जहानाबाद: मंगलवार की सुबह जहानाबाद पुलिस केंद्र का माहौल कुछ अलग था। यहाँ हर हफ्ते की तरह इस बार भी जवानों के कदम ताल से मैदान गूंज रहा था। ये कोई आम ड्रिल नहीं थी, बल्कि पुलिस बल को और चुस्त-दुरुस्त बनाने की कवायद थी। पुलिस अधीक्षक कोटा किरण कुमार के सख्त निर्देशों पर पूरे पुलिस बल को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए इस साप्ताहिक परेड का आयोजन किया गया। इसका मकसद सिर्फ अनुशासन और समर्पण नहीं, बल्कि जवानों के बीच गजब का तालमेल बिठाना भी था।
सुबह का समय था, और अलग-अलग टुकड़ियों के जवान सूरज की पहली किरणें पड़ने से पहले ही परेड मैदान में अपनी जगह ले चुके थे। जो भी वहाँ था, वो देख रहा था कि कैसे पूरी मुस्तैदी के साथ जवान तय की गई ड्रिल, मार्च पास्ट और दूसरे शारीरिक अभ्यासों में जुटे हुए थे।
अधिकारियों की पैनी नजर हर जवान पर थी। वो उनकी वर्दी की साफ-सफाई (टर्नआउट), समय पर पहुँचने (समयपालन), उनके काम करने के तरीके (कार्यशैली) और देश के प्रति उनकी निष्ठा (कर्तव्यनिष्ठा) को परख रहे थे।
इस दौरान अधिकारियों ने जवानों का हौसला भी बढ़ाया और उन्हें अपने कर्तव्यों के प्रति हमेशा सजग रहने और अपना बेस्ट देने के लिए प्रेरित किया।
क्यों जरूरी है ये परेड और ट्रेनिंग?
पुलिस अधिकारियों ने इस परेड की अहमियत को समझाते हुए बताया कि ये सिर्फ दिखावे का काम नहीं है। नियमित रूप से होने वाली ये परेड और ट्रेनिंग पुलिसकर्मियों की शारीरिक क्षमता को कई गुना बढ़ाती है।
सोचिए, जब शरीर फिट होगा तो दिमाग भी तेज चलेगा, नहीं? ठीक यही बात जवानों पर भी लागू होती है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है, उन्हें नेतृत्व करने की क्षमता (लीडरशिप क्वालिटी) भी आती है और सबसे बड़ी बात, टीम बनकर काम करने की भावना (टीम स्पिरिट) भी मजबूत होती है।
ये अभ्यास सिर्फ मैदान तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि पुलिस बल को किसी भी चुनौती भरी परिस्थिति में तुरंत और प्रभावी तरीके से काम करने के लिए तैयार करते हैं। आखिर एक अनुशासित और पूरी तरह से प्रशिक्षित पुलिस बल ही तो सही मायने में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने में सबसे ज्यादा सक्षम साबित होता है।
ये वैसा ही है जैसे एक खिलाड़ी रोज प्रैक्टिस करता है ताकि बड़े मैच में अच्छा परफॉर्म कर सके। वैसे ही पुलिसकर्मी भी अपनी रोजमर्रा की ड्यूटी को बेहतरीन ढंग से निभाने के लिए इन अभ्यासों से गुजरते हैं।
जनता से संबंध और व्यवहार का पाठ
परेड के दौरान सिर्फ शारीरिक अभ्यास ही नहीं हुआ, बल्कि जवानों को कुछ ऐसे संदेश भी दिए गए जो उनकी ड्यूटी के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्हें बताया गया कि जनता के प्रति उनका व्यवहार संवेदनशील होना चाहिए।
कानून-व्यवस्था की स्थिति पर हमेशा सतर्क नजर रखनी होगी और किसी भी मुश्किल परिस्थिति में संयम और धैर्य के साथ काम करना है। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि पुलिस और आम जनता के बीच भरोसा और बेहतर रिश्ता बनाने में पुलिसकर्मियों का व्यवहार सबसे अहम भूमिका निभाता है।
अगर पुलिस का व्यवहार अच्छा होगा तो जनता भी खुलकर अपनी बात रखेगी और पुलिस को मदद करेगी। यह दो-तरफा सड़क है जहाँ विश्वास ही पुल का काम करता है।
पुलिस अधीक्षक कोटा किरण कुमार ने इस मौके पर जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि एक प्रभावी और बेहतर पुलिसिंग के लिए सिर्फ शरीर का फिट होना ही काफी नहीं है। इसके साथ-साथ मानसिक रूप से सजग रहना, अनुशासन बनाए रखना और अपने काम के प्रति समर्पण की भावना भी बहुत जरूरी है।
उन्होंने सभी जवानों से आह्वान किया कि वे निष्ठा, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करें। यह एक ऐसा आदर्श है जिसे हर पुलिसकर्मी को अपने दिल में बिठाना होता है।
इस परेड का समापन जवानों के उत्साह को बढ़ाने वाले संबोधन, कुछ जरूरी दिशा-निर्देशों और भविष्य में भी ऐसे ही नियमित प्रशिक्षण जारी रखने के संकल्प के साथ हुआ। सच कहें तो इस पूरे आयोजन ने पुलिस बल में एक नई ऊर्जा भर दी और काम के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।
यह सिर्फ एक साप्ताहिक परेड नहीं थी, बल्कि बेहतर पुलिसिंग और एक सुरक्षित समाज बनाने की दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम था। उम्मीद है कि यह ऊर्जा जहानाबाद की सड़कों पर भी दिखेगी और आम जनता को सुरक्षित महसूस कराएगी।

