कानपुर: सोचिए, एक जगह जो महकमा खुद शहर की सुरक्षा का जिम्मा उठाता हो, उस जगह से अगर चोर खुलेआम आकर किसी का सामान उड़ा ले जाएं तो आप क्या कहेंगे? कानपुर से ठीक ऐसी ही एक हैरतअंगेज खबर सामने आई है, जहां ट्रैफिक पुलिस लाइन में बनी सरकारी बैरक से एक पुलिसकर्मी की स्कूटी ही गायब हो गई। और तो और, ये सब तब हुआ जब शहर में ‘कानून-व्यवस्था’ की बातें हो रही हैं। अब पुलिस खुद अपने ही घर के चोरों को ढूंढने में माथापच्ची कर रही है।
ये कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है. कानपुर के रेल बाजार थाना क्षेत्र में ट्रैफिक पुलिस लाइन है.
यहीं पर हमारे एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी, प्रदीप सिंह साहब रहते हैं. जैसे और लोग दफ्तर के बाद अपने घर लौटते हैं, वैसे ही प्रदीप सिंह भी 14 जून की शाम अपनी ड्यूटी खत्म कर बैरक लौटे.
उन्होंने अपनी टीवीएस जुपिटर स्कूटी हमेशा की तरह अपने सरकारी आवास के बाहर खड़ी की और अंदर चले गए. शाम के करीब 8:30 बजे रहे होंगे.
सब कुछ सामान्य था. कोई नहीं जानता था कि अगले कुछ घंटों में उनके साथ एक ऐसी वारदात होने वाली है, जो सिर्फ उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे पुलिस महकमे के लिए सिरदर्द बन जाएगी.
पुलिस के 'अपने' आंगन से हुई चोरी
रात के खाने, कुछ बातचीत और फिर सोने की तैयारी. प्रदीप सिंह को शायद अंदाज़ा भी नहीं था कि जब वो सुबह उठेंगे, तो उनके सामने एक अजीब सी उलझन खड़ी होगी.
अगली सुबह या रात में जब भी उन्हें अपनी स्कूटी की जरूरत पड़ी, तो वो अपनी जगह पर नहीं थी. प्रदीप सिंह ने पहले सोचा कि शायद उन्होंने कहीं और खड़ी कर दी होगी या कोई साथी पुलिसकर्मी ले गया होगा.
लेकिन, हर तरफ तलाश करने के बाद भी जब स्कूटी का अता-पता नहीं चला, तो उनके होश उड़ गए. आस-पड़ोस में पूछताछ की, कॉलोनी के लोगों से पूछा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला.
उनकी शिकायत के मुताबिक, 14 जून की रात करीब 8:30 बजे से 10:30 बजे के बीच किसी अज्ञात चोर ने उनकी चमचमाती टीवीएस जुपिटर स्कूटी को रफूचक्कर कर दिया था. वो भी कहां से? सीधे पुलिस बैरक के गेट से! अब आप ही बताइए, अगर पुलिस के घर में ही चोर घुस जाएं, तो आम आदमी कहां जाए?
घटना का पता चलते ही प्रदीप सिंह ने पहले खुद अपने स्तर पर काफी छानबीन की. उन्होंने पुलिस लाइन के अंदर हर कोने में देखा, अपने साथियों से पूछा कि क्या किसी ने उनकी स्कूटी देखी है या ले गए हैं, लेकिन नतीजा सिफर रहा.
जब हर कोशिश नाकाम हो गई और चोर का कोई निशान नहीं मिला, तो फिर उन्हें थाने का रुख करना पड़ा. मंगलवार को प्रदीप सिंह ने रेलबाजार थाने में जाकर इस पूरी घटना की जानकारी दी और विधिवत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई.
उन्होंने अपनी शिकायत में साफ-साफ बताया कि कैसे उनके सरकारी आवास के बाहर से उनकी स्कूटी चोरी हो गई है और अब उन्हें पुलिस की मदद चाहिए ताकि उनकी गाड़ी वापस मिल सके और चोर पकड़े जा सकें.
सीसीटीवी फुटेज: उम्मीद और चुनौती
पुलिस के लिए यह मामला सिर्फ एक चोरी का नहीं, बल्कि साख का भी है. अपने ही परिसर से वाहन चोरी हो जाए, तो सवाल तो उठेंगे ही.
शिकायत मिलते ही रेलबाजार थाना पुलिस हरकत में आई. थाना प्रभारी अमान सिंह ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जांच शुरू करने के आदेश दिए.
पुलिस टीम ने सबसे पहले इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगालना शुरू किया. पुलिस लाइन और उसके आसपास कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, जिनकी मदद से अक्सर आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखी जाती है.
अब इन्हीं कैमरों की फुटेज को बारीकी से देखा जा रहा है. उम्मीद है कि शायद चोरों की कोई हरकत इन कैमरों में कैद हो गई होगी, जिससे उनकी पहचान हो सके और चोरी की गुत्थी सुलझाई जा सके.
लेकिन, सीसीटीवी फुटेज खंगालना भी अपने आप में एक चुनौती है. कई बार फुटेज साफ नहीं होती, या चोर इतने शातिर होते हैं कि कैमरों की नजर से बच निकलते हैं.
पुलिसकर्मी प्रदीप सिंह के लिए यह घटना किसी झटके से कम नहीं है. अपनी गाढ़ी कमाई से खरीदी गई स्कूटी का यूं गायब हो जाना, ऊपर से यह घटना पुलिस के अपने परिसर में हुई है, जो सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर चर्चाएं गर्म हैं. अगर पुलिसकर्मी ही अपने परिसर में सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा, ये सवाल हर जुबान पर है.
थाना प्रभारी अमान सिंह ने इस मामले पर जानकारी देते हुए कहा कि उनकी टीम लगातार सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश में जुटी है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही इस मामले का खुलासा करने का प्रयास किया जाएगा और चोरों को कानून के शिकंजे में लाया जाएगा.
पुलिस फिलहाल हर पहलू से जांच कर रही है – कहीं ये कोई आपसी रंजिश तो नहीं, या फिर सिर्फ एक आम वाहन चोर गिरोह का काम है. लेकिन सच ये है कि जब तक स्कूटी मिलती नहीं और चोर पकड़े नहीं जाते, तब तक ट्रैफिक पुलिसकर्मी प्रदीप सिंह की चिंता बनी रहेगी और पुलिस की साख पर भी ये सवालिया निशान बना रहेगा.

