कानपुर: कल्पना कीजिए एक ट्रक जो सड़क पर आम तौर पर सामान ढोता हुआ दिखता है, लेकिन उसके भीतर छिपा है करोड़ों का नशा। मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर का है, जहाँ पुलिस ने एक ऐसी ही खेप पकड़ी है जो ओडिशा के जंगलों से निकलकर राजस्थान के बाजारों तक पहुँचने वाली थी। पुलिस ने जब ट्रक की तलाशी ली, तो अंदर से गांजे की ऐसी सिल्लियां निकलीं कि अधिकारियों के भी होश उड़ गए।
कानपुर पुलिस कमिश्नरेट ने इस पूरी कार्रवाई को 'ऑपरेशन व्हाइट पाउडर' के तहत अंजाम दिया। रविवार का दिन था और सजेती थाना क्षेत्र के बरीपाल मार्केट के पास पुलिस ने एक संदिग्ध ट्रक को रोका।
जब ट्रक की गहराई से जांच हुई, तो पता चला कि इसमें करीब चार क्विंटल गांजा लदा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये बताई जा रही है।
पुलिस की इस मुस्तैदी ने तस्करों के उस बड़े प्लान को फेल कर दिया, जिसके तहत इस नशे को राजस्थान के अलग-अलग जिलों में पहुँचाकर छोटी-छोटी पुड़ियों में बेचा जाना था। पुलिस ने मौके से ट्रक चालक को गिरफ्तार कर लिया है, जो भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पुलिस की घेराबंदी इतनी सख्त थी कि वह बच नहीं सका।
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पुलिस की घेराबंदी और गिरफ्तारी
इस पूरी कार्रवाई की कमान एडीसीपी साउथ सुमित सुधाकर रामटेके की टीम संभाल रही थी। पुलिस को पुख्ता सूचना मिली थी कि ओडिशा से भारी मात्रा में गांजा कानपुर के रास्ते राजस्थान ले जाया जा रहा है।
सूचना मिलते ही घाटमपुर एसीपी कृष्णकांत और सजेती पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और बरीपाल मार्केट के पास नाकाबंदी कर दी। जैसे ही ट्रक वहां पहुंचा, पुलिस ने उसे रोक लिया।
तलाशी के दौरान गांजे की सैकड़ों सिल्लियां बरामद हुईं। \
तस्करों का शातिराना तरीका
गिरफ्तार चालक ने पूछताछ में अपना नाम रामेश्वर बताया, जो राजस्थान का रहने वाला है। रामेश्वर ने पुलिस को बताया कि उसे यह खेप राजस्थान की सीमा में प्रवेश करने के बाद एक व्यक्ति को सौंपनी थी।
दिलचस्प बात यह है कि सप्लाई लेने वाले व्यक्ति के पास केवल ट्रक का नंबर था, जबकि ओडिशा के तस्कर बीच में एक पुल की तरह काम कर रहे थे, ताकि मुख्य सरगना की पहचान गुप्त रहे।
जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। तस्कर पुलिस की नजरों से बचने के लिए एक बहुत ही शातिराना तरीका अपनाते थे।
वे अक्सर ट्रक में महिलाओं और बच्चों को साथ बैठा लेते थे ताकि पुलिस को शक न हो और वे इसे एक पारिवारिक सफर समझकर जाने दें। इस बार भी ट्रक में महिलाएं और बच्चे सवार थे, लेकिन कानपुर पहुँचने से पहले ही उन्हें रास्ते में उतार दिया गया था।
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अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच
पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन से बड़े चेहरे हैं। ओडिशा में गांजा कम कीमत पर मिलता है, लेकिन जब यह राजस्थान या अन्य राज्यों में पहुँचता है, तो इसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है।
यही मुनाफा तस्करों को इस खतरनाक खेल की ओर खींचता है। पुलिस ने चालक का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और कॉल डिटेल्स के जरिए उड़ीसा और राजस्थान के बीच सक्रिय इस तस्करी नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
एडीसीपी साउथ सुमित रामटेके ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल एक शुरुआत है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस का यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।




































