कानपुर: ज़रा सोचिए, आप रोज़ की तरह अपना काम-धाम निपटाकर आराम से सो रहे हों, और आपकी नींद में ही आपके बैंक खाते से कोई लाखों रुपये उड़ा ले जाए! कानपुर के पनकी इलाके से आई ये खबर बिल्कुल ऐसी ही चौंकाने वाली है. एक आम आदमी, उमाशंकर, के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. साइबर ठगों ने उनके मोबाइल पर ऐसी सेंध लगाई कि पता ही नहीं चला और पांच दिनों के भीतर उनके बैंक अकाउंट से करीब पौने पांच लाख रुपये गायब हो गए. अब सवाल ये है कि ये सब हुआ कैसे, और कब तक इस लूट का पता भी नहीं चला?
मामला कानपुर के पनकी थाना क्षेत्र का है, जहां साइबर अपराधियों ने उमाशंकर नाम के एक शख्स का मोबाइल हैक किया और उनके बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते को पूरी तरह खाली कर दिया. यकीन मानिए, ये कोई एक-दो ट्रांजैक्शन की बात नहीं थी, बल्कि ठगों ने लगातार पांच दिनों तक धीरे-धीरे करके, यूपीआई के जरिए छोटे-बड़े ट्रांजैक्शन करके खाते से 4 लाख 71 हजार से ज़्यादा रुपये उड़ा लिए.
जब तक पीड़ित को इस बात की भनक लगी, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उनका खाता लगभग खाली हो चुका था.
उमाशंकर को जैसे ही अपने खाते से लगातार रकम निकलने का पता चला, उन्होंने तुरंत बैंक को इसकी जानकारी दी ताकि आगे कोई और लेन-देन न हो पाए. इसके बाद, उन्होंने अपनी शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर भी दर्ज कराई.
साइबर सेल ने मामले की तकनीकी जांच की और अपनी रिपोर्ट पनकी पुलिस को सौंपी. इस रिपोर्ट के मिलने के लगभग एक महीने बाद, और पुलिस आयुक्त के निर्देश के 21 दिन बाद, पिछले शुक्रवार को पनकी पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ आखिरकार मुकदमा दर्ज कर लिया है और अब इस पूरे मामले की जांच शुरू हो गई है.
कब और कैसे हुई ये बड़ी सेंधमारी?
पनकी के गंगागंज में रहने वाले उमाशंकर ने पुलिस को अपनी शिकायत में बताया कि साइबर ठगों ने उनके मोबाइल फोन को ही हैक कर लिया था. एक बार मोबाइल तक पहुंच बनाने के बाद, ठग सीधे उनके बैंक ऑफ बड़ौदा की कल्याणपुर शाखा स्थित खाते तक पहुंच गए.
इसके बाद जो सिलसिला शुरू हुआ, वो किसी डरावनी कहानी से कम नहीं था. 23 मई से 27 मई के बीच, यानी पूरे पांच दिनों तक, साइबर लुटेरों ने यूपीआई के माध्यम से अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करके उमाशंकर के खून-पसीने की कमाई को लूट लिया.
जरा इन आंकड़ों पर गौर कीजिए, ये बताते हैं कि कैसे धीरे-धीरे करके सारा पैसा साफ हो गया:
- 23 मई को उनके खाते से 95,450 रुपये निकाले गए.
- अगले दिन, 24 मई को, 98,455 रुपये उड़ा दिए गए.
- 25 मई को ठगों ने 98,550 रुपये की एक और सेंधमारी की.
- 26 मई को, 99,001 रुपये खाते से गायब हुए.
- और फिर, 27 मई को, 80,000 रुपये निकालकर खाते को लगभग खाली कर दिया गया.
इस तरह, कुल मिलाकर 4 लाख 71 हजार 456 रुपये की बड़ी साइबर ठगी को अंजाम दिया गया. यह दिखाता है कि कैसे शातिर अपराधी एक झटके में नहीं, बल्कि धीरे-धीरे और चुपचाप आपके खाते को खाली कर सकते हैं, और आपको पता भी नहीं चलेगा.
शिकायत; फिर एक महीने का इंतज़ार
उमाशंकर को जब अपने खाते से लगातार पैसे निकलने का एहसास हुआ, तो उनकी रातों की नींद उड़ गई. उन्होंने तत्काल बैंक अधिकारियों को इसकी जानकारी दी, ताकि बचे हुए पैसे को बचाया जा सके और आगे कोई लेन-देन न हो.
इसके बाद, उन्होंने एक जून को राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई. यह एक महत्वपूर्ण कदम था, क्योंकि साइबर अपराधों की जांच के लिए अक्सर यह पहला आधिकारिक जरिया होता है.
शिकायत दर्ज होने के बाद, साइबर सेल ने इस मामले की तकनीकी जांच शुरू की. इस जांच में यह पता लगाने की कोशिश की गई कि पैसा किन खातों में गया, किस यूपीआई आईडी का इस्तेमाल हुआ, और कहां से यह सेंधमारी की गई.
साइबर सेल ने अपनी पूरी रिपोर्ट तैयार की और उसे संबंधित थाना पुलिस, यानी पनकी पुलिस को भेज दिया. लेकिन इस रिपोर्ट के मिलने के बाद भी, पनकी पुलिस को मुकदमा दर्ज करने में लगभग एक महीने का समय लग गया, जिससे पीड़ित को और इंतज़ार करना पड़ा.
आखिरकार दर्ज हुआ मुकदमा
जब साइबर सेल की रिपोर्ट पनकी पुलिस तक पहुंच गई, और शायद कुछ ऊपरी दबाव भी बना होगा, क्योंकि खबर के मुताबिक, पुलिस आयुक्त के निर्देश के 21 दिन बाद मुकदमा दर्ज हुआ. आखिरकार पिछले शुक्रवार को पनकी पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया.
यह पीड़ित उमाशंकर के लिए एक राहत की बात थी कि उनके साथ हुई ठगी पर कानूनी कार्रवाई शुरू हुई.
एसीपी पनकी अमित चौरसिया ने मीडिया को बताया है कि साइबर सेल की रिपोर्ट के आधार पर ही मुकदमा दर्ज किया गया है. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अब पुलिस उन सभी बैंक खातों, यूपीआई आईडी और मोबाइल नंबरों की गहन पड़ताल कर रही है, जिनमें ठगी की गई रकम ट्रांसफर की गई थी.
पुलिस की टीम अब इन तकनीकी पहलुओं का विश्लेषण करके अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश करेगी. उम्मीद है कि इस जांच के बाद, साइबर ठगों का पर्दाफाश होगा और उमाशंकर को उनका पैसा वापस मिल पाएगा, या कम से कम अपराधी सलाखों के पीछे होंगे.

