प्रयागराज: आगरा का ताजमहल... नाम सुनते ही मोहब्बत की वो निशानी आंखों के सामने आ जाती है, जिसे शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया था. दुनिया के अजूबों में शुमार ये इमारत सिर्फ एक मकबरा नहीं, बल्कि भारत की शान और पहचान है. लेकिन, क्या हो अगर कोई आपसे कहे कि जिसे हम ताजमहल कहते हैं, वो दरअसल एक पुराना शिव मंदिर है? जी हां, यही दावा एक बार फिर सुर्खियों में है, और इस बार मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है. सोमवार को इस पर सुनवाई होनी है, जिससे इस पुरानी बहस को एक नई धार मिलने की उम्मीद है.
कहा जा रहा है कि ताजमहल परिसर में भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर मौजूद होने का दावा है. इसी दावे को पुख्ता करने के लिए अब याचिकाकर्ताओं ने अदालत से गुहार लगाई है कि परिसर का सर्वेक्षण कराया जाए.
इस याचिका के साथ ही, ताजमहल से जुड़ा एक और अध्याय कानूनी किताबों में जुड़ने जा रहा है.
ताजमहल बनाम तेजो महालय: एक पुरानी कहानी
ये कोई नई बात नहीं है. ताजमहल को तेजो महालय कहे जाने का दावा दशकों से चला आ रहा है.
कई इतिहासकार और संगठन ये तर्क देते रहे हैं कि यह इमारत शाहजहां के काल से पहले की है और मूल रूप से एक शिव मंदिर या महल था, जिसे बाद में मकबरे में बदल दिया गया. इसी कड़ी में, वर्ष 2015 में आगरा के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में एक दीवानी मुकदमा दायर किया गया था.
इस मुकदमे में सीधे-सीधे ये मांग की गई कि अदालत इस बात की घोषणा करे कि ताजमहल परिसर में सचमुच भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर स्थित है.
मुकदमे में आगे बढ़कर, इस दावे को सिद्ध करने के लिए याचिकाकर्ताओं ने एक एडवोकेट कमीशन नियुक्त करने की अर्जी लगाई. एडवोकेट कमीशन का काम होता है मौके पर जाकर जांच करना, साक्ष्य जुटाना और अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपना.
ये एक ऐसा कदम था, जिससे उम्मीद थी कि परिसर के भीतर मौजूद किसी भी संभावित सबूत को सामने लाया जा सके, जिससे मंदिर होने के दावे को बल मिले.
निचली अदालतों से निराशा, हाईकोर्ट की ओर रुख
हालांकि, याचिकाकर्ताओं की ये उम्मीद पूरी नहीं हुई. आगरा की निचली अदालतों ने एडवोकेट कमीशन नियुक्त करने की प्रार्थना को ठुकरा दिया.
सबसे पहले सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत ने इस मांग को अस्वीकार किया. इसके बाद, जब याचिकाकर्ताओं ने अपर जिला जज के पास अपील की, तो वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली.
दोनों अदालतों ने विवादित परिसर का सर्वेक्षण कराने के लिए एडवोकेट कमीशन नियुक्त करने का आदेश देने से इनकार कर दिया.
निचली अदालतों से आदेश न मिलने के बाद याचिकाकर्ताओं के पास इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा था. लिहाजा, उन्होंने अब हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसमें निचली अदालतों के उन आदेशों को चुनौती दी गई है, जिनमें सर्वेक्षण की अनुमति नहीं दी गई थी.
यह याचिका स्वयं 'भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय जरिये मित्र हरिशंकर जैन' सहित पांच अन्य लोगों की ओर से संयुक्त रूप से दाखिल की गई है. इस मामले में भारत सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और दो अन्य को विपक्षी बनाया गया है.
यह दर्शाता है कि यह सिर्फ एक निजी दावा नहीं, बल्कि एक कानूनी लड़ाई है जिसमें देश के सर्वोच्च सांस्कृतिक और पुरातात्विक संगठन भी शामिल हैं.
सर्वेक्षण की मांग क्यों, और क्या बदल सकता है?
याचिकाकर्ता चाहते हैं कि एक स्वतंत्र सर्वेक्षण कराया जाए, जिससे ताजमहल के निर्माण से जुड़े 'छिपे हुए' तथ्यों को उजागर किया जा सके. उनके तर्क के अनुसार, अगर वास्तव में यह तेजो महालय मंदिर था, तो सर्वेक्षण से इसके वास्तुशिल्प, अंदरूनी संरचना, मूर्तियों या किसी अन्य धार्मिक प्रतीक के अवशेष सामने आ सकते हैं.
उनका मानना है कि वर्तमान संरचना के नीचे या दीवारों के भीतर मंदिर से जुड़े सबूत मौजूद हैं, जिन्हें बाहर लाने के लिए एक विस्तृत जांच की आवश्यकता है.
इस तरह के सर्वेक्षण से न सिर्फ कानूनी लड़ाई को एक नई दिशा मिलेगी, बल्कि यह भारत के इतिहास, पुरातात्विक अध्ययन और सांस्कृतिक विरासत पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है. ताजमहल को अभी तक एक मुग़लकालीन मकबरा माना जाता रहा है, और अगर यह दावा साबित होता है कि यह एक शिव मंदिर था, तो इससे देश के ऐतिहासिक नैरेटिव में एक बड़ा बदलाव आ सकता है.
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के लिए भी यह एक चुनौती होगी, क्योंकि वह वर्तमान में ताजमहल को एक विश्व धरोहर स्थल के रूप में संरक्षित कर रहा है.
यह मामला केवल एक इमारत के स्वामित्व का नहीं है, बल्कि सदियों से चली आ रही मान्यताओं और इतिहास के पुनर्मूल्यांकन का भी है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में सोमवार को होने वाली सुनवाई इस जटिल और संवेदनशील मुद्दे पर आगे बढ़ने का रास्ता तय करेगी.
यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस याचिका पर क्या रुख अपनाती है और क्या ताजमहल के 'रहस्यों' से पर्दा उठाने के लिए सर्वेक्षण का आदेश दिया जाता है.

