अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में बुधवार की सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब रुदौली के पटरंगा थाना क्षेत्र में एक युवक मोबाइल टावर पर चढ़ गया। करीब 11 बजे कूड़ासादब स्थित इस मोबाइल टावर पर चढ़ा ये युवक कोई पब्लिसिटी स्टंट नहीं कर रहा था, बल्कि उसकी आंखों में एक गहरी निराशा और दिल में गुस्से का ज्वालामुखी धधक रहा था। वजह थी विदेश में नौकरी का सुनहरा सपना दिखाकर की गई लाखों की ठगी, जिसके बाद न तो उसे विदेश भेजा गया और न ही उसके पैसे वापस मिले। पुलिस की बार-बार शिकायत के बाद भी जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो इस हताश युवक ने अपनी आवाज प्रशासन तक पहुंचाने के लिए ये खतरनाक कदम उठा लिया।
ये कहानी है पटरंगा थाना क्षेत्र के कटिहार पुरवा (पोस्ट गेरड़ा) के रहने वाले 30 साल के संजय पुत्र रामधीरज की। संजय ने भी अपने भविष्य के लिए कुछ सपने देखे थे।
एक बेहतर जिंदगी, शायद कुछ पैसों की उम्मीद, जो उसे विदेश में काम करके मिल सकती थी। लेकिन उसके ये सपने उस वक्त चकनाचूर हो गए, जब उसे एक ऐसे शख्स पर भरोसा करना महंगा पड़ गया, जिसने उसे सात समंदर पार भेजने का झांसा दिया और बदले में उसकी गाढ़ी कमाई के लाखों रुपये ऐंठ लिए।
संजय के आरोप के मुताबिक, घरौंडा निवासी मकसूद पुत्र पुत्तन ने उसे विदेश भेजने के नाम पर 1 लाख 55 हजार रुपये लिए थे। ये रकम संजय के लिए छोटी नहीं थी।
ये उसके भविष्य का निवेश था, उसके परिवार की उम्मीदें थीं। लेकिन वादे के मुताबिक न तो उसे विदेश भेजा गया और न ही मकसूद ने उसकी रकम वापस की।
संजय ने मकसूद के चक्कर काटे, उससे अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन हर बार उसे टालमटोल का सामना करना पड़ा।
ठगी के बाद की जद्दोजहद और पुलिस की 'कार्रवाई'
मकसूद द्वारा ठगे जाने के बाद संजय और उसके परिवार की परेशानी बढ़ती गई। हर दिन गुजरने के साथ उनके माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही थीं।
संजय ने कई बार अपने पैसे वापस मांगने की कोशिश की, लेकिन मकसूद ने उसे कोई जवाब नहीं दिया। थक हारकर संजय ने कानून का दरवाजा खटखटाया।
परिजनों ने बताया कि संजय ने पटरंगा थाने में कई बार प्रार्थना पत्र दिए, एफआईआर दर्ज कराने की गुहार लगाई, लेकिन उनके मुताबिक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
परिवार का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच एक बार समझौता भी कराया गया था। पुलिस अधिकारियों ने संजय को भरोसा दिलाया था कि उसके पैसे जल्द ही वापस मिल जाएंगे।
शायद संजय ने उस वक्त थोड़ी राहत महसूस की होगी, उसे लगा होगा कि अब उसकी समस्या का समाधान हो जाएगा। लेकिन ये राहत ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाई।
पुलिस द्वारा दिलाए गए आश्वासन के बावजूद, मकसूद ने संजय के पैसे वापस नहीं किए। महीनों बीत गए, और संजय के हाथ खाली ही रहे।
बार-बार शिकायतें, पुलिस का समझौता, और फिर भी खाली हाथ..
. ये सब संजय के मन में गहरे जख्म दे रहे थे।
उसे लगा कि उसकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिस कानून और प्रशासन से उसे मदद की उम्मीद थी, वहां से भी उसे निराशा ही मिली।
इस पूरी घटना ने उसे अंदर से तोड़ दिया था।
निराशा की पराकाष्ठा: टावर पर चढ़ा युवक
अपने पैसे वापस पाने की हर कोशिश जब नाकाम हो गई, और उसे लगा कि अब उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा है, तब बुधवार सुबह करीब 11 बजे संजय ने कूड़ासादब स्थित मोबाइल टावर पर चढ़ने का फैसला किया। यह कदम उसकी हताशा और न्याय की आखिरी गुहार थी।
टावर पर चढ़ते ही इलाके में खबर फैल गई। देखते ही देखते मौके पर भारी संख्या में ग्रामीण और राहगीर जमा हो गए।
हर कोई जानने को बेताब था कि आखिर ये युवक टावर पर क्यों चढ़ा है।
सूचना मिलते ही पटरंगा पुलिस और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने तुरंत संजय को नीचे उतारने की कोशिशें शुरू कर दीं।
अधिकारी उससे बातचीत कर उसे समझाने-बुझाने में जुट गए। यह एक तनावपूर्ण स्थिति थी, जहां एक तरफ प्रशासन युवक की जान बचाने की कोशिश कर रहा था, वहीं दूसरी तरफ युवक अपनी मांगों पर अड़ा हुआ था।
इस पूरे मामले पर एसपी ग्रामीण बलवंत चौधरी का बयान भी आया। उन्होंने बताया कि युवक को सुरक्षित नीचे उतारने का प्रयास जारी है और उससे लगातार बातचीत की जा रही है।
हालांकि, पुलिस पर लगाए गए आरोपों को उन्होंने निराधार बताया। एसपी ग्रामीण ने कहा कि युवक को कुछ पैसे पहले ही वापस कराए जा चुके हैं।
अब सवाल यह है कि अगर पैसे वापस मिल गए थे, तो संजय ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया? क्या वाकई उसे सिर्फ 'कुछ पैसे' वापस मिले थे, या पूरी रकम का अभी भी इंतजार है? यह एक ऐसी गुत्थी है जिसे सुलझाने में अभी समय लगेगा, लेकिन एक बात तय है कि संजय का यह कदम कई सवालों को जन्म दे गया है। अधिकारी अभी भी संजय से बात कर उसे टावर से नीचे उतारने की कोशिश कर रहे हैं।

