मुरादाबाद: देर रात का सन्नाटा था, आसमान में तारे टिमटिमा रहे थे और शहर के एकता नगर कॉलोनी में बिजली गुल थी. भीषण गर्मी ऐसी कि घर के अंदर दम घुटे. ऐसे में एक परिवार ने सोचा कि चलो, छत पर ही पलंग बिछा लें, शायद थोड़ी राहत मिल जाए. क्या पता था कि जिस छत पर वे सुकून की नींद ढूंढने जा रहे थे, वही छत मौत का बुलावा लेकर आएगी? मुरादाबाद के मझोला थाना क्षेत्र में एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार की ज़िंदगी में अंधेरा घोल दिया.
ये घटना शुक्रवार रात की है, जब ओमपाल सिंह अपने परिवार के साथ रहते हैं. उनके बड़े बेटे सतीश ने जो आपबीती बताई है, वो रोंगटे खड़े करने वाली है.
सतीश के मुताबिक, रात करीब 12:30 बजे बिजली भाग गई थी. घर में उमस और गर्मी इतनी ज़्यादा थी कि अंदर सोना मुश्किल हो रहा था.
इसलिए ओमपाल सिंह, उनकी पत्नी बबीता और सात साल का मासूम बेटा हर्षित—ये तीनों छत पर सोने के लिए चले गए. शायद उन्हें लगा होगा कि खुली हवा में थोड़ी ठंडक मिलेगी, नींद अच्छी आएगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था.
कुछ देर बाद, बिजली वापस आई. अंधेरे में डूबे घर फिर से रौशनी से जगमगा उठे.
बिजली आने के बाद ओमपाल सिंह की पत्नी बबीता ने अपने पति से कहा कि पंखा चला दो, ताकि थोड़ी राहत मिल सके. ओमपाल सिंह ने जैसे ही पंखे का प्लग लगाया और स्विच ऑन किया, ठीक उसी वक़्त उनके घर के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन में अचानक कोई फाल्ट हो गया.
ये एक पल का वाकया था, जिसने सब कुछ बदल दिया. इस फाल्ट के साथ ही पूरे घर की वायरिंग में आग लग गई और पलक झपकते ही तेज़ करंट दौड़ गया.
पंखा लगाते ही पूरे घर में दौड़ा मौत का करंट
सतीश ने बताया कि ये सब इतनी तेज़ी से हुआ कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला. पंखे का स्विच ऑन करते ही जो करंट घर में दौड़ा, उसने ओमपाल सिंह, उनकी पत्नी बबीता और मासूम बेटे हर्षित, तीनों को अपनी ज़द में ले लिया.
करंट की चपेट में आते ही तीनों बुरी तरह से झुलस गए. दर्द से चीखने-चिल्लाने की आवाज़ें इतनी तेज़ थीं कि रात के सन्नाटे में दूर तक सुनाई दीं.
ये एक ऐसा मंज़र था, जिसे सुनकर पड़ोसियों का कलेजा मुंह को आ गया.
हादसा इतना भयानक था कि घर की वायरिंग जलने लगी थी और चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई. ओमपाल सिंह और बबीता के साथ, उनके बच्चे हर्षित की भी जान पर बन आई थी.
परिवार की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग तुरंत हरकत में आए. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो गया, लेकिन आवाज़ों ने बता दिया था कि कोई बड़ी अनहोनी हुई है.
बिना देर किए, पड़ोसियों ने हिम्मत जुटाई और जैसे-तैसे तीनों झुलसे हुए लोगों को संभाला. उनकी हालत बेहद गंभीर थी.
जिला अस्पताल में मची अफरा-तफरी, अधिकारियों का दौरा
घायलों को बिना एक पल गंवाए तुरंत मुरादाबाद के जिला अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल पहुंचते ही वहां भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ तुरंत तीनों के इलाज में जुट गए. ओमपाल सिंह, बबीता और हर्षित की हालत देखकर डॉक्टर भी चिंतित हो गए.
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए. ये खबर गंभीर थी और अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया.
एसडीएम सदर और सीओ सिविल लाइंस तुरंत जिला अस्पताल पहुंचे. उन्होंने पीड़ित परिवार से घटना के बारे में विस्तार से जानकारी ली.
अधिकारियों ने डॉक्टरों को साफ़ निर्देश दिए कि पीड़ित परिवार का समुचित और बेहतर इलाज किया जाए और इसमें किसी भी तरह की कोई कोताही न बरती जाए. डॉक्टरों की टीम ने अपनी पूरी जान लगा दी.
बताया जा रहा है कि बबीता की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है, जो पूरे परिवार के लिए चिंता का विषय है. यह घटना उन तमाम परिवारों के लिए एक सबक है, जिनके घरों के ऊपर से हाईटेंशन लाइनें गुजरती हैं.
बिजली विभाग को भी ऐसी लाइनों की नियमित जांच सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी जानलेवा दुर्घटनाओं को रोका जा सके.
एक मामूली पंखा चलाकर गर्मी से राहत पाने की कोशिश कैसे ज़िंदगी भर का दर्द दे सकती है, ये मुरादाबाद की ये घटना उसकी एक कड़वी मिसाल है. पूरा परिवार सदमे में है और अब सिर्फ यही दुआ की जा रही है कि तीनों जल्द से जल्द स्वस्थ होकर अपने घर लौटें.

