जहानाबाद: बिहार के जहानाबाद से एक ऐसी दर्दनाक खबर आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक पिता अपने बीमार दस साल के बेटे को इलाज के लिए ले जा रहा था, लेकिन उसे क्या पता था कि रास्ते में मौत उनके इंतज़ार में बैठी है। पटना-गया नेशनल हाईवे पर हुए एक भयानक हादसे में अज्ञात गाड़ी ने उन्हें रौंद डाला और दोनों की ज़िंदगी की यात्रा वहीं थम गई। यह सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक परिवार की उजड़ती उम्मीदों और एक समुदाय के गहरे आक्रोश की कहानी है।
मामला मंगलवार सुबह का है। अकौना गांव के रहने वाले राम बिनोद पासवान, जो अपने दस वर्षीय बेटे मोनू कुमार को लेकर घर से निकले थे।
मोनू को महावीर कैंसर संस्थान ले जाना था और इसके लिए उन्हें मखदूमपुर स्टेशन से ट्रेन पकड़नी थी। सोचिए, एक पिता की क्या उम्मीदें रही होंगी, क्या सपने संजोए होंगे अपने बीमार बेटे के बेहतर इलाज के लिए।
वो अपनी साइकिल पर बेटे को बिठाकर निकल पड़े थे, लेकिन रास्ते में, वीर्रा मोड़ के पास, उनकी उम्मीदें और ज़िंदगी दोनों एक तेज़ रफ़्तार स्कॉर्पियो के पहियों तले कुचल दी गईं।
एक पिता और बेटे का दर्दनाक सफर
राम बिनोद पासवान और मोनू की यह यात्रा महज़ कुछ किलोमीटर की थी, लेकिन यह उनके जीवन का अंतिम सफर साबित हुई। पिता अपने बेटे को लेकर साइकिल पर जा रहे थे, शायद रास्ते भर उससे बातें कर रहे होंगे, उसे हिम्मत दे रहे होंगे।
अचानक, पीछे से आई एक बेकाबू स्कॉर्पियो ने उनकी साइकिल में इतनी ज़ोरदार टक्कर मारी कि पूरा मंजर ही बदल गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि राम बिनोद पासवान की तो मौके पर ही जान चली गई।
सड़क पर खून और बिखरी हुई साइकिल देखकर ही हादसे की भयावहता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
इस हादसे में दस वर्षीय मोनू भी गंभीर रूप से ज़ख़्मी हो गया। सड़क पर पिता का बेजान शरीर और पास में ही दर्द से कराहता बच्चा, यह दृश्य जिसने भी देखा, उसका दिल दहल गया।
आस-पास के लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े। ग्रामीणों ने बिना देर किए घायल बच्चे मोनू को सदर अस्पताल जहानाबाद पहुंचाया।
वहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत पीएमसीएच पटना रेफर कर दिया। हर कोई बस यही दुआ कर रहा था कि मासूम मोनू की ज़िंदगी बच जाए।
अस्पताल की दौड़ और ज़िंदगी की जंग
मोनू को लेकर जहानाबाद से पटना पीएमसीएच तक का सफर उम्मीदों और डर से भरा हुआ था। परिजनों और ग्रामीणों ने पूरी कोशिश की।
लेकिन, दुर्भाग्यवश, मोनू की हालत इतनी नाज़ुक थी कि उसे बचाया नहीं जा सका। पटना रेफर होने के बाद, उसे जहानाबाद के ही एक निजी क्लिनिक में ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
यह खबर जब गांव पहुंची, तो पूरा अकौना गांव मातम में डूब गया। एक ही दिन में एक ही परिवार के दो सदस्यों का यूं चले जाना, किसी पहाड़ टूटने जैसा था।
राम बिनोद और मोनू अब सिर्फ़ यादों में रह गए थे। एक बीमारी से लड़ने वाला बच्चा और उसका सहारा बना पिता, दोनों एक ही सड़क हादसे में ज़िंदगी हार गए।
सड़क पर उतरा जनसैलाब: आक्रोश और इंसाफ की मांग
इस दोहरी मौत की खबर ने जहानाबाद के लोगों में ज़बरदस्त गुस्सा भर दिया। ग्रामीणों का आक्रोश सड़कों पर आ गया।
वीर्रा मोड़ के पास, जहां यह हादसा हुआ था, वहीं पर लोगों ने पटना-गया नेशनल हाईवे (NH-22) को पूरी तरह जाम कर दिया। उनका गुस्सा सिर्फ़ इस हादसे पर नहीं था, बल्कि सड़कों पर बढ़ती लापरवाहियों और ऐसे हादसों के बाद प्रशासन की ढीली कार्रवाई पर भी था।
लोग मुआवजे की मांग कर रहे थे, ताकि कम से कम पीड़ित परिवार को कुछ सहारा मिल सके।
जनाब, जब नेशनल हाईवे जाम होता है, तो शहर की रफ्तार थम जाती है। इस हादसे के बाद लगभग चार घंटे तक NH-22 पर यातायात पूरी तरह ठप रहा।
दोनों तरफ़ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। एंबुलेंस से लेकर ज़रूरी सेवाओं वाले वाहन भी फँस गए।
यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। लेकिन, ग्रामीणों का कहना था कि जब तक उन्हें न्याय और मुआवजा नहीं मिलता, वे सड़क से नहीं हटेंगे।
उनका आक्रोश जायज़ भी था, आख़िर उन्होंने एक साथ दो ज़िंदगी खोई थी।
प्रशासन की समझाइश और जाम का अंत
जाम की सूचना मिलते ही मखदुमपुर थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने-बुझाने की बहुत कोशिश की, उन्हें आश्वासन भी दिया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे।
वे किसी भी बात पर टस से मस होने को तैयार नहीं थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, अंततः अनुमंडल पदाधिकारी (Sub-Divisional Officer) को मौके पर आना पड़ा।
उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की, उनकी पीड़ा समझी और उन्हें उचित कार्रवाई और मुआवजे का आश्वासन दिया।
कई घंटे की मान-मनौवल और प्रशासन के ठोस आश्वासन के बाद, आख़िरकार ग्रामीणों ने जाम खत्म किया। नेशनल हाईवे पर यातायात एक बार फिर शुरू हो सका, लेकिन इस हादसे और उसके बाद उपजे आक्रोश ने जहानाबाद के लोगों के मन में कई सवाल छोड़ दिए हैं।
सड़कों पर कब तक यूं ही जानें जाती रहेंगी? तेज़ रफ्तार और लापरवाही से होने वाले हादसों पर लगाम कब लगेगी? राम बिनोद और मोनू तो लौटकर नहीं आएंगे, लेकिन उनके परिवार को न्याय और बाकी लोगों को सुरक्षित सड़कें मिलें, यही सबकी उम्मीद है। पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है।

