अयोध्या: मंगलवार की सुबह अयोध्या शहर और उसके आसपास का इलाका जब नींद से जागा, तो एक अलग ही नज़ारा था। पिछले कई दिनों से जिस चिपचिपी उमस और चुभती गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा था, उस पर अचानक ठंडी फुहारों ने ब्रेक लगा दिया। तड़के-तड़के आसमान से बादल ऐसे बरसे कि सड़कों पर पानी भर गया और हवा में एक नई ताजगी घुल गई। जैसे किसी ने तपते तवे पर ठंडा पानी डाल दिया हो, लोगों को झुलसाती गर्मी से फ़ौरी राहत मिली। सुबह आंख खुलते ही जब लोगों ने खिड़की से बाहर देखा तो बारिश की बूंदें और ठंडी हवा का झोंका मानो कह रहा था, "लो भई, अब थोड़ी चैन की सांस लो!"
दरअसल, पिछले कुछ हफ़्तों से अयोध्या सहित पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश में गर्मी का क़हर जारी था। पारा 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास मंडरा रहा था और ऊपर से हवा में नमी की मात्रा इतनी ज़्यादा थी कि लोग पसीने से तर-बतर हो रहे थे।
पंखे और कूलर भी मानो गर्म हवा फेंक रहे थे। दिन में धूप इतनी तेज़ होती थी कि लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे थे।
शाम को भी आसमान में तारों की जगह उमस का जाल बिछा रहता था। ऐसे में यह अचानक हुई बारिश किसी वरदान से कम नहीं थी, जिसने लोगों के चेहरों पर सुकून की मुस्कान ला दी।
बच्चों ने जहां बारिश में भीगने का मज़ा लिया, वहीं बड़े-बुजुर्गों ने राहत की सांस ली।
यह मौसम का अचानक बदला मिजाज़ आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज में स्थित मौसम वेधशाला के आंकड़ों में भी साफ़ दिख रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, मंगलवार को अधिकतम तापमान 38.
0 डिग्री सेल्सियस तक जाने का अनुमान लगाया गया है, जो कि बीते दिनों के मुकाबले थोड़ी राहत देने वाला है। लेकिन सिर्फ तापमान का नीचे आना ही सब कुछ नहीं है, असल बात तो वो नमी है, जो अब हवा में घुल चुकी है और जिसने शहर को तरोताज़ा कर दिया है।
मौसम वैज्ञानिक क्या कहते हैं; उमस क्यों थी?
इस बदलते मौसम के मिजाज़ को लेकर आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. सीताराम मिश्रा ने विस्तार से जानकारी दी है।
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों वातावरण में नमी की मात्रा बहुत ज़्यादा थी, यही वजह थी कि बादलों के होने के बावजूद तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ था। आप इसे ऐसे समझिए कि हवा में पानी की बूंदें तो थीं, लेकिन वो इतनी भारी नहीं थीं कि बरस सकें और ज़मीन तक पहुँच सकें।
ये नमी ही थी जो उमस बनकर लोगों को परेशान कर रही थी। जब आप घर से बाहर निकलते थे, तो ऐसा लगता था जैसे किसी गर्म भाप के कमरे में आ गए हों।
डॉ. मिश्रा ने साफ किया कि बादलों का दिखना अक्सर तापमान गिराता है, लेकिन इस बार नमी की अधिकता ने इस प्रक्रिया को रोक रखा था, जिससे लोगों को ज़्यादा गर्मी और असहजता महसूस हो रही थी।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में हुई बारिश ने हवा में मौजूद इस अतिरिक्त नमी को कुछ हद तक कम किया है, जिससे अब हवा थोड़ी सूखी और ठंडी महसूस हो रही है।
यह बारिश कोई बहुत व्यापक मानसून की शुरुआत नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर हुई एक मौसमी गतिविधि है जिसने गर्मी के चक्र को कुछ समय के लिए तोड़ दिया है। लेकिन, ये संकेत ज़रूर देते हैं कि अब मानसून पूर्वी उत्तर प्रदेश की तरफ धीरे-धीरे अपने क़दम बढ़ा रहा है।
लोगों को अब भी एहतियात बरतने की ज़रूरत है, क्योंकि मौसम कभी भी पलट सकता है।
किसानों और आम जनमानस के लिए सलाह
इस बदलते मौसम के बीच, मौसम विशेषज्ञों ने आम जनता और ख़ासकर किसानों को कुछ अहम सलाह भी दी है। आम लोगों से कहा गया है कि वे इस अत्यधिक उमस और गर्मी से बचाव के लिए ज़्यादा से ज़्यादा पानी पिएं।
शरीर को हाइड्रेटेड रखना इस मौसम में सबसे ज़रूरी है, क्योंकि पसीना बहुत निकलता है और शरीर से तरल पदार्थ बाहर चले जाते हैं। बेवजह दोपहर की तेज़ धूप में बाहर निकलने से भी परहेज़ करने की सलाह दी गई है, क्योंकि अभी भी पूरी तरह से गर्मी खत्म नहीं हुई है और धूप की चुभन बरकरार है।
छाता, टोपी या सूती कपड़े पहनकर ही घर से निकलना सही रहेगा।
बात करें किसानों की तो उनके लिए यह समय और भी महत्वपूर्ण है। उन्हें मौसम के पूर्वानुमान के हिसाब से अपने कृषि कार्यों की योजना बनाने को कहा गया है।
जैसे अगर हल्की बारिश होती है, तो यह धान की नर्सरी के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन अगर ज़्यादा बारिश की आशंका हो, तो जल निकासी का प्रबंध करना भी ज़रूरी होगा। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फ़सलों को लेकर कोई भी बड़ा फ़ैसला लेने से पहले स्थानीय कृषि विभाग या मौसम विभाग से संपर्क ज़रूर करें।
यह हल्की बारिश मिट्टी में नमी बढ़ा सकती है, जो आने वाली खरीफ फ़सलों के लिए एक अच्छी शुरुआत हो सकती है, लेकिन इसकी व्यापकता पर अभी भी नज़र बनाए रखनी होगी।
आगे क्या; मानसून की दस्तक?
डॉ. सीताराम मिश्रा के मुताबिक, आगामी 24 घंटों के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में हल्के से मध्यम बादल छाए रहने की संभावना है।
इसका मतलब है कि आसमान पूरी तरह से साफ़ नहीं रहेगा, बल्कि बादल आते-जाते रहेंगे। इस अवधि में कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ हल्की बूंदाबांदी या हल्की वर्षा भी देखने को मिल सकती है।
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अब लगातार झमाझम बारिश होने वाली है, बल्कि यह एक तरह की प्री-मानसून गतिविधि है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी व्यापक और लगातार बारिश की संभावना थोड़ी कम है, लेकिन इन हल्की-फुल्की फुहारों से तापमान में थोड़ी और गिरावट आ सकती है और उमस से भी कुछ हद तक राहत मिल सकती है।
लोगों को अभी भी पूरी तरह से गर्मी के जाने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, लेकिन यह बदलाव निश्चित रूप से सुकून देने वाला है।

