अयोध्या: भगवान राम की नगरी अयोध्या, जो इन दिनों अपनी भव्यता और आस्था के केंद्र के रूप में पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है, आज एक अलग ही वजह से सुर्खियां बटोर रही है। यहां मंगलवार को उस वक्त सियासी हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को पुलिस ने उनके घर में ही रोक लिया। राय, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर लगे चढ़ावा चोरी के गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर एक बड़े प्रदर्शन की तैयारी में थे। लेकिन पुलिस की मुस्तैदी ने उन्हें ट्रस्ट कार्यालय पहुंचने से पहले ही रोक दिया और उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
यह घटना सिर्फ एक नेता की गिरफ्तारी भर नहीं है, बल्कि अयोध्या की संवेदनशील भूमि पर राजनीति, धर्म और कानून व्यवस्था के बीच खिंच रही बारीक लकीरों को भी दर्शाती है। कांग्रेस का आरोप है कि राम मंदिर निर्माण के लिए आए चढ़ावे में धांधली हुई है और वे इसकी जांच चाहते हैं।
दूसरी ओर, प्रशासन किसी भी कीमत पर रामनगरी में शांति भंग नहीं होने देना चाहता, खासकर ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर। इसी खींचतान का नतीजा था कि अजय राय समेत कांग्रेस के कई बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया, जिससे माहौल गरमा गया।
चढ़ावा प्रकरण और कांग्रेस का आर-पार का मूड
दरअसल, यह पूरा मामला 'राम जन्मभूमि चढ़ावा प्रकरण' से जुड़ा है। कांग्रेस का आरोप है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चढ़ावे में हेरफेर किया गया है।
यह आरोप ऐसे समय में लगे हैं जब अयोध्या में राम मंदिर का भव्य निर्माण चल रहा है और देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के साथ दान और चढ़ावा भेज रहे हैं। ऐसे में चढ़ावे में कथित चोरी या धांधली की बात सामने आने पर कांग्रेस ने इसे एक बड़ा मुद्दा बनाने का फैसला किया।
प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने ऐलान किया था कि वे खुद अयोध्या पहुंचकर ट्रस्ट कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करेंगे, ताकि सरकार और ट्रस्ट पर निष्पक्ष जांच का दबाव बनाया जा सके। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि भगवान राम के नाम पर आए दान में अगर कोई गड़बड़ी होती है, तो यह करोड़ों भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कांग्रेस कार्यकर्ता सुबह से ही एकजुट होना शुरू हो गए थे। उनका मकसद था कि वे ट्रस्ट कार्यालय तक मार्च करें और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करें।
इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य था कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द एक निष्पक्ष जांच बैठाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। कांग्रेस के लिए यह एक मौका था कि वे अयोध्या जैसे धार्मिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर में अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकें और जनता के बीच अपनी आवाज बुलंद कर सकें।
पुलिस की चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था
कांग्रेस के इस बड़े प्रदर्शन के ऐलान को देखते हुए अयोध्या प्रशासन पहले से ही अलर्ट पर था। रामनगरी में शांति व्यवस्था बनाए रखना हमेशा से ही प्रशासन की पहली प्राथमिकता रही है।
पुलिस ने प्रदर्शन को रोकने के लिए व्यापक तैयारियां की थीं। शहर के चप्पे-चप्पे पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया था।
संवेदनशील स्थानों और खासकर ट्रस्ट कार्यालय के आसपास सुरक्षा घेरा इतना मजबूत था कि परिंदा भी पर न मार सके। पुलिस के जवान और प्रशासनिक अधिकारी बड़ी संख्या में सुबह से ही सड़कों पर उतर आए थे।
प्रशासन ने साफ कर दिया था कि किसी भी सूरत में कानून व्यवस्था को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। इसके मद्देनजर, सिर्फ अजय राय ही नहीं, बल्कि अयोध्या में स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के कई अन्य नेताओं को भी एहतियातन उनके घरों में ही रोक दिया गया था।
यानी, यह एक सुनियोजित कार्रवाई थी, ताकि प्रदर्शन को शुरू होने से पहले ही कुचला जा सके। कुमारगंज विश्वविद्यालय परिसर को अस्थायी तौर पर ऐसे नेताओं को रखने के लिए तैयार किया गया था, जिन्हें हिरासत में लिया जाना था।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उनका एकमात्र उद्देश्य शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है और इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
अजय राय और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का घटनाक्रम
मंगलवार की सुबह, जैसे ही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और उनके समर्थक ट्रस्ट कार्यालय की ओर बढ़ने लगे, पुलिस ने उन्हें निर्धारित स्थान पर रोक दिया। शुरुआती तौर पर पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से मना किया, लेकिन जब कार्यकर्ताओं ने अपनी बात पर अड़े रहते हुए आगे बढ़ने का प्रयास किया, तो पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की।
अजय राय को हिरासत में ले लिया गया। उनके साथ मौजूद कई अन्य कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने रोका और उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया।
यह कार्रवाई बेहद तेज और सुनियोजित तरीके से की गई। हिरासत में लिए जाने के बाद, अजय राय को अयोध्या के कुमारगंज विश्वविद्यालय परिसर ले जाया गया, जहां उन्हें कुछ समय के लिए रखा गया।
इस पूरी घटना के दौरान, घटनास्थल पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने कड़ी निगरानी रखी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी गिरफ्तारी का विरोध किया, लेकिन पुलिस की भारी मौजूदगी के कारण उनकी संख्या का बल काम नहीं आया।
इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि अयोध्या में राजनीतिक विरोध प्रदर्शन करना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर जब मामला राम मंदिर जैसे संवेदनशील विषय से जुड़ा हो। प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।
अब देखना यह है कि कांग्रेस इस मुद्दे को आगे कैसे ले जाती है और चढ़ावे की कथित चोरी का यह मामला क्या मोड़ लेता है।

