जहानाबाद: राजनीति में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो सिर्फ़ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार, एक आंदोलन बन जाते हैं। ऐसा ही एक नाम था, स्वर्गीय रामविलास पासवान का। एक ऐसा नेता जिसने बिहार की ज़मीन से दिल्ली के गलियारों तक वंचितों और दलितों की आवाज़ बुलंद की। अब उनकी विरासत को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी उनके बेटे चिराग पासवान पर है, लेकिन उनके विचार आज भी उनके लाखों कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। बीते रविवार को जहानाबाद में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कार्यकर्ताओं ने अपने संस्थापक, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पद्म भूषण से सम्मानित रामविलास पासवान की जयंती मनाई। इस मौके पर सिर्फ़ फूल नहीं चढ़ाए गए, बल्कि उनके सपनों को पूरा करने का संकल्प भी दोहराया गया।
यह कार्यक्रम जहानाबाद के एक निजी हॉल में बड़े ही धूमधाम से आयोजित किया गया। हॉल में पार्टी के छोटे से लेकर बड़े पदाधिकारी और आम कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में मौजूद थे।
सबकी आंखों में रामविलास पासवान के प्रति सम्मान और उनके विचारों को आगे बढ़ाने की ललक साफ दिख रही थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता पार्टी के ज़िला अध्यक्ष प्रिंस कुमार ने की।
माहौल ऐसा था, मानो पूरा हॉल रामविलास पासवान के संघर्ष और समर्पण की कहानियों से गूंज रहा हो।
जहानाबाद में जयंती समारोह का आयोजन
जयंती समारोह की शुरुआत दिवंगत नेता रामविलास पासवान के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। एक-एक करके सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
यह केवल एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि अपने नेता के प्रति असीम प्रेम और आदर व्यक्त करने का एक तरीका था। इसके बाद केक काटकर उनकी जयंती का उत्सव मनाया गया, जो यह दर्शाता था कि भले ही रामविलास पासवान आज शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके आदर्श और सिद्धांत आज भी जीवित हैं और लोगों के दिलों में जगह बनाए हुए हैं।
इस पूरे आयोजन में पार्टी के ज़िला पदाधिकारी और बड़ी संख्या में सक्रिय कार्यकर्ता शामिल हुए, जो यह बताने के लिए काफ़ी था कि ज़मीनी स्तर पर भी उनकी विचारधारा कितनी मज़बूत है।
गरीबों और वंचितों के सच्चे हितैषी: रामविलास पासवान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ज़िला अध्यक्ष प्रिंस कुमार ने रामविलास पासवान के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रामविलास पासवान सिर्फ़ एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे गरीबों, दलितों और वंचितों के सच्चे हितैषी थे।
उन्होंने अपना पूरा जीवन सामाजिक न्याय और समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उनकी राजनीति का मूल मंत्र ही हाशिये पर खड़े लोगों को मुख्यधारा में लाना था।
प्रिंस कुमार ने रामविलास पासवान के उस प्रसिद्ध नारे का भी ज़िक्र किया, जो आज भी उनके कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है – “मैं उस घर में दिया जलाने चला हूं जहां सदियों से अंधेरा है”। यह नारा सिर्फ़ कुछ शब्द नहीं, बल्कि रामविलास पासवान के जीवन का लक्ष्य और उनकी विचारधारा का सार था।
उन्होंने अपने जीवनकाल में इसी लक्ष्य को साधने का प्रयास किया, चाहे वह संसद के गलियारे हों या बिहार के गाँव-देहात। उनका संघर्ष केवल कुर्सी के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के सम्मान और अधिकारों के लिए था, जिन्हें सदियों से उपेक्षित रखा गया था।
चिराग पासवान के नेतृत्व में आगे बढ़ रही विरासत
प्रिंस कुमार ने अपने संबोधन में आगे कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, रामविलास पासवान के उन्हीं विचारों और आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
यह सिर्फ़ एक राजनीतिक वादा नहीं, बल्कि एक दिवंगत नेता के सपनों को साकार करने का संकल्प है। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इस अवसर पर संगठन को मज़बूत करने और रामविलास पासवान के सपनों को पूरा करने का दृढ़ संकल्प लिया।
उनका मानना है कि रामविलास पासवान ने जो नींव रखी थी, उस पर एक मज़बूत और समावेशी समाज की इमारत खड़ी की जा सकती है, और चिराग पासवान उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को विरासत सौंपने और उसे ज़िम्मेदारी से आगे बढ़ाने का एक अनूठा उदाहरण है।
कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रमुख नेता और कार्यकर्ता
इस महत्वपूर्ण अवसर पर पार्टी के कई वरिष्ठ और ज़िला स्तरीय पदाधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने रामविलास पासवान को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों पर चलने की बात दोहराई। इनमें ज़िला संसदीय बोर्ड अध्यक्ष निरंजन कुमार नीरू, ज़िला सचिव संजय कुमार, ज़िला महासचिव दिलीप कुमार, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के ज़िला अध्यक्ष खुर्शीद रशीद जैसे प्रमुख नाम शामिल थे।
इसके अलावा, विधि प्रकोष्ठ के ज़िला अध्यक्ष अधिवक्ता मुकेश कुमार, पंचायती राज प्रकोष्ठ के ज़िला अध्यक्ष संजय पासवान और एससी/एसटी प्रकोष्ठ के सत्यम कुमार सहित कई अन्य पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता भी मौजूद थे। इन सभी की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई और यह संदेश दिया कि रामविलास पासवान के विचार आज भी पार्टी के हर तबके में जीवित हैं और उनका सम्मान करते हुए आगे बढ़ने का जज़्बा है।
जहानाबाद में यह जयंती समारोह सिर्फ़ एक रस्म अदायगी नहीं, बल्कि एक नेता के विराट व्यक्तित्व को याद करने और उसके बताए रास्ते पर चलने की सामूहिक प्रतिज्ञा का प्रतीक बन गया।




































