जमुई: बिहार के जमुई जिले के खैरा थाना इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार की सुबह रायपुरा गांव के लिए कभी न भूलने वाला दुख लेकर आई। 11 साल की ज्योति कुमारी, जो अपनी नानी के साथ खेत पर गई थी, उसे क्या पता था कि वह ज़िंदगी की आखिरी सुबह देख रही है। आसमान से गिरी आकाशीय बिजली ने पल भर में उसकी सांसें छीन लीं और खुशियों से भरा एक घर मातम में डूब गया।
ये कहानी सिर्फ एक बच्ची की मौत की नहीं, बल्कि उस बेबस नानी की भी है, जिसने अपनी आंखों के सामने अपनी पोती को असमय खो दिया। ज्योति, सनोज रावत की बेटी थी, लेकिन वो बचपन से ही अपनी नानी के पास रहती थी।
नानी ही उसकी दुनिया थीं और ज्योति ही नानी का सहारा। रोज़ की तरह मंगलवार सुबह भी दोनों खेत के काम के लिए घर से निकलीं।
खेत में काम करते-करते कब मौसम का मिज़ाज बदला, इसका किसी को अंदाज़ा नहीं हुआ।
एक मासूम की कहानी और ज़िंदगी का सफर
रायपुरा गांव की ज्योति कुमारी का जीवन बचपन से ही थोड़ा अलग था। वह अपने माता-पिता के बजाय अपनी नानी के साथ पली-बढ़ी थी।
नानी और पोती के बीच का रिश्ता सिर्फ खून का नहीं, बल्कि ज़िंदगी के हर सुख-दुख का साथी था। ज्योति अपनी नानी के काम में हाथ बंटाती थी और नानी उसे अपने कलेजे का टुकड़ा मानती थीं।
सुबह का वक्त था, जब दोनों मिलकर खेतों की तरफ बढ़ रही थीं। ग्रामीण इलाकों में यह आम बात है कि परिवार के लोग, खासकर बच्चे भी, बड़े-बुज़ुर्गों के साथ खेत के कामों में मदद करते हैं।
शायद ज्योति भी यही कर रही थी, अपनी नानी के साथ, अपने रोज़मर्रा के जीवन में खुश।
सूरज निकल चुका था और दिन की शुरुआत हो रही थी। खेतों में थोड़ी देर काम करने के बाद, सब कुछ सामान्य लग रहा था।
लेकिन प्रकृति ने कुछ और ही तय कर रखा था। अचानक आसमान में काले बादल छाने लगे और देखते ही देखते तेज़ गर्जन के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई।
ऐसी बारिश जो अक्सर बिहार के ग्रामीण इलाकों में बिजली गिरने का संकेत देती है।
खेत में मौत का मंजर: बिजली का कहर
बारिश तेज़ हुई तो ज्योति और उसकी नानी ने शायद किसी सुरक्षित जगह की तलाश की होगी, या बारिश रुकने का इंतज़ार कर रही होंगी। ज्योति अपनी नानी से थोड़ी दूर पर खड़ी थी।
शायद कुछ पल का फ़ासला, जो ज़िंदगी और मौत के बीच की खाई बन गया। तभी अचानक, आसमान से बिजली कौंधी और सीधे ज्योति पर गिरी।
यह इतना अप्रत्याशित और तेज़ था कि किसी को कुछ सोचने-समझने का मौका ही नहीं मिला। वज्रपात की चपेट में आते ही 11 साल की ज्योति ने वहीं मौके पर दम तोड़ दिया।
अपनी आंखों के सामने अपनी पोती को इस तरह खोते देख नानी बदहवास हो गईं। उनके चीखने-चिल्लाने की आवाज़ सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े।
लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। एक हंसती-खेलती बच्ची, जिसने अभी ठीक से दुनिया देखी भी नहीं थी, वह ज़िंदगी की जंग हार चुकी थी।
गांव में मातम पसर गया। हर कोई इस घटना से स्तब्ध था।
उस दृश्य की कल्पना करना भी मुश्किल है, जब एक नानी अपनी पोती के निर्जीव शरीर के पास खड़ी बिलख रही हो।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया
घटना की खबर मिलते ही खैरा थाना पुलिस फौरन मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति का जायज़ा लिया और स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाई।
बच्ची के शव को देखकर पुलिसकर्मियों की भी आंखें नम हो गईं। पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं और आवश्यक पंचनामा तैयार किया।
इसके बाद, मृत बच्ची ज्योति कुमारी के शव को पोस्टमार्टम के लिए जमुई सदर अस्पताल भेज दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सकेगी, हालांकि प्रारंभिक तौर पर यह आकाशीय बिजली गिरने से हुई मौत का स्पष्ट मामला लग रहा है।
पुलिस ने मामले की आगे की जांच शुरू कर दी है और हर पहलू से पड़ताल कर रही है ताकि सभी कानूनी प्रक्रियाएं ठीक से पूरी की जा सकें।
मौसम विभाग का अलर्ट और प्रशासन की चेतावनी
गौरतलब है कि घटना के दिन मंगलवार सुबह से ही जमुई जिले में लगातार मूसलाधार बारिश हो रही थी। मौसम विभाग ने पहले ही इस संबंध में येलो अलर्ट जारी कर दिया था।
विभाग ने बताया था कि जिले में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवाएं चल सकती हैं और कई इलाकों में वज्रपात की आशंका भी जताई गई थी। यह चेतावनी लोगों की सुरक्षा के लिए जारी की गई थी, लेकिन कभी-कभी प्रकृति का कहर इतना अप्रत्याशित होता है कि सारी सावधानियां धरी की धरी रह जाती हैं।
इस दुखद घटना के बाद ज़िला प्रशासन ने एक बार फिर लोगों से अपील की है। प्रशासन ने कहा है कि खराब मौसम के दौरान, खासकर जब बादल गरज रहे हों और बिजली चमक रही हो, तो लोगों को खुले खेतों, बड़े पेड़ों के नीचे और सुनसान स्थानों पर जाने से बचना चाहिए।
ऐसे समय में सुरक्षित स्थानों पर रहना ही सबसे समझदारी भरा कदम है। यह घटना हमें फिर से याद दिलाती है कि प्रकृति की ताक़त के आगे इंसान कितना छोटा है और सावधानी ही बचाव का एकमात्र रास्ता है।

