिसर में तैनात करीब 400 निजी सुरक्षाकर्मी भी पुलिस की जांच के दायरे में हैं.
पुलिस अब उनकी ड्यूटी, उनके रोस्टर, सीसीटीवी फुटेज और उनकी एंट्री-एग्जिट के रिकॉर्ड खंगाल रही है. आप खुद सोचिए, जहां 400 लोग सुरक्षा में लगे हों, वहां इतनी बड़ी चोरी कैसे हो गई?
सूत्रों से जो जानकारी सामने आ रही है, वो और भी चौंकाने वाली है. बताया जा रहा है कि मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा एक निजी सुरक्षा कंपनी के पास था, जिसके तार बिहार के एक पूर्व सांसद से जुड़े हुए हैं.
राम मंदिर ट्रस्ट हर महीने इस कंपनी पर करीब 1 करोड़ रुपए खर्च करता है. यानी साल भर का हिसाब लगाएं तो ये आंकड़ा करीब 12 करोड़ रुपए तक पहुंच जाता है.
इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद भी अगर मंदिर में चोरी हो जाए, तो ये अपने आप में एक गंभीर सवाल खड़ा करता है.
सिर्फ संदूक ही नहीं, पुलिस को अविनाश शुक्ला के अयोध्या स्थित योग केंद्र से राम मंदिर से जुड़े कई महत्वपूर्ण कागजात और किताबें भी मिली हैं. अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इन कागजातों और किताबों का चोरी के मामले से क्या लेना-देना है.
चंपत राय से लंबी पूछताछ और RMO का तबादला
इस पूरे मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की भूमिका पर भी सवाल उठे. पुलिस ने बीते रविवार को उनसे करीब 3 घंटे तक पूछताछ की.
पुलिस ने उनसे जानना चाहा कि उन्हें चढ़ावा चोरी का पता पहली बार कब और कैसे चला? और जब उन्हें पता चला, तो उसके बाद उन्होंने क्या-क्या कदम उठाए? ये पूछताछ बताती है कि पुलिस अब इस मामले की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.
इससे पहले, कोर्ट ने सोमवार को चढ़ावा चोरी में गिरफ्तार किए गए सभी 8 आरोपियों की न्यायिक हिरासत को 14 दिन और बढ़ा दिया है. इसका मतलब है कि अभी इन सभी को जेल में ही रहना होगा और जांच का सिलसिला जारी रहेगा.
एक और बड़ी खबर जो इस मामले से जुड़कर सामने आई है, वो है राम मंदिर में पिछले 17 साल से तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (RMO) अर्जुन देव का तबादला. उन्हें गोरखपुर भेज दिया गया है.
एसआईटी (SIT) ने उनकी भूमिका को भी अपनी जांच के दायरे में लिया है. जनाब, ये कोई छोटी बात नहीं है.
RMO अर्जुन देव के पास ही मंदिर परिसर में लगे 1600 कैमरों की निगरानी की जिम्मेदारी थी. इसमें वो सीसीटीवी भी शामिल थे, जो चढ़ावे की गिनती वाले 'काउंटिंग रूम' में लगे हुए थे.
अब ऐसे में उनका तबादला होना, कई तरह के सवाल खड़े करता है.
चोरी का खुलासा और SIT का गठन: कब क्या हुआ?
इस पूरे मामले का खुलासा पहली बार 7 जून को हुआ था. जब चोरी की खबर सामने आई, तो पूरे यूपी में हड़कंप मच गया.
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 13 जून को एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया, ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके.
एसआईटी ने अपनी जांच शुरू की और 25 जून को इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई. इसी दिन पुलिस ने रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.
और हां, इसी दिन राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा भी दे दिया.
इन इस्तीफों ने मामले को और भी ज्यादा सनसनीखेज बना दिया. अब देखना ये होगा कि इस जांच में और कितने बड़े खुलासे होते हैं और कौन-कौन से नए नाम सामने आते हैं.

